मध्य प्रदेश से आंध्र प्रदेश और झारखंड को बाघ देने का फैसला टला

बाघ
  • कान्हा में सीडीवी वायरस से 7 बाघों की मौत के बाद अलर्ट

भोपाल/बिच्छू डॉट कॉम। कान्हा टाइगर रिजर्व में कैनाइन डिस्टेंपर वायरस (सीडीवी) से सात बाघों की मृत्यु होने के बाद आंध्र प्रदेश सहित अन्य राज्यों को बाघ देने का मामला टाला जा सकता है। आंध्र प्रदेश के उप मुख्यमंत्री पवन कल्याण ने मध्य प्रदेश सरकार को पत्र लिखकर आंध्र प्रदेश के पापीकोंडा नेशनल पार्क के लिए बाघ मांगे थे। वन विभाग ने इसके लिए राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (एनटीसीए) से अभिमत भी ले लिया था और आंध्र प्रदेश को बाघ देने की तैयारी की जा रही थी लेकिन कान्हा सहित प्रदेशभर में सीवीडी के खतरे को देखते हुए फिलहाल आंध्र प्रदेश को बाघ दिए जाने का निर्णय टाला जा सकता है। इसके साथ ही सीडीवी की रोकथाम के लिए एनटीसीए द्वारा जारी एडवायजरी का प्रदेश के सभी टाइगर रिजर्व व अभयारण्यों में पालन कराया जा रहा है।
कई राज्यों में मध्यप्रदेश के बाघों की मांग और नई परिस्थितियां
दरअसल, मध्य प्रदेश के बाघों की मांग देश के कई राज्यों में है। गुजरात, राजस्थान, छत्तीसगढ़, ओडिशा और असम के बाद अब आंध्र प्रदेश सरकार ने मध्य प्रदेश से बाघ मांगे हैं। गुजरात और राजस्थान को बाघ दिए भी जा चुके हैं। आंध्र प्रदेश के अलावा तेलंगाना और झारखंड को भी बाघ देने की तैयारी की जा रही है। झारखंड ने तीन बाघ (दो मादा और एक नर) के साथ-साथ 50 बायसन, 50 सांभर और हिरण मांगे हैं, जिन्हें पलामू टाइगर रिजर्व में बसाया जाना प्रस्तावित है। नई परिस्थितियों में फिलहाल इन राज्यों को बाघ नहीं भेजने का निर्णय किया गया है। बाघ गणना 2022 के अनुसार मध्य प्रदेश में 785 बाघ हैं और इनकी संख्या लगातार बढ़ी है।
अगली सुनवाई 22 जून को
मध्य प्रदेश हाई कोर्ट में एक याचिका के जरिये कान्हा नेशनल पार्क में बाघों की मृत्यु का मामला उठाया गया है। न्यायमूर्ति विवेक जैन व न्यायमूर्ति एके निरंकारी की युगलपीठ ने वन विभाग व पार्क प्रबंधन को नोटिस जारी करते हुए बाघों की मृत्यु के मामले में उठाए गए निवारक और उपचारात्मक उपायों के संबंध में अपना पक्ष प्रस्तुत करने के निर्देश जारी किए हैं। अगली सुनवाई 22 जून को निर्धारित की गई है। याचिकाकर्ता महाराष्ट्र के अधिवक्ता सुब्रत चक्रवर्ती की ओर से अधिवक्ता अंशुमान सिंह व प्रतीक रूसिया ने कोर्ट में अपना पक्ष भी रखा।

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