- पंकज जैन

एक पुरानी कहावत है जब रोम जल रहा था, तब निरो बंसी बजा रहा था यही काम भूरे काका भी कर रहे है, इधर तमाम तनावो के बिच इस्लामबाद मे शांति की बात चल रही थी, उधर अंकल सैम एक फाइट देखने मे मशगूल थे। जिस रोज ट्रम्प ने अपना ट्रम्प का इक्का चलाया था कि अस्थायी युद्ध विराम किया जा रहा है, और पाकिस्तान की मध्यस्थता मे आगे वार्ता होगी, तब ही तय था कि वार्ता फैल होगी, पहला कारण तो मध्यस्थता करने वाला देश अमेरिका का पठ्ठा वह भी उल्लू (ट्रम्प) का पठ्ठा, दूसरा मध्यस्थता करने वाले की एक हैसियत होती है, उसका अपना इतना वजन होता है, कि, वह अपनी ताकत के बल पर दोनों पक्षो पर दबाव बना कर समझौता करवा दे, जबकि पाक के तो हालात यह है कि खुद मियां फाजिहत, औरो को नसीहत।
बहरहाल, अब वर्तमान परिस्थितियों पर नजर डाले तो आगे जो होना है, वह होगा ही, पर, जो बाते इस युद्ध मे निकल कर आयी है, उस पर गौर करे….
1 अमेरिका की सारी चौधराहट निकल गयी।
2 जिन देशो से विशेषत: अरब देशो से अमेरिका रंगदारी टेक्स वसूल कर रहा था, अब शायद ही आगे कंटिन्यू हो पाए।
3 ईरान की जनता ने गजब की देशभक्ति दिखाई।
4 ट्रम्प के बारे मे कहा जाता रहा है कि वह एक बिजनेस मेन है, पर, वह एक मुर्ख बिजनेस मेन निकला, जो, सोलह सौ के हजार करता है,आज इस युद्ध की वजह से रूस और इरान ने जम कर पैसा कमाया, और ट्रम्प महाराज आज भी अमेरिका कांग्रेस के आगे और पैसों के लिए हाथ फैला रहे है। इधर पाकिस्तान को पूर्व मे किये अनुबंध के तहत अरब कंट्रीस को अपनी सेना और आयुध भेजना पढ़े, इससे इरान तो नाराज हुआ ही, वार्ता फैल होने की बदनामी का ठीकरा भी पाक पर ही फूटा।
ऐसा नहीं है कि यह पहली मर्तबा है जब अमेरिका ने हमारे ऊपर भी दबाव बनाया, अभी कुछ रोज पहले ही ट्रम्प ने एक बयान दे कर कहा था, जाओ आपको (भारत ) तीस रोज के लिए तेल दुसरो से खरीदने की छुट दी जाती है,पूर्व मे बराक ओबामा ने भी तत्कालीन प्रधान मंत्री मनमोहन सिंह से ईरान से तेल खरीदने के लिए मना किया था, लेकिन मनमोहन सिँह ने विनम्र किन्तु स्पष्ट भाषा मे इंकार कर दिया था, और बराक को हमारी हैसियत बता दी थी। अमरीका उस चापलूस पेलवान जैसा है कि यदि कोई दबे तो पूरा दबा दो, नहीं दबे तो खुद दबा जाओ।
खैर, जो भी हो भले ही वार्ता फैल हो गई हो, पर ट्रम्प अब पुन: युद्ध छेडऩे की गलती नहीं करेगा।
अब हमें भी यह समझना होगा कि यदि आने वाले समय मे ईरान और अमेरिका मे से हमें एक को चुनना पडे तो हमें इरान को चुनना चाहिए,कारण पाकिस्तान ईरान का दुश्मन होगा और दुश्मन का दुश्मन दोस्त होता है।
चलते चलते: भारतीय इलेक्ट्रॉनिक मिडिया से रिक्वेस्ट है कि वे युद्ध के विषय को लें कर स्टूडियो मे तीतर बटेर की लड़ाई को यूँ ही चलने दे, कारण कि, रोजमर्रा के तनाव मे आजकल यही मनोरंजन का साधन बचा है, साथ ही यह भी निवेदन है कि कभी भविष्य मे भी अपने स्टूडियो मे पढ़े लिखें लोगो को प्रवेश न दे।
