
बिच्छू डॉट कॉम। एमपी सरकार ने प्रदेश की शेष बची शराब दुकानों के संचालन के लिए छत्तीसगढ़ आबकारी मॉडल को अपनाने के विचार को पूरी तरह त्याग दिया है। पड़ोसी राज्य में इस मॉडल के कारण पैदा हुई विसंगतियों और वहां के 2 आईएएस अधिकारियों सहित 30 अफसरों के जेल जाने की खबर ने मप्र सरकार को कदम पीछे खींचने पर मजबूर कर दिया है। सरकार अब किसी अन्य राज्य के मॉडल के बजाय अपने ही पुराने मॉडल (नीलामी प्रक्रिया) से शेष 55 दुकानों का निपटारा करेगी। छत्तीसगढ़ में सरकारी नियंत्रण वाले मॉडल में भ्रष्टाचार के बड़े खुलासे हुए हैं। फिलहाल वहां के कई शीर्ष अधिकारी और राजनेता जेल में हैं। मप्र में 98 प्रतिशत दुकानों की नीलामी पहले ही हो चुकी है। यदि शेष 2 प्रतिशत दुकानों पर सरकारी मॉडल लागू होता, तो यह एक हाइब्रिड मॉडल बन जाता। इससे सरकारी दुकानों और निजी ठेकेदारों के बीच व्यावसायिक प्रतिस्पर्धा बढ़ती, जिससे राजस्व का नुकसान होता। जमीन का अधिग्रहण, कर्मचारियों की नियुक्ति और परिवहन अनुबंधों में काफी समय लगता। विशेषज्ञों के अनुसार, इसे धरातल पर लाने में अक्टूबर 2026 तक का समय लग जाता, जो सरकार के लिए आर्थिक घाटे का सौदा होता।
