प्रोबेशन खत्म होते ही 6 महीने में नौकरी पक्की

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  • मप्र में लागू होंगे सिविल सर्विस भर्ती के नए नियम

भोपाल/बिच्छू डॉट कॉम। मध्यप्रदेश की मोहन सरकार शासकीय कर्मचारियों के हित में एक बड़ा और ऐतिहासिक बदलाव करने जा रही है। राज्य सरकार ने मध्यप्रदेश सिविल सेवा नियम संशोधन प्रारूप-2026 तैयार कर लिया है और इसे सामान्य प्रशासन विभाग की वेबसाइट पर सार्वजनिक कर सुझाव एवं आपत्तियां आमंत्रित की हैं। नए नियम लागू होने के बाद कर्मचारियों को प्रोबेशन अवधि पूरी होने के बाद नियमितीकरण के लिए वर्षों तक इंतजार नहीं करना पड़ेगा।
प्रस्तावित नियमों के अनुसार विभाग प्रमुख को प्रोबेशन अवधि समाप्त होने के बाद अधिकतम छह माह के भीतर यह निर्णय लेना होगा कि संबंधित कर्मचारी का कार्य संतोषजनक है या नहीं। यदि कर्मचारी का कार्य संतोषजनक पाया जाता है तो उसे नियमित किया जाएगा। वहीं यदि निर्धारित छह माह की अवधि में विभाग कोई निर्णय नहीं लेता है तो कर्मचारी स्वत: नियमित माना जाएगा। वर्तमान व्यवस्था में अधिकांश विभागों में प्रोबेशन अवधि दो से तीन वर्ष निर्धारित है, लेकिन कई मामलों में कर्मचारियों का नियमितीकरण आठ से दस वर्ष तक लंबित रहता है। इससे कर्मचारियों को वित्तीय और सेवा संबंधी नुकसान उठाना पड़ता है। साथ ही विभागों में रिक्त पदों के कारण नई भर्तियों की प्रक्रिया भी प्रभावित होती है। सरकार का मानना है कि नए प्रावधान से इस समस्या का समाधान होगा और जवाबदेही तय होगी।
गंभीर अपराध पर सीधे बर्खास्तगी
संशोधित प्रारूप में अनुशासन संबंधी नियमों को भी कड़ा किया गया है। अब गंभीर श्रेणी के अपराधों में दोषी पाए जाने वाले शासकीय सेवकों को सीधे सेवा से पृथक करने का प्रावधान किया गया है। अभी तक मुख्य रूप से महिला संबंधी अपराधों में ही सेवा समाप्ति का प्रावधान था, लेकिन नए नियमों में इसका दायरा बढ़ाया गया है। प्रस्तावित नियमों में दो बच्चों की नीति को यथावत रखा गया है। हालांकि विशेष परिस्थितियों में पूर्व में दो से अधिक संतान होने वाले कर्मचारियों को सीमित दायरे में राहत देने का प्रावधान भी शामिल किया गया है। सरकार का कहना है कि ऐसे मामलों में परिस्थितियों के आधार पर निर्णय लिया जाएगा।
वरिष्ठता नियम भी होंगे स्पष्ट
नियम 9 में संशोधन कर कर्मचारियों की वरिष्ठता निर्धारण प्रक्रिया को और स्पष्ट बनाया गया है। पुराने और विवादित प्रावधानों को हटाकर नियमों को अधिक सरल और पारदर्शी बनाने का प्रयास किया गया है। सरकार ने इस संशोधित प्रारूप पर शासकीय सेवकों, कर्मचारी संगठनों, संस्थाओं और आम नागरिकों से सुझाव एवं आपत्तियां आमंत्रित की हैं। सुझाव देने की अंतिम तिथि 15 जून निर्धारित की गई है। इसके बाद प्राप्त होने वाले सुझावों पर विचार नहीं किया जाएगा। प्राप्त सुझावों की समीक्षा के बाद सरकार अंतिम नियम अधिसूचित करेगी।

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