मप्र में 700 राइस मिलों पर लटके ताले

राइस मिलों
  • बकाया भुगतान न मिलने से आर्थिक संकट में फंसे मिलर्स

    भोपाल/बिच्छू डॉट कॉम। मप्र में सरकार द्वारा तय अपग्रेडेशन राशि, कस्टम मिल्ड राइस (सीएमआर) और अन्य मदों की बकाया राशि का भुगतान न होने के कारण  राइस मिलों की आर्थिक हालत बिगड़ गई है। प्रदेश का राइस मिल उद्योग इन दिनों गंभीर वित्तीय संकट से गुजर रहा है। प्रदेश की करीब 1200 राइस मिलों में से लगभग 700 मिलें बंद हो चुकी हैं। मिलर्स का आरोप है कि बकाया राशि का भुगतान न होने के बैंक ऋण, बिजली बिल, मजदूरी और अन्य खर्चों का भार उठाना मुश्किल हो गया है, जिससे बड़ी संख्या में मिलर्स डिफाल्टर हो रहे हैं।
    एक ओर सरकार सूक्ष्म लघु एवं मध्यम उद्यमों को प्रोत्साहित कर रही तो वहीं राइस मिले जैसे लघु उद्योग को अपग्रेडेशन राशि व कस्टम मिल्ड राइस (सीएमआर) की राशि ही नहीं दी गई है। इस नुकसान की भरपाई की मांग को लेकर मप्र चावल उद्योग महासंघ के पदाधिकारियों ने भोपाल में उप मुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ल से भेंटकर अपनी समस्या बताई तो उन्होंने आश्वासन दिया कि सुझावों एवं समस्याओं का परीक्षण कर निराकरण के लिए आवश्यक कार्यवाही की जाएगी। इसके बाद खाद्य नागरिक आपूर्ति मंत्री गोविंद सिंह राजपूत से मिलकर उन्हें ज्ञापन सौंपा।
    170 करोड़ अभी तक मिलर्स को नहीं मिला
    मध्य प्रदेश चावल उद्योग महासंघ के अध्यक्ष आशीष अग्रवाल और कार्यकारी अध्यक्ष दिलीप सिंह ने बताया कि वर्ष 2024 -25 का धान अपग्रेडेशन (साफ सफाई) का लगभग 170 करोड़ अभी तक मिलर्स को नहीं मिला है। साथ ही बारदाने की उपयोगिता व्यय की राज्यांश राशि, धान मिलिंग, परिवहन और जमा किए गए अतिरिक्त बारदाने की राशि, कस्टम मिल्ड राइस (सीएमआर) के साथ मिक्सिंग करके जमा किए गए एक प्रतिशत टूटन की राशि मिलिंग, हम्माली, परिवहन सहित कई बकाया की 30 करोड़ रुपये की राशि नहीं दी गई हैं। बैंक लोन की किस्ते, ब्याज, बिजली बिल, हम्माली, मजदूरी, वेतन और अन्य खर्चे वहन न कर पाने के कारण मिलर्स बैंक डिफाल्टर हो गए है और मिल बंद करने की स्थिति आ गई है।
    मिलिंग में गिरावट, शासन को बढ़ता नुकसान
    महासंघ के अध्यक्ष आशीष अग्रवाल ने बताया कि भारतीय खाद्य मंत्रालय की टेस्ट मिलिंग रिपोर्ट में चावल की झड़ती 67 प्रतिशत से कम और टूटन 25 प्रतिशत से अधिक पाई गई है। इसके बावजूद 67 प्रतिशत चावल जमा करने का नियम लागू है, जिससे मिलर्स को नुकसान हो रहा है। टूटे चावल को कम कीमत पर बेचना पड़ता है, जिसकी भरपाई के लिए अपग्रेडेशन राशि दी जानी थी, लेकिन वह भी नहीं मिली। वर्तमान स्थिति के चलते प्रदेश में मिलिंग कार्य प्रभावित हुआ है और अब तक केवल पांच प्रतिशत मिलिंग ही हो सकी है। मिलर्स की अनिच्छा के कारण वर्ष 2025-26 की धान मिलिंग भी प्रभावित होने की आशंका है। इससे शासन को हर महीने करीब 200 करोड़ रुपये का अतिरिक्त ब्याज, भंडारण शुल्क और सूखत का नुकसान उठाना पड़ रहा है।
    धान के खराब होने का खतरा बढ़ा
    मिलिंग कार्य धीमा होने से ओपन कैप में रखी हजारों करोड़ रुपये की धान पर सडऩे का खतरा मंडरा रहा है। बारिश के मौसम में यह संकट और गहरा सकता है। इससे न केवल मिलर्स बल्कि शासन को भी भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है। महासंघ का कहना है कि यदि जल्द बकाया राशि का भुगतान और नीति में सुधार नहीं किया गया तो राइस मिल उद्योग पूरी तरह ठप हो सकता है। इससे हजारों लोगों की आजीविका प्रभावित होगी और प्रदेश की अर्थव्यवस्था पर भी नकारात्मक असर पड़ेगा। प्रदेश के राइस मिलर्स ने बताया कि वर्ष 2024-25 की मिलिंग नीति के तहत एफसीआइ में जमा चावल पर रेशो अनुसार अपग्रेडेशन राशि देने के आदेश अब तक जारी नहीं किए गए हैं। इससे मिलर्स की आर्थिक स्थिति बिगड़ गई है और वे वर्ष 2025-26 में उपार्जित धान की मिलिंग में रुचि नहीं ले रहे हैं। इसके चलते राज्य सरकार को हर माह 200 करोड़ रुपये का अतिरिक्त ब्याज, भंडारण शुल्क और सूखत का नुकसान हो रहा है। 

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