उदयनिधि बोले- सनातन खत्म का मतलब, भेदभाव वाली सोच का अंत

  • हम भगवान में आस्था के खिलाफ नहीं…लोग मंदिरों में जाएं

चेन्नई/एजेंसी
तमिलनाडु के पूर्व डिप्टी सीएम उदयनिधि स्टालिन ने सनातन खत्म वाले अपने बयान पर 2 दिन बाद सफाई दी। उदयनिधि ने कहा- मेरे बयान को गलत समझा जा रहा है। मैं लोगों के मंदिर जाने के खिलाफ नहीं बस वहां जाति के आधार पर जो भेदभाव होता है, उस सोच को खत्म करना होगा। उदयनिधि स्टालिन ने 12 मई को विधानसभा में कहा कि सनातन धर्म को खत्म किया जाना चाहिए। यह लोगों को बांटता है। उन्होंने पहले 2023 में भी सनातन को डेंगू, मलेरिया बताया था। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने मार्च 2025 में सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें फटकार लगाई थी। उदयनिधि ने सोशल मीडिया पर लिखा- तमिलनाडु विधानसभा में जब मैंने कहा था कि लोगों को बांटने वाले सनातन को खत्म होना चाहिए तो कुछ लोग मेरी आलोचना कर रहे हैं। लेकिन मैं ऐसी आलोचनाओं से डरने वाला नहीं हूं। द्रविड़ आंदोलन हमेशा विरोध के बीच ही आगे बढ़ा है। इसलिए मैं सिर्फ एक छोटी-सी बात साफ करना चाहता हूं। जब मैं कहता हूं कि सनातन खत्म होना चाहिए, तो इसका मतलब यह नहीं है कि कोई मंदिर न जाए। इसका मतलब यह है कि मंदिरों में ही नहीं, बल्कि समाज में भी सभी लोगों को बराबरी का अधिकार मिलना चाहिए। मैं उस सोच को खत्म करने की बात कर रहा हूं, जो लोगों को ऊंची और नीची जाति में बांटती है। मैं वही विचार रख रहा हूं, जिनकी बात पेरियार, अंबेडकर, अन्ना और करुणानिधि ने की थी। हम किसी की भगवान में आस्था के खिलाफ नहीं हैं। लेकिन असमानता और उत्पीड़न का हम कड़ा विरोध करेंगे।
2 सितंबर 2023: उदयनिधि ने सनातन धर्म को डेंगू, मलेरिया बताया था
उदयनिधि स्टालिन ने 2 सितंबर 2023 को एक कार्यक्रम में सनातन धर्म के खिलाफ बयान दिया था। उदयनिधि ने कहा- सनातन धर्म मच्छर, डेंगू, फीवर, मलेरिया और कोरोना जैसा है, जिनका केवल विरोध नहीं किया जा सकता, बल्कि उन्हें खत्म करना जरूरी होता है। विवाद बढ़ने पर उदयनिधि ने कहा कि मैं हिंदू धर्म नहीं सनातन प्रथा के खिलाफ हूं।

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