आर्थिक विकास का माध्यम बनी एमएसएमई इकाइयां

एमएसएमई
  • छोटे उद्योगों को रफ्तार देने पांच साल में सरकार ने दी 20 गुना वित्तीय मदद

भोपाल/बिच्छू डॉट कॉम। मप्र में सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम (एमएसएमई) क्षेत्र को बढ़ावा देने के लिए राज्य सरकार द्वारा दी जा रही वित्तीय सहायता छोटे उद्योगों के लिए ऑक्सीजन साबित हो रही है।
पिछले पांच वर्षों में सरकार की ओर से दी गई वित्तीय मदद में करीब 20 गुना वृद्धि दर्ज की गई है। इसका सीधा असर प्रदेश में छोटे उद्योगों की संख्या और रोजगार के अवसरों पर दिखाई दे रहा है। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2020-21 में एमएसएमई इकाइयों को केवल 107.74 करोड़ रुपए की वित्तीय सहायता दी गई थी। इसके बाद यह सहायता लगातार बढ़ती गई। वर्ष 2021-22 में यह राशि बढकऱ 392.45 करोड़ रुपए पहुंची, जबकि 2022-23 में 697.43 करोड़ रुपए की मदद दी गई। वर्ष 2023-24 में अनुदान कुछ घटकर 444.08 करोड़ रुपए रहा, लेकिन इसके बाद सरकार ने रिकॉर्ड स्तर पर सहायता बढ़ाते हुए वर्ष 2024-25 में 2162 करोड़ रुपए का वित्तीय समर्थन प्रदान किया। विभागीय सूत्रों के अनुसार चालू वित्तीय वर्ष 2025-26 में भी अनुदान राशि में और वृद्धि की गई है, हालांकि अंतिम आंकड़े अभी जारी होना बाकी हैं।
तीन गुना से ज्यादा बढ़ी एमएसएमई इकाइयां
सरकार की यह सहायता विभिन्न औद्योगिक और स्वरोजगार योजनाओं के तहत दी जा रही है। इसमें नए उद्योग स्थापित करने के लिए अनुदान, बिना संपत्ति गिरवी रखे ऋण, मुद्रा लोन, कार्यशील पूंजी सहायता, बीज पूंजी, वेंचर कैपिटल और इक्विटी क्राउड फंडिंग जैसी व्यवस्थाएं शामिल हैं। इन योजनाओं का उद्देश्य युवाओं, महिलाओं और छोटे उद्यमियों को स्वरोजगार के लिए प्रोत्साहित करना है। वित्तीय सहायता बढऩे का असर प्रदेश में एमएसएमई इकाइयों की संख्या पर भी साफ दिखाई दे रहा है। वर्ष 2020-21 में मध्यप्रदेश में केवल 1.87 लाख एमएसएमई इकाइयां पंजीकृत थीं। मार्च 2025 तक यह संख्या बढकऱ 5.79 लाख से अधिक हो चुकी है। यानी पांच वर्षों में पंजीबद्ध इकाइयों की संख्या तीन गुना से ज्यादा बढ़ गई है।
पांच साल में रोजगार के अवसर दोगुने हुए
रोजगार के क्षेत्र में भी एमएसएमई सेक्टर ने बड़ी उपलब्धि हासिल की है। वर्ष 2020-21 में इन इकाइयों के माध्यम से प्रदेश में करीब 14.99 लाख लोगों को रोजगार मिला था। वहीं पिछले वित्तीय वर्ष तक यह संख्या बढकऱ 30 लाख से अधिक हो चुकी है। यानी पांच साल में रोजगार के अवसर लगभग दोगुने हो गए हैं। उद्योग विभाग के अधिकारियों का कहना है कि राज्य सरकार का फोकस अब बड़े उद्योगों के साथ-साथ छोटे और ग्रामीण उद्योगों को मजबूत करने पर है। इससे न केवल स्थानीय स्तर पर रोजगार बढ़ रहा है, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिल रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इसी तरह वित्तीय सहयोग और बाजार उपलब्धता बढ़ती रही तो आने वाले वर्षों में मध्यप्रदेश एमएसएमई क्षेत्र में देश के अग्रणी राज्यों में शामिल हो सकता है।

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