
वॉशिंगटन। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि वह इस बात से सहज नहीं हैं कि ईरान के उच्च स्तर पर समृद्ध यूरेनियम भंडार को रूस या चीन अपने कब्जे में लें। ट्रंप का यह बयान ऐसे समय आया है जब ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चा तेज है। रूस और चीन को ईरान का करीबी सहयोगी माना जाता है। परमाणु मामलों के विशेषज्ञों का मानना था कि किसी संभावित समझौते के तहत ईरान अपने संवर्धित यूरेनियम को किसी तीसरे देश को सौंप सकता है और इस भूमिका के लिए रूस या चीन विकल्प हो सकते हैं।
हालांकि ट्रंप ने साफ कर दिया कि वह इस व्यवस्था को लेकर सहज महसूस नहीं करते। अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने सोमवार को अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर कहा था कि ईरान का यूरेनियम या तो अमेरिका को सौंपा जाएगा या फिर उसे वहीं नष्ट किया जाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि यह प्रक्रिया अंतरराष्ट्रीय परमाणु एजेंसियों की निगरानी में हो सकती है। बताया जा रहा है कि ईरान का यह यूरेनियम उन परमाणु स्थलों के नीचे दबा हो सकता है, जिन्हें पिछले साल अमेरिकी हवाई हमलों में निशाना बनाया गया था।
हालांकि ट्रंप के ताजा बयान को उनके रुख में कुछ नरमी के तौर पर देखा जा रहा है। पहले वह लगातार इस बात पर जोर दे रहे थे कि ईरान के यूरेनियम भंडार पर अमेरिका का सीधा नियंत्रण होना चाहिए। अब उन्होंने यह संकेत दिया है कि यूरेनियम को किसी अन्य स्वीकार्य स्थान पर भी नष्ट किया जा सकता है। ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर अमेरिका और पश्चिमी देशों की चिंता लंबे समय से बनी हुई है। अमेरिका का आरोप है कि ईरान परमाणु हथियार बनाने की दिशा में आगे बढ़ सकता है, जबकि ईरान लगातार कहता रहा है कि उसका परमाणु कार्यक्रम केवल शांतिपूर्ण उद्देश्यों के लिए है।
