
एजेंसी/नई दिल्ली। कृत्रिम बुद्धिमत्ता को संचालित करने वाले विशाल डाटा सेंटर केवल भारी मात्रा में बिजली ही नहीं खपा रहे हैं, बल्कि वे अपने आसपास के इलाकों को भी तेजी से गर्म कर रहे हैं। एक नए अध्ययन में दावा किया गया है कि एआई डाटा सेंटर हीट आइलैंड प्रभाव पैदा कर रहे हैं, जिसके कारण आसपास के क्षेत्रों का तापमान औसतन 3.6 डिग्री फारेनहाइट और कुछ मामलों में 16.4 डिग्री फारेनहाइट तक बढ़ रहा है। शोधकर्ताओं ने दावा किया है कि इस प्रभाव की चपेट में दुनिया भर में 34 करोड़ से अधिक लोग आ सकते हैं। कैम्ब्रिज विवि के अर्थ ऑब्जर्वेशन समूह के एसोसिएट प्रोफेसर एंड्रिया मारिनोनी और उनकी टीम ने डाटा सेंटरों से निकलने वाली गर्मी के प्रभावों का विश्लेषण किया गया है। इसके निष्कर्ष गंभीर पर्यावरणीय चिंताओं की ओर संकेत करते हैं। शोधकर्ताओं ने पिछले 20 वर्षों के तापमान आंकड़ों का अध्ययन किया, जिन्हें रिमोट सेंसरों के जरिए एकत्र किया गया था। इन आंकड़ों की तुलना एआई हाइपरस्केलर डाटा सेंटरों के स्थानों से की गई। हाइपरस्केलर ऐसे विशाल डाटा सेंटर होते हैं जिनमें हजारों सर्वर लगे होते हैं और जिनका आकार 10 लाख वर्ग फुट तक हो सकता है। अध्ययन में 6,000 से अधिक ऐसे डाटा सेंटर शामिल किए गए जो अत्यधिक घनी आबादी वाले शहरी क्षेत्रों से दूर स्थित हैं।
10 किलोमीटर तक का क्षेत्र प्रभावित
अध्ययन के अनुसार किसी डाटा सेंटर के संचालन शुरू होने के बाद आसपास के क्षेत्रों का सतही तापमान औसतन 3.6 डिग्री फारेनहाइट बढ़ गया। कुछ स्थानों पर यह वृद्धि 16.4 डिग्री फारेनहाइट तक दर्ज की गई। शोधकर्ताओं ने कहा कि यह पैटर्न दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में समान रूप से दिखाई दिया। उदाहरण के तौर पर मैक्सिको के बाजियो क्षेत्र में दो दशकों में तापमान में लगभग 3.6 डिग्री फारेनहाइट की ऐसी वृद्धि दर्ज की गई जिसे अन्य कारणों से नहीं समझाया जा सका।
