
- पीएचई की समीक्षा बैठक में मंत्रियों और अफसरों को सीएम ने कहा…
भोपाल/बिच्छू डॉट कॉम। मध्यप्रदेश सरकार राजधानी भोपाल और इंदौर के लिए अलग और दीर्घकालिक जल नीति तैयार करने जा रही है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी (पीएचई) विभाग की समीक्षा बैठक में अधिकारियों को निर्देश दिए कि दोनों महानगरों की आगामी 40 वर्षों की अनुमानित जनसंख्या और पेयजल आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए विशेष जल आपूर्ति नीति तैयार की जाए।
मुख्यमंत्री ने स्पष्ट कहा कि तेजी से बढ़ते शहरीकरण के बीच जल प्रबंधन को केवल वर्तमान जरूरतों तक सीमित नहीं रखा जा सकता। भविष्य की मांग, जल स्रोतों की उपलब्धता और वितरण व्यवस्था को ध्यान में रखकर दीर्घकालिक योजना बनाई जानी चाहिए। बैठक में मुख्यमंत्री ने इंदौर के चर्चित भागीरथपुरा प्रकरण का उल्लेख करते हुए अधिकारियों को सतर्क किया। उन्होंने कहा कि नई पेयजल परियोजनाओं और जल संरचनाओं के निर्माण में सुरक्षा मानकों और तकनीकी गुणवत्ता का विशेष ध्यान रखा जाए ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो। सरकार का मानना है कि जल आपूर्ति से जुड़ी परियोजनाओं में केवल विस्तार ही नहीं, बल्कि संरचनात्मक सुरक्षा और गुणवत्ता नियंत्रण भी उतना ही महत्वपूर्ण है। मुख्यमंत्री ने कहा कि तालाबों, नदियों और अन्य सतही जल स्रोतों का उपयोग भविष्य की पेयजल, सिंचाई और औद्योगिक जरूरतों को ध्यान में रखकर किया जाए। इसके लिए तालाबों की मरम्मत और संरक्षण को प्राथमिकता दी जाएगी।
जल जीवन मिशन को मिलेगी नई गति
मुख्यमंत्री ने बैठक में जानकारी दी कि केंद्र सरकार जल जीवन मिशन के लिए मध्यप्रदेश को लगभग 5 हजार करोड़ रुपये उपलब्ध कराने पर सहमत हो गई है। उन्होंने अधिकारियों को केंद्रीय जलशक्ति मंत्रालय के साथ लगातार समन्वय बनाए रखने और लंबित प्रक्रियाओं को तेजी से पूरा करने के निर्देश दिए। साथ ही उन्होंने कहा कि योजनाओं के क्रियान्वयन में गुणवत्ता से कोई समझौता नहीं होना चाहिए, क्योंकि गुणवत्ता संबंधी आपत्तियों के कारण पहले भी राज्य को केंद्रीय सहायता प्राप्त करने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ा है। वहीं मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्तमान सीवरेज योजनाओं में कई कमियां हैं। भविष्य में शहरी क्षेत्रों में दूषित पानी और सीवेज प्रबंधन सबसे बड़ी चुनौती बनने वाला है। इसी कारण पीएचई विभाग के कार्यक्षेत्र में बदलाव कर उसका मुख्य फोकस सीवेज प्रबंधन पर किया जाएगा। ग्रामीण क्षेत्रों में भी सीवेज मैनेजमेंट को प्राथमिकता देने के निर्देश दिए गए हैं।
मार्च 2028 तक मिशन पूरा करने का दावा
पीएचई मंत्री संपतिया उईके ने मुख्यमंत्री को बताया कि जल जीवन मिशन के तहत प्रदेश में लगभग 80 प्रतिशत कार्य पूर्ण हो चुका है और शेष कार्य मार्च 2028 तक पूरा कर लिया जाएगा। उन्होंने बताया कि 11 जिलों में मिशन के लक्ष्य शत-प्रतिशत हासिल किए जा चुके हैं। हालांकि मुख्यमंत्री ने अधूरे कार्यों को तय समय-सीमा में पूरा करने और परियोजनाओं की सतत निगरानी के निर्देश दिए।
1.11 करोड़ परिवारों तक पहुंचा नल से जल
बैठक में पीएचई विभाग के प्रमुख सचिव ने मिशन की प्रगति का ब्यौरा प्रस्तुत किया। विभाग के अनुसार दिसंबर 2023 के बाद 16.50 लाख से अधिक नए घरेलू नल कनेक्शन दिए गए। 15,238 नए नलकूप और हैंडपंप स्थापित किए गए। 14,200 गांवों को हर घर जल श्रेणी में शामिल किया जा चुका है। प्रदेश के 1.11 करोड़ से अधिक परिवारों को नल के माध्यम से पेयजल उपलब्ध कराया जा रहा है। बैठक में मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि शहरों में पेयजल आपूर्ति किसी भी स्थिति में बाधित न हो। सूख चुके और कमजोर पड़ रहे जल स्रोतों का सर्वे कर वैकल्पिक व्यवस्था बनाई जाए। नल-जल योजनाओं के संचालन में आने वाली तकनीकी और प्रशासनिक बाधाओं को तत्काल दूर किया जाए। जल स्रोतों के लिए केवल ट्यूबवेल आधारित व्यवस्था पर निर्भरता कम कर सतही जल स्रोतों और दीर्घकालिक विकल्पों को बढ़ावा दिया जाए। सरकार की नई रणनीति संकेत देती है कि आने वाले वर्षों में भोपाल और इंदौर के लिए जल प्रबंधन को अलग श्रेणी में रखकर दीर्घकालिक शहरी जल सुरक्षा मॉडल विकसित किया जाएगा, ताकि बढ़ती आबादी के बावजूद पेयजल संकट की स्थिति उत्पन्न न हो।
