जिलों में पेयजल समस्या का समाधान करेंगे प्रभारी मंत्री

पेयजल
  • प्रभारी मंत्री जिलों में दो दिन रुककर करेंगे निगरानी

भोपाल/बिच्छू डॉट कॉम
गर्मी जैसे-जैसे तेज हो रही है, मप्र में वैसे-वैसे पेयजल संकट भी बढ़ता जा रहा है। ऐसे में सरकार ने पेयजल संकट को दूर करने के लिए मोर्चा संभाल लिया है। इसी कड़ी में पेयजल संकट को लेकर राज्य सरकार ने अब प्रभारी मंत्रियों की जवाबदेही तय करने का फैसला किया है। सरकार ने स्पष्ट संकेत दिए हैं कि यदि किसी जिले में पेयजल संकट की गंभीर स्थिति बनती है, तो वहां के कलेक्टर से पहले संबंधित प्रभारी मंत्री से जवाब मांगा जाएगा। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के निर्देश के बाद सभी मंत्रियों को अपने प्रभार वाले जिलों में सक्रिय निगरानी करने के लिए कहा गया है।
सूत्रों के अनुसार मुख्यमंत्री सचिवालय ने सभी मंत्रियों से आग्रह किया है कि वे अगले सप्ताह से अपने-अपने जिलों का दौरा करें और वहां कम से कम दो दिन बिताएं। इस दौरान उन्हें जिले के अंतिम छोर तक पेयजल व्यवस्था की समीक्षा करने, शिकायतों की जानकारी लेने और मौके पर समाधान सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं।
कंट्रोल रूम से होगी रोजाना मॉनिटरिंग
प्रदेश सरकार ने सभी जिलों में पेयजल संकट की निगरानी के लिए कंट्रोल रूम स्थापित किए हैं। प्रभारी मंत्रियों से कहा गया है कि वे प्रतिदिन इन कंट्रोल रूम से प्राप्त शिकायतों की समीक्षा करें और अधिकारियों के माध्यम से उनका तत्काल निराकरण कराएं। सभी कलेक्टरों को भी निर्देश दिए गए हैं कि वे व्यक्तिगत रूप से जलापूर्ति की स्थिति की जानकारी लें और रोजाना समीक्षा बैठक करें। मुख्य सचिव अनुराग जैन ने इस सप्ताह पेयजल व्यवस्था को लेकर दो बार वरिष्ठ और मैदानी अधिकारियों की बैठक ली है। इसके साथ ही पीएचई विभाग और नगरीय निकायों के जलकार्य से जुड़े कर्मचारियों की छुट्टियां भी निरस्त कर दी गई हैं।
गांवों में रात्रि विश्राम और चौपाल की तैयारी
प्रभारी मंत्रियों को निर्देश दिए गए हैं कि वे अपने दौरे के दौरान गांवों और कस्बों में रात्रि विश्राम भी करें। उनसे अपेक्षा की गई है कि वे ग्रामीण क्षेत्रों में चौपाल लगाकर सीधे लोगों से संवाद करें और पानी की समस्याओं का मौके पर समाधान कराएं। अधिकारियों को तत्काल बुलाकर समस्याओं के निराकरण की व्यवस्था करने पर विशेष जोर दिया गया है।
पेयजल व्यवस्था के लिए 1,500 करोड़ जारी
ग्रामीण क्षेत्रों में पेयजल आपूर्ति मजबूत करने के लिए राज्य सरकार ने 1,500 करोड़ रुपए जारी किए हैं। पंचायतों को पेयजल संबंधी मेंटेनेंस कार्यों के लिए 10 हजार रुपए तक खर्च करने के अधिकार भी दिए गए हैं। इसके अलावा ग्रामीण यांत्रिकी सेवा के एसओआर में पेयजल संबंधी गतिविधियों को शामिल किया गया है, ताकि स्थानीय स्तर पर त्वरित कार्य हो सके।
अगले सप्ताह सीएम करेंगे समीक्षा
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव अगले सप्ताह प्रदेश की पेयजल व्यवस्था को लेकर उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक कर सकते हैं। बताया जा रहा है कि वे प्रभारी मंत्रियों से वर्चुअल संवाद कर जिलों की स्थिति का फीडबैक भी लेंगे। आगामी कैबिनेट बैठक में भी पेयजल संकट और उसके समाधान को लेकर मंत्रिपरिषद में अनौपचारिक चर्चा होने की संभावना है। सरकार इस दौरान दीर्घकालिक रोडमैप पर भी विचार कर सकती है।
इंदौर-उज्जैन समेत कई जिलों में संकट
सरकार को मिल रहे फीडबैक के अनुसार इंदौर, उज्जैन सहित कई जिलों में लोगों को पेयजल के लिए भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। कई क्षेत्रों में जलस्तर गिरने और जलापूर्ति प्रभावित होने से संकट गहरा गया है। मुख्य सचिव अनुराग जैन ने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि समस्याग्रस्त क्षेत्रों में वैकल्पिक व्यवस्था के रूप में टैंकरों से पानी की आपूर्ति सुनिश्चित की जाए। साथ ही पानी वितरण में पारदर्शिता और जरूरतमंद क्षेत्रों को प्राथमिकता देने के निर्देश भी दिए गए हैं।

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