भोपाल की रिंग रोड फिर अटकी

रिंग रोड
  • ईस्टर्न कॉरिडोर पर ब्रेक, डिजाइन बदलेगा तो मंजूरी मिलने में होगी देरी

भोपाल/बिच्छू डॉट कॉम। राजधानी भोपाल को पूरी रिंग रोड मिलने का सपना अभी और लंबा खिंच सकता है। सरकार ने शहर के बहुप्रतीक्षित वेस्टर्न बाईपास को मंजूरी देकर आगे बढ़ा दिया है, लेकिन रिंग रोड के दूसरे महत्वपूर्ण हिस्से ईस्टर्न कॉरिडोर को राज्य स्तरीय साधिकार समिति (एसएलईसी) ने फिलहाल मंजूरी नहीं दी है। समिति ने प्रोजेक्ट के रूट और डिजाइन पर दोबारा काम करने के निर्देश दिए हैं। इस फैसले के बाद साफ हो गया है कि भोपाल की पूर्ण रिंग रोड परियोजना फिलहाल अधूरी ही रहेगी और ईस्टर्न कॉरिडोर को मंजूरी मिलने में अभी कई महीने लग सकते हैं।
मुख्य सचिव अनुराग जैन की अध्यक्षता में हुई बैठक में अधिकारियों ने पाया कि प्रस्तावित ईस्टर्न कॉरिडोर के आसपास शिक्षा और प्रशिक्षण क्षेत्र से जुड़े कई बड़े प्रोजेक्ट विकसित हो रहे हैं। ऐसे में मौजूदा रूट भविष्य की जरूरतों के अनुरूप नहीं माना गया। समिति ने लोक निर्माण विभाग और नगरीय विकास विभाग को निर्देश दिए हैं कि वे आने वाले वर्षों की यातायात जरूरतों, नए संस्थानों और शहरी विस्तार को ध्यान में रखते हुए नया डिजाइन तैयार करें।
रिंग रोड का आधा सपना पूरा, आधा अधूरा
भोपाल में वर्षों से रिंग रोड की मांग इसलिए उठती रही है क्योंकि शहर के भीतर से गुजरने वाले बाहरी ट्रैफिक का दबाव लगातार बढ़ रहा है। वेस्टर्न बाईपास और ईस्टर्न कॉरिडोर मिलकर राजधानी के चारों ओर एक पूर्ण रिंग रोड का निर्माण करते। लेकिन अब केवल वेस्टर्न बाईपास आगे बढऩे से यह योजना अधूरी रह जाएगी।
2900 करोड़ का वेस्टर्न बाईपास मंजूर
दूसरी ओर, वेस्टर्न बाईपास परियोजना को एसएलईसी की मंजूरी मिल चुकी है और जल्द ही इसे कैबिनेट के सामने रखा जाएगा। करीब 2900 करोड़ रुपए की लागत से बनने वाला यह मार्ग भोपाल-नर्मदापुरम रोड पर मंडीदीप के पास से शुरू होकर कोलार, रातीबड़ होते हुए इंदौर रोड पर फंदा कला के पास जाकर जुड़ेगा। पहले इसकी लंबाई 41 किलोमीटर प्रस्तावित थी, जिसे संशोधित कर 35.61 किलोमीटर कर दिया गया है। वेस्टर्न बाईपास बनने के बाद जबलपुर और नर्मदापुरम दिशा से आने वाले वाहन शहर में प्रवेश किए बिना सीधे इंदौर रोड की ओर जा सकेंगे। परियोजना के अनुमान के अनुसार करीब 23 किलोमीटर दूरी कम होगी। वाहन चालकों का लगभग एक घंटा समय बचेगा। शहर के भीतर भारी वाहनों का दबाव कम होगा। प्रमुख चौराहों पर ट्रैफिक जाम में राहत मिलेगी।
10 लेन के हिसाब से तैयार होगा ढांचा
भविष्य की जरूरतों को देखते हुए बाईपास का ढांचा 10 लेन क्षमता के अनुरूप तैयार किया जाएगा। परियोजना में  4 लेन मुख्य सडक़, दोनों तरफ 2-2 लेन की सर्विस रोड, 1 रेलवे ओवरब्रिज, 2 फ्लाईओवर,15 अंडरपास और 2 बड़े ट्रैफिक जंक्शन शामिल होंगे। यह परियोजना हाइब्रिड एन्यूटी मॉडल पर विकसित की जाएगी।
बदल रहा है भोपाल का विकास नक्शा
ईस्टर्न कॉरिडोर को लेकर लिया गया फैसला यह संकेत देता है कि सरकार अब केवल सड़क निर्माण नहीं बल्कि भविष्य के शहरी विस्तार को ध्यान में रखकर इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार करना चाहती है। हालांकि इसका दूसरा पहलू यह भी है कि राजधानीवासियों को पूरी रिंग रोड और ट्रैफिक राहत के लिए अब पहले से ज्यादा इंतजार करना पड़ेगा। सरकार का संदेश स्पष्ट है कि भोपाल के लिए जल्दबाजी में नहीं, बल्कि अगले 25-30 वर्षों की जरूरतों को ध्यान में रखकर रिंग रोड तैयार की जाएगी। लेकिन तब तक शहर को ट्रैफिक जाम और अधूरी रिंग रोड की समस्या के साथ इंतजार करना होगा।

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