
- एक साल का रोडमैप होगा तैयार, विभागों से 45 बड़े मुद्दों पर कार्ययोजना मांगी
गौरव चौहान/भोपाल/बिच्छू डॉट कॉम। मुख्यमंत्री मोहन यादव जल्द ही प्रदेश के 45 बड़े मुद्दों को लेकर विभागों के साथ समीक्षा बैठक करने जा रहे हैं। इस बैठक में जनता से जुड़े करीब 45 बड़े मुद्दों, नई नीतियों और उनके निर्णयों पर चर्चा होगी। बताया जा रहा है कि 15 मई के बाद होने वाली इस बैठक में मुख्यमंत्री विभागवार कार्ययोजना और काम पूरा करने की समय सीमा तय करेंगे। साथ ही अगले एक साल के लिए विभागों को लक्ष्य भी दिए जाएंगे। मुख्यमंत्री सचिवालय की ओर से जारी निर्देशों के अनुसार विभागों को इन विषयों पर वर्तमान प्रगति रिपोर्ट और आगामी कार्रवाई का रोडमैप तैयार करने को कहा है। खास बात यह है कि बैठक में केवल चिन्हित विषयों पर ही विभागीय सचिवों द्वारा प्रस्तुतीकरण दिया जाएगा और मुख्यमंत्री स्वयं समयसीमा के साथ क्रियान्वयन की समीक्षा करेंगे। मुख्यमंत्री सचिवालय के निर्देशों के अनुसार यह केवल सामान्य समीक्षा बैठक नहीं होगी, बल्कि चिन्हित विषयों पर स्पष्ट कार्ययोजना, विभागीय जिम्मेदारी और समय सीमा तय की जाएगी।
माना जा रहा है कि सरकार इन फैसलों के जरिए अगले एक वर्ष के लिए प्रशासनिक और विकासात्मक एजेंडा तय करने की तैयारी में है। बैठक में उज्जैन में नए एयरपोर्ट निर्माण, भेल भोपाल की जमीन के उपयोग, शहरों में अग्निशमन व्यवस्था सुधार, सार्वजनिक पार्कों में नई गतिविधियों की अनुमति और हाउसिंग बोर्ड की रीडेंसिफिकेशन योजना को गति देने जैसे विषयों पर भी निर्णय लिए जा सकते हैं।
आरजीपी और मेडिकल यूनिवर्सिटी की तीन-तीन विंग बनेगी
सरकार कई बड़े संस्थागत बदलावों पर भी विचार कर रही है। इसमें आरजीपीवी और मेडिकल विश्वविद्यालय को तीन-तीन अलग विश्वविद्यालयों में विभाजित करने का प्रस्ताव शामिल है। वहीं प्रदेश में अलग-अलग विभागों द्वारा संचालित स्कूलों को स्कूल शिक्षा विभाग के अधीन लाने और कम छात्र संख्या वाले कॉलेजों की समीक्षा भी की जाएगी। सरकार धार्मिक और सांस्कृतिक क्षेत्रों के विकास को भी प्राथमिकता दे रही है। बैठक में राम वन पथ गमन परियोजना, कृष्ण पाथेय परियोजना, चित्रकूट और ममलेश्वर के विकास के लिए वन भूमि आवंटन तथा अमरकंटक और चित्रकूट विकास प्राधिकरणों की समीक्षा होगी।
समाज के धनी लोग सादगी को अपने व्यवहार में उतारे
शादी-विवाह जन्म-जन्मांतर का पवित्र बंधन है। गृहस्थ जीवन में प्रवेश कर रहे वर-वधुओं के लिए आने वाला समय कई जिम्मेदारियां लेकर आता है। सभी परिवारों के लिए विवाह का आयोजन आनंद और उत्सव का वातावरण निर्मित करता है। सामूहिक विवाह सम्मेलन में एक ही मंडप में समाज के विभिन्न वर्गों के बेटे-बेटी वैवाहिक बंधन में बंधते हैं, सामूहिक चेतना का यह उत्सव फिजूल खर्ची और दिखावे पर रोक का संदेश देता है। यह बात मुख्यमंत्री डॉ. यादव गुरुवार को आष्टा में आयोजित 200 बेटियों के सामूहिक विवाह/निकाह सम्मेलन को मुख्यमंत्री निवास से वर्चुअली संबोधित करते हुए कही।
मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार और समाज ने जब से सामूहिक विवाह का बीड़ा उठाया है तब से गरीब माता-पिता ने चैन की सांस ली है। समाज के समृद्ध लोग सादगी को अपने व्यवहार में उतारे और सामूहिक विवाह सम्मेलनों में विवाह का ट्रेंड सेट करें। इससे समाज का हर वर्ग विवाह के अनावश्यक खर्च से बचेगा और उपलब्ध संसाधनों का परिवार के भविष्य निर्माण में उपयोग किया जा सकेगा। मुख्यमंत्री ने बताया कि उन्होंने स्वयं भी अपने पुत्र का विवाह सामूहिक सम्मेलन में ही किया था। उन्होंने कहा कि बेटियों की शिक्षा की चिंता करना और उसके लिए पर्याप्त प्रबंध करना, हर माता-पिता का दायित्व हैं। मुख्यमंत्री ने वर-वधु को आशीर्वाद प्रदान कर उनके परिजन को शुभकामनाएं दीं। मुख्यमंत्री ने बताया कि दिसंबर 2023 से अप्रैल 2026 तक 1 लाख 70 हजार 187 बेटियों के विवाह मुख्यमंत्री कन्या विवाह/निकाह योजना के तहत कराये गए है। योजना अंतर्गत अब तक लगभग 1000 करोड़ रुपए की सहायता प्रदान की गई। डॉ. यादव ने कहा कि सामूहिक विवाह सम्मेलन से आर्थिक रूप से कमजोर भाई-बहनों की बेटियां भी पूरे सम्मान के साथ विदा होती हैं। समाज का कोई भी वर्ग हो, बच्चों का विवाह हर माता-पिता की सबसे बड़ी जिम्मेदारी होती है। सामूहिक विवाहों के आयोजन से अब विवाह के लिए माता-पिता को कर्ज नहीं लेना पड़ रहा है।
अग्निवीरों को आरक्षण देने की समीक्षा
बैठक में अग्निवीरों को सरकारी नियुक्तियों में आरक्षण देने की प्रक्रिया की समीक्षा होगी। इसके साथ ही मंत्रालय और विंध्याचल-सतपुड़ा भवन में अधिकारियों-कर्मचारियों की बायोमेट्रिक उपस्थिति लागू करने की प्रगति भी देखी जाएगी।
लाडली बहना योजना को रोजगार से जोडऩे की तैयारी
सरकार लाडली बहना योजना को केवल आर्थिक सहायता तक सीमित न रखकर महिलाओं के रोजगार, प्रशिक्षण, हैंडलूम और बैंक लोन से जोडऩे पर काम कर रही है। वित्त विभाग प्रारंभिक प्रस्ताव तैयार कर चुका है और अब इसके क्रियान्वयन मॉडल पर चर्चा होगी।
