- मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव करेंगे विभागीय समीक्षा

भोपाल/बिच्छू डॉट कॉम
मध्यप्रदेश में पिछले साल शून्य आधारित बजट तैयार किया गया था। एक-एक योजना का आकलन करवाकर विभागों को मांग के अनुरूप बजट भी दिया गया। इसके बाद भी लगभग 30 प्रतिशत राशि खर्च नहीं हो सकी। प्रयोग की श्रृंखला को आगे बढ़ाते हुए इस बार तीन वर्ष की आवश्यकताओं के हिसाब से बजट बनाया गया। जो लक्ष्य निर्धारित किए गए हैं वे प्राप्त हों, इसके लिए जोर वित्तीय प्रबंधन पर है। इसके लिए तय किया गया कि तीन स्तर से इस पर नजर रखी जाएगी। वित्त विभाग तो इसे देखेगा ही, मुख्य सचिव और मुख्यमंत्री कार्यालय द्वारा भी प्रतिमाह समीक्षा की जाएगी। मुख्यमंत्री डा. मोहन यादव भी विभागीय समीक्षाओं में वित्तीय प्रबंधन पर बात करेंगे। वित्त विभाग के अधिकारियों का कहना है कि वर्ष 2026-27 के लिए जो लक्ष्य निर्धारित किए गए हैं, उसकी प्राप्ति के लिए सबसे आवश्यक वित्तीय प्रबंधन है। सर्वाधिक दारोमदार राजस्व अर्जित करने वाले विभागों पर है। मुख्य सचिव अनुराग जैन इन सभी विभागों के अधिकारियों के साथ बैठक कर चुके हैं। मुख्यमंत्री भी प्रतिमाह बैठक करते हैं। दरअसल, 16वें वित्त आयोग की अवधि में प्रतिवर्ष प्रदेश को लगभग पौने आठ हजार करोड़ रुपये कम मिलेंगे। इसकी प्रतिपूर्ति के लिए राज्य को जहां आय बढ़ाने की दिशा में काम करना होगा, वहीं टैक्स चोरी रोकने के साथ वसूली पर जोर देना होगा। इसके लिए वित्त विभाग ने सभी विभागों से वित्तीय वर्ष 2025-26 का पूरा लेखा-जोखा मांगा है। अगले माह प्रस्तावित मुख्यमंत्री की विभागीय समीक्षा बैठकों में भी वित्तीय प्रबंधन पर बात होगी। इसे देखते हुए सभी विभागों को वित्तीय और भौतिक उपलब्धियों का विवरण तैयार करने के लिए कहा गया है।
जुलाई-अगस्त में साफ होगी तस्वीर
वित्तीय वर्ष 2025-26 में विभागों द्वारा आवंटित बजट में से कितनी राशि का उपयोग किया, कितनी समर्पित की और कितनी राशि अप्राप्त रही, इसकी तस्वीर जुलाई-अगस्त तक साफ होगा। वित्त विभाग ने सभी विभागों को निर्देश दिए हैं कि लेखा प्रतिवेदन तैयार करने के लिए महालेखाकार कार्यालय ग्वालियर को सभी आंकड़े उपलब्ध कराए जाएं। साथ ही यह भी बताया जाए कि केंद्र प्रवर्तित योजनाओं में कितनी राशि अप्राप्त रही या फिर वित्तीय वर्ष की समाप्ति से कुछ समय पहले ही मिली, जिसके कारण राशि का उपयोग नहीं हो सका। वहीं, लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी जैसे कुछ विभाग हैं, जिन्हें मूल बजट से अतिरिक्त राशि दी गई। दरअसल, जल जीवन मिशन की लगभग आठ हजार योजनाओं को पुनरीक्षित करने से लागत बढ़ गई। केंद्र सरकार ने इस राशि को देने से मना कर दिया। चूंकि, परियोजनाओं पर काम प्रारंभ हो गया था इसलिए राज्य सरकार ने अपने बजट से लगभग 7700 करोड़ रुपये दिए गए।
