मप्र में सालाना साइबर ठगी 600 करोड़ रुपये के पार

साइबर ठगी
  • 50 लाख लोगों को साइबर ठगी के प्रति जागरूक करने का लक्ष्य

भोपाल/बिच्छू डॉट कॉम। प्रदेश में साइबर ठगी की बढ़ती घटनाओं को रोकने के लिए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने सेफ क्लिक 2.0 अभियान का बुधवार को शुभारंभ किया। इसमें 50 लाख लोगों का जागरूक करने का लक्ष्य है। इसके बीच, संसाधनों की बात करें तो स्थिति बहुत खराब है। साइबर मुख्यालय से लेकर जिलों तक में साइबर पुलिस के मात्र 290 स्वीकृत पद हैं। इनमें लगभग 30 रिक्त हैं। इसमें साइबर मुख्यालय, जोनल कार्यालय, साइबर थाना और फोरेंसिक लैब का अमला शामिल है। मानव संसाधन और अन्य अमला बढ़ाने के लिए पुलिस मुख्यालय ने शासन को प्रस्ताव तो कई भेजे पर लगभग सभी अटके हैं। इसकी बड़ी वजह बजट का अभाव बताया जा रहा है।
प्रदेशभर में मात्र एक साइबर थाना
प्रदेश में साइबर का अभी एकमात्र थाना भोपाल में है। सभी जिलों में एक थाना और हर थाने में एक साइबर हेल्प डेस्क बनाने का प्रस्ताव तीन वर्ष से लंबित है। इस बीच, डॉ. मोहन यादव ने यह भी कहा है कि व्यवस्थाओं को सशक्त किया जाएगा, लेकिन जागरूकता इसमें सबसे बड़ा हथियार है।
अन्य राज्यों में बेहतर स्थिति: उत्तर प्रदेश की बात करें तो यहां वर्ष 2017 के पहले दो थाने थे। अब इनकी संख्या 75 है। मार्च, 2026 की स्थिति में देशभर में 459 थाने थे। बड़े राज्यों में सबसे खराब स्थित मध्य प्रदेश की है। एक थाना में थाना प्रभारी के अतिरिक्त करीब 60 पुलिसकर्मियों का बल रहता है। सभी जिलों में एक साथ थाना खोलने की जगह पहले महानगरों में और बाद में चरणबद्ध तौर पर अन्य जिलों में खोलने का भी शासन के स्तर पर विचार हुआ, पर उस पर भी अमल नहीं किया गया।
फाइलों में अटका प्रस्ताव
थानों के अतिरिक्त सबसे जरूरी मानव संसाधन की बात करें तो 27 कंसल्टेंट की भर्ती का प्रस्ताव भी दो वर्ष से फाइलों में ही है। साइबर पुलिस के पास अभी तकनीकी जानकार नहीं हैं, इसलिए कंसल्टेंट नियुक्त करने का प्रस्ताव है। ये कंप्यूटर साइंस या आईटी में इंजीनियरिंग स्नातक होंगे। ये साइबर ठगी की घटनाओं को रोकने के लिए सलाह देने के साथ ही ठगी की राशि होल्ड कराने, अपराधियों के नेटवर्क का पता लगाने, हैकिंग, साइबर अटैक जैसी घटनाओं को रोकने और आरोपितों को पकडऩे में सहयोग करेंगे। राज्य स्तर पर एक बड़ी फोरेंसिक लैब बनाने, साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 का काल सेंटर बनाने, ठगी की राशि होल्ड कराने के लिए मिटिगेशन सेंटर बनाने के प्रस्ताव भी हैं।

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