बड़ा फैसला: जन्म प्रमाण में विरोधाभास, 20 साल की सजा निरस्त

सजा निरस्त

बिच्छू डॉट कॉम। हाईकोर्ट ने डिंडोरी के एक पॉक्सो केस में महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए अपील स्वीकार कर आरोपी मुकेश पंड्रो की दोषसिद्धि और सजा निरस्त कर उसे दोषमुक्त कर दिया। न्यायमूर्ति विवेक अग्रवाल और न्यायमूर्ति अवनींद्र कुमार सिंह की युगलपीठ ने कहा कि अभियोजन यह साबित नहीं कर सका कि घटना के समय पीडि़ता नाबालिग थी। विशेष जज (पॉक्सो), डिंडोरी ने 20 साल की सजा सुनाई थी। हाई कोर्ट में बचाव पक्ष ने तर्क दिया कि पीडि़ता अपनी इच्छा से आरोपी के साथ गई थी और दोनों के बीच सहमति से संबंध थे। सुनवाई के दौरान जन्मतिथि संबंधी दस्तावेजों में विरोधाभास सामने आया। कोर्ट ने पाया कि जन्म प्रमाण-पत्र घटना के 11 वर्ष बाद बनाया गया था, जबकि पीडि़ता की मां के बयान के आधार पर उसकी जन्मतिथि वर्ष 2005 मानी गई। इससे घटना के समय उसकी आयु 18 वर्ष से अधिक निकली।

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