
- ट्रांसफर पॉलिसी की टाइमलाइन खत्म, स्कूलवार और विषयवार डेटा अपडेट नहीं
भोपाल/बिच्छू डॉट कॉम। प्रदेश में कर्मचारियों के तबादलों के लिए सरकार ने 1 से 15 जून तक की अवधि निर्धारित कर दी है, लेकिन स्कूल शिक्षा विभाग अब भी तबादलों के मुद्दे पर अलग से मंथन कर रहा है। डॉ. मोहन यादव सरकार की ट्रांसफर पॉलिसी-2026 में स्कूल शिक्षा विभाग को शामिल नहीं किए जाने के बाद शिक्षकों के बीच तबादलों को लेकर बेचैनी बढ़ गई है। लगातार उठ रही मांगों के बीच विभाग ने शिक्षकों के तबादलों से प्रतिबंध हटाने की दिशा में तैयारी शुरू कर दी है।
स्कूल शिक्षा विभाग ने सभी जिला शिक्षा अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि वे एजुकेशन पोर्टल 3.0 पर प्रत्येक स्कूल में विषयवार पदस्थ शिक्षकों की जानकारी अद्यतन कराएं। साथ ही जिन शिक्षकों का निधन हो चुका है या जो सेवानिवृत्त हो गए हैं, उनके नाम भी सूची से हटाने को कहा गया है। विभाग का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि संभावित तबादला प्रक्रिया के दौरान किसी स्कूल में शिक्षकों की आवश्यकता और उपलब्धता का सही आकलन हो सके तथा अतिरिक्त पदस्थापना जैसी स्थिति न बने। प्रदेश के सरकारी स्कूलों में लगभग तीन लाख शिक्षक कार्यरत हैं। विभागीय अधिकारियों का मानना है कि अद्यतन डाटा के बिना व्यापक तबादला प्रक्रिया संचालित करना कठिन होगा। इसी कारण पहले स्कूलों की वास्तविक स्थिति को पोर्टल पर दर्ज कराने पर जोर दिया जा रहा है।
पौने चार साल बाद भी लागू नहीं हो सकी व्यवस्था
गौरतलब है कि अगस्त 2022 में तत्कालीन मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की अध्यक्षता वाली कैबिनेट ने स्कूल शिक्षा विभाग की नई ट्रांसफर पॉलिसी को मंजूरी दी थी। इस नीति में शिक्षकों के स्थानांतरण की पूरी प्रक्रिया ऑनलाइन करने का प्रावधान किया गया था। इसके तहत शिक्षकों को पोर्टल पर आवेदन करना था और निर्धारित समय-सीमा के भीतर तबादले किए जाने थे। हालांकि नीति को मंजूरी मिले लगभग पौने चार वर्ष बीत चुके हैं, लेकिन अब तक इसका पूर्ण रूप से क्रियान्वयन नहीं हो सका है। परिणामस्वरूप हजारों शिक्षक लंबे समय से तबादलों की प्रतीक्षा कर रहे हैं। कई शिक्षक पारिवारिक, स्वास्थ्य एवं अन्य कारणों से स्थानांतरण चाहते हैं, लेकिन वर्षों से प्रतिबंध के चलते उनकी मांगें लंबित हैं।
इस साल भी नहीं शुरू हो सकी प्रक्रिया
ट्रांसफर पॉलिसी के अनुसार प्रत्येक वर्ष जनवरी से स्थानांतरण प्रक्रिया शुरू होनी चाहिए। निर्धारित प्रावधानों के मुताबिक 30 अप्रैल तक तबादला आदेश जारी कर दिए जाने चाहिए और शिक्षकों को 15 मई तक नए पदस्थापन स्थल पर कार्यभार ग्रहण करना होता है। लेकिन वर्ष 2026 में भी यह समय-सीमा पूरी तरह समाप्त हो चुकी है और अभी तक स्थानांतरण प्रक्रिया शुरू नहीं हो पाई है। यही कारण है कि शिक्षकों के विभिन्न संगठन सरकार पर तबादलों से प्रतिबंध हटाने का दबाव बना रहे हैं। उनका तर्क है कि नीति बनने के बावजूद यदि उसका पालन नहीं हो रहा है तो इसका नुकसान शिक्षकों और शिक्षा व्यवस्था दोनों को उठाना पड़ रहा है।
प्रशासनिक तबादलों को मिलेगी प्राथमिकता
स्कूल शिक्षा विभाग की ट्रांसफर पॉलिसी में प्रशासनिक स्थानांतरण को सर्वोच्च प्राथमिकता देने का प्रावधान है। इसके बाद स्वैच्छिक स्थानांतरण किए जाएंगे। नीति के अनुसार स्वैच्छिक स्थानांतरण प्राप्त करने वाले शिक्षक को कम से कम तीन वर्ष तक उसी स्थान पर कार्य करना होगा। इसके अलावा उत्कृष्ट विद्यालय, मॉडल स्कूल और सांदीपनि विद्यालयों में स्वैच्छिक स्थानांतरण की अनुमति नहीं होगी। नीति में यह भी स्पष्ट किया गया है कि शिक्षकों को मंत्रियों, विधायकों अथवा अन्य जनप्रतिनिधियों की निजी स्थापना में पदस्थ नहीं किया जाएगा।
इन शिक्षकों को तबादले से छूट: ट्रांसफर पॉलिसी में कुछ विशेष श्रेणियों के शिक्षकों को स्थानांतरण से छूट देने का भी प्रावधान किया गया है। तीन वर्ष के भीतर सेवानिवृत्त होने वाले शिक्षक, गंभीर बीमारी से पीडि़त कर्मचारी, दिव्यांग शिक्षक तथा 40 प्रतिशत या उससे अधिक नि:शक्तता वाले कर्मचारियों का तबादला सामान्य परिस्थितियों में नहीं किया जाएगा। इसी प्रकार जिनकी सेवा अवधि एक वर्ष से कम शेष है, उन्हें भी स्थानांतरण से राहत मिलेगी। इस बीच लोक शिक्षण आयुक्त ने एक महत्वपूर्ण निर्देश जारी करते हुए स्पष्ट किया है कि जिन शिक्षकों की ड्यूटी आगामी जनगणना कार्य में लगाई गई है, उनके तबादले फरवरी 2027 तक नहीं किए जाएंगे। प्रदेश में ऐसे शिक्षकों की संख्या 58 हजार से अधिक बताई जा रही है। सभी जिला अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि 1 जून 2026 तक जनगणना कार्य में लगे शिक्षकों का विवरण एजुकेशन पोर्टल 3.0 पर दर्ज किया जाए। इससे स्थानांतरण प्रक्रिया शुरू होने की स्थिति में ऐसे शिक्षकों को सूची से अलग रखा जा सकेगा।
