आयुष्मान योजना में अब दिल और फेफड़े का होगा प्रत्यारोपण

  • कैबिनेट से मिलेगी हरी झंडी

भोपाल/बिच्छू डॉट कॉम। मध्य प्रदेश सरकार अब दिल और फेफड़े के ट्रांसप्लांट का नि:शुल्क इलाज आयुष्मान योजना से करने जा रही है। सरकार जल्द ही कैबिनेट में इस आशय के प्रस्ताव को मंजूरी देगी। कैबिनेट से हरी झंडी मिलते ही ये दोनों बीमारियों को आयुष्मान में शामिल कर ली जायेंगी।
राजधानी समेत मध्यप्रदेश में हृदय और फेफड़े की बीमारियों के मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है। अप्रैल में जारी आंकड़ों के अनुसार अकेले एम्स में लगभग 20 हजार और निजी अस्पतालों में 5 से 7 हजार से अधिक मरीज इन दोनों बीमारियों के इलाज के लिए आते हैं। वर्ष 2025-26 में भोपाल में अकेले एम्स में लगभग 20,000 से अधिक मरीजों को फेफड़े में दर्द और हार्ट अटैक और अन्य हृदय संबंधी समस्याओं के लिए शहर के अस्पतालों में भर्ती कराया गया।
उपमुख्यमंत्री ने दिए स्वास्थ्य विभाग को निर्देश
भोपाल समेत मध्यप्रदेश में हाल ही में मध्यप्रदेश सरकार आयुष्मान योजना में हृदय और फेफड़े के मरीजों की बढ़ती संख्या को देखते हुए आम नागरिकों को आयुष्मान योजना से उक्त दोनों बीमारियों के मरीजों को निशुल्क इलाज देने की तैयारी कर रही है। बता दें कि उक्त दोनों बीमारियों के मरीजों को अभी लाखों रुपए खर्च करने पड़ते थे. से मुक्ति मिलेगी। हाल ही में उपमुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ल ने एम्स भोपाल की टीम के साथ बैठक में आयुष्मान भारत योजना के तहत हार्ट और लंग ट्रांसप्लांट शामिल करने की सुविधा देने पर चर्चा की। उन्होंने कैबिनेट में रखने के लिए जल्द प्रस्ताव बनाकर भेजने को कहा है।
2017-2018 की तुलना में तीन गुना तक बढ़े मरीज
एम्स के चिकित्सकों ने जारी शोध में बताया कि भोपाल में 1984 में गैस त्रासदी के बाद फेफड़ों के मरीजों की संख्या में 30 से 35 फीसदी वृद्धि हुई है। भोपाल की हवा में धूल के कण 5 से 10 माइको मीटर के होते हैं। ये फेफड़े और दिल तक पहुंच जाते हैं। इस वजह से फेफड़ों के मरीज बढ़ रहे हैं। वर्ष 2017-18 की तुलना में 2025 तक हृदय की बीमारियों के मामले लगभग तीन गुना बढ़ गए हैं। ग्रामीण क्षेत्रों की तुलना में शहरी क्षेत्रों में हृदय रोगियों की संख्या अधिक है। उम्र को देखे, तो 40 वर्ष से कम उम्र के युवा उक्त दोनों रोगों से सर्वाधिक पीडि़त है। गर्मियों में भी हार्ट और फेफड़े के मामले अधिक आ रहे हैं। लाखों खर्च होने के कारण मध्यमवर्गीय और गरीब परिवार तो फेफड़े के ट्रांसप्लांट की सोच तक नहीं पाते हैं। बता दें कि भोपाल में हृदय और फेफड़े का इलाज सिर्फ एम्स भोपाल, हमीदिया अस्पताल, बंसल अस्पताल, अपोलो सेज अस्पताल और बीएमएचआरसी में होता है।

बीमारियों को आयुष्मान में करेंगे शामिल
हृदय और फेफड़े ट्रांसप्लांट  बीमारी पर लाखों खर्च होते हैं। इस वजह से गरीब और मध्यमवर्ग के लोग इसका इलाज नहीं करा पाते हैं। राजधानी समेत प्रदेश में इनके मरीजों की बढ़ती संख्या को देखते हुए हमने इन दोनों रोगों का इलाज आयुष्मान योजना से शामिल कर नि:शुल्क कराने का योजना है। इस संबंध में हमने स्वास्थय विभाग से प्रस्ताव और कार्ययोजना बनाकर देने को कहा है।
– डॉ राजेंद्र शुक्ल, उपमुख्यमंत्री मप्र शासन।

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