खतरे में 70 हजार… शिक्षकों की पात्रता

शिक्षकों की पात्रता
  • डीपीआई ने शुरू की तैयारी… मामले में सियासत शुरू

भोपाल/बिच्छू डॉट कॉम। पात्रता परीक्षा में मप्र के सिर्फ 70 हजार शिक्षक बैठेंगे। लोक शिक्षण संचालनालय (डीपीआई) ने इसके लिए कर्मचारी चयन मंडल से तिथि मांगी है। जैसे ही वहां से तारीख आएगी तो डीपीआई परीक्षा की स्थिति को स्पष्ट कर देगा। इस संदर्भमें विभाग ने जहां पूरी तैयारी की तो परीक्षा एजेंसी भी केंद्र निर्धारण करने में जुटी हुई है। कारण है कि इन शिक्षकों के साथ अन्य शिक्षित बेरोजगारों के लिए भी टेट एग्जाम में अवसर खोले गए हैं। सुप्रीम कोर्ट का आदेश आने के बाद डीपीआई ने शिक्षकों की पात्रता परीक्षा के लिए मार्च में कर्मचारी चयन मंडल को प्रस्ताव भेजा था। संचालनालय का कहना है कि जुलाई तक परीक्षा कराना है। परीक्षा का जो प्रस्ताव भेजा गया है, उसमें कार्यरत 70 हजार शिक्षकों के अलावा अन्य शिक्षित बेरोजगारों के लिए भी पात्रता परीक्षा के विकल्प खुले हुए हैं। विभाग का कहना है कि शिक्षित बेरोजगार भी इस परीक्षा में टीचरों के साथ एलिजिबिलिटी टेस्ट दे सकते हैं। अधिकारियों का कहना है कि कर्मचारी चयन मंडल से भी चर्चा हो चुकी है। पात्रता परीक्षा में अभ्यर्थियों की संख्या बढ़ सकती है। इसलिए व्यवस्थित तरीके से परीक्षा केंद्रों का निर्धारण किया जा रहा है। नतीजतन एग्जाम तिथि में विलंब हो रहा है। लेकिन अप्रैल के अंत तक तिथि घोषित कर दी जाएगी और आवेदन की प्रक्रिया शुरू हो जाएगी। शिक्षा विभाग में अधिकारियों का कहना है कि टीचरों के लिए पात्रता परीक्षा पास करने के लिए दो साल का समय निर्धारित किया गया है। अफसर यह भी कहते हैं कि शिक्षकों के लिए यह अवसर और भी बढ़ाया जाए। इस पर भी विचार किया जा रहा है। शिक्षक यदि एक बार परीक्षा उत्तीर्ण नहीं करता है तो उसे दोबारा मौका मिलेगा। कोशिश की जा रही है कि इन्हें तीसरा अवसर भी दिया जाए। इनके लिए कोचिंग एवं मॉडल आंसर की व्यवस्था पर भी विचार जारी है ताकि कोई भी शिक्षक अनुत्तीर्ण न रह सके और वह पात्रता परीक्षा पास करके बेहतर सेवा कर सके।
शिक्षक संघों के साथ कमिश्नर की बैठक
पात्रता परीक्षा को लेकर आंदोलित शिक्षकों के आक्रोश को थामने के लिए सोमवार को लोक शिक्षण संचालनालय के कमिश्नर अभिषेक सिंह ने मान्यता प्राप्त शिक्षक संघों की बैठक ली। इस बैठक में मध्य प्रदेश शिक्षक संघ की ओर से डाक्टर क्षत्रवीर सिंह राठौर, महामंत्री राकेश गुप्ता के अलावा शिक्षक कांग्रेस से अध्यक्ष सतीश शर्मा एवं मध्य प्रदेश राज्य कर्मचारी संघ की ओर से जितेन्द्र सिंह उपस्थित हुए। जहां इन्होंने शिक्षकों की समस्या का पूरा पक्ष रखा। संघों के प्रतिनिधियों के बीच कमिश्नर सिंह ने भी स्थिति स्पष्ट की। शिक्षक संघ के महामंत्री राकेश गुप्ता के अनुसार कमिश्नर ने साफ कहा है कि सुप्रीम कोर्ट का आदेश है। इसलिए इस निर्णय के पालन में परीक्षा तो होगी लेकिन शिक्षक मांग कर रहे हैं तो विभाग सुप्रीम कोर्ट जाने के लिए भी विधि विशेषज्ञों से सलाह ले रहा है।
जुलाई के पहले सप्ताह में हो सकती है परीक्षा
डीपीआई के अधिकारियों की माने तो शिक्षकों को जुलाई के प्रथम सप्ताह में ही परीक्षा में बैठाया जा सकता है क्योंकि बच्चों की पढ़ाई भी देखना है। इसके अलावा इनके साथ में वह शिक्षित युवा भी परीक्षा में बैठेंगे जो सरकारी सेवा में नहीं हैं। इसलिए व्यवस्थाएं जुटाना भी उस हिसाब से जरूरी है। जुलाई में जो परीक्षा होगी उसका रिजल्ट आने के बाद जितने शिक्षक अनुत्तीर्ण होंगे तो फिर इनकी दूसरी परीक्षा की तैयारी की जाएगी।
इधर सरकार ने कोर्ट जाने के लिए विधि से मांगा अभिमत
शिक्षकों की मांग पर स्कूल शिक्षा विभाग कोर्ट जाने की भी तैयारी कर रहा है। शिक्षा मंत्री स्वयं कह चुके हैं कि हम विधि विभाग का मत ले रहे हैं। शिक्षा विभाग के अधिकारियों का कहना है कि इस मामले में विधि विशेषज्ञों से राय ली जा रही है। विभाग ने उत्तर प्रदेश सहित दूसरे राज्यों का भी अध्ययन किया है कि वहां की सरकारें भी उच्चतम न्यायालय गई हैं लेकिन वहां से परीक्षा पर कोई स्थगन नहीं मिल पाया है। लेकिन शिक्षक मांग कर रहे हैं तो विभाग भी उनकी भावनाओं का ख्याल रखते हुए कोर्ट जाने की तैयारी कर रहा है।

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