
- हाईकोर्ट ने दिया 60 दिन तक टाइम
भोपाल/बिच्छू डॉट कॉम। पहली बार की विधायक और प्रदेश नगरीय विकास राज्यमंत्री प्रतिमा बागरी का जाति प्रमाण पत्र एक बार फिर मुश्किल में आ गया है। हाईकोर्ट ने उनका जाति प्रमाण पत्र सीधे हाईलेवल कास्ट स्क्रूटनी कमेटी के पास भेज दिया है। साथ ही इसकी सघन छानबीन कर 30 जून 2026 तक फैसला लेने के निर्देश दिए हैं। अदालत ने स्पष्ट आदेश दिया है कि हाई लेवल कमेटी यदि 60 दिन में कोई फैसला नहीं लेती है तो पुरानी याचिका दोबारा जीवित की जा सकेगी। सरकारी वकील ने भी अदालत को आश्वस्त किया है कि अब नियमानुसार छानबीन जांचकर फैसला लिया जाएगा। इसकी सूचना याचिकाकर्ता को भी भेजी जाएगी। राज्यमंत्री बागरी के जाति प्रमाण पत्र की वैधता को लेकर प्रदेश कांग्रेस के अनुसूचित जाति विभाग के प्रदेशाध्यक्ष प्रदीप अहिरवार ने याचिका दायर की थी। हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच ने सुनवाई के दौरान गाइड लाइन देते हुए कहाकि याचिकाकर्ता द्वारा 31 मार्च 2025 को दिए गए आवेदन के आधार पर हाईलेवल कास्ट स्क्रूटनी कमेटी सुनवाई करेगी। इसमें प्रतिवादी पक्ष को भी सुनवाई का पूरा अवसर दिया जाएगा। निर्धारित प्रक्रिया के तहत सघन जांच कर कमेटी यह तय करेगी कि राज्यमंत्री बागरी का अनुसूचित जाति प्रमाण पत्र वैध है या नहीं। जांच पूर्ण होने के बाद कमेटी विधिवत आदेश भी जारी करेगी। इस मामले में प्रक्रिया का निर्धारण करते हुए जहां अदालत ने प्रतिवादियों को भी सुनवाई का पूरा मौका देने की बात की। वहीं दोनों पक्षों को निर्देशित किया कि वे 30 जून 2026 तक हाईलेवल कास्ट स्क्रूटनी कमेटी का आदेश स्पीड पोस्ट के माध्यम से भेजें, ताकि समय सीमा में कार्रवाई सुनिश्चित हो सके।
अहिरवार ने दी थी चुनौती
विधानसभा चुनावों के बाद कांग्रेस के नेता प्रदीप अहिरवार ने मंत्री बागरी के जाति प्रमाण पत्र को अवैध बताते हुए अदालत में चुनौती दी थी। अहिरवार का आरोप है कि बागरी ने गलत तरीके से अनुसूचित जाति (एससी) का प्रमाण पत्र बनवाकर आरक्षण का लाभ लिया है। उन्होंने इसी प्रमाण पत्र के आधार पर सतना जिले की रैगांव विधानसभा सीट से चुनाव जीता। जबकि संबंधित क्षेत्र में बागरी जाति अनुसूचित जाति की सूची में शामिल ही नहीं है। मंत्री बागरी वास्तव में राजपूत ठाकुर समुदाय से संबंध रखती हैं। याचिका में 1961 और 1971 की जातिगत जनगणना, 2003 की राज्य स्तरीय जाति छानबीन समिति के फैसले और 2007 के केंद्र सरकार के राजपत्र का हवाला देते हुए कहा गया है कि बागरी को एससी श्रेणी में शामिल नहीं किया गया है।
