- दिनेश निगम ‘त्यागी’
निगम-मंडलों के पदाधिकारियों को मंत्री का दर्जा नहीं
राज्य सरकार ऐसा चौंकाने वाला निर्णय लेने जा रही है, जिसके कारण प्रदेश के निगम-मंडल, आयोग, प्राधिकरणों आदि में नई राजनीतिक नियुक्त पाने वाले नेताओं का पहले जैसा रुतबा नहीं रहेगा। इसके तहत सरकार नवनियुक्त पदाधिकारियों को मंत्री और राज्य मंत्री का दर्जा नहीं देगी। ऐसा हुआ तो किसी भी पदाधिकारी को वीआईपी प्रोटोकॉल नहीं मिल सकेगा। वे जिस पद पर नियुक्त हुए, सिर्फ उसके प्रभाव का ही उपयोग कर सकेंगे। संगठन ने साफ कर दिया है कि पढ़ अब केवल प्रतिष्ठा या आराम के लिए नहीं, बल्कि मैदान में उतरकर पार्टी के लिए पसीना बहाने और परिणाम देने के लिए दिए जा रहे हैं। हालांकि, इस निर्णय से संबंधित नेता की चुनाव के टिकट के लिए दावेदारी मजबूत हो सकती है।
दिग्विजय इस मसले पर न बोलें यह कैसे संभव था?
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह ने इंदौर की विधायक ऊषा ठाकुर के साथ संवाद में कहा कि उन्होंने भोजशाला पर आए निर्णय का विरोध नहीं किया है। पर, दिग्विजय नहीं माने और दो दिन बाद ही उन्होंने हाईकोर्ट के निर्णय पर सवाल उठा दिया। उन्होंने कहा कि भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण की रिपोर्ट में भोजशाला परिसर में मंदिर होने के कोई प्रमाण नहीं मिले थे। उन्होंने कहा कि उमा भारती सरकार के दौरान सरकारी वकील द्वारा पेश की गई एएसआई रिपोर्ट में भोजशाला में मंदिर होने के प्रमाण नहीं बताए गए थे। दिग्विजय ने कहा कि एएसआई संरक्षित स्मारकों को पूजा स्थल के रूप में इस्तेमाल करने को लेकर कानूनी स्थिति स्पष्ट होनी चाहिए।
कांग्रेस में होगा अजय के अल्टीमेटम का कोई असर
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता अजय सिंह पार्टी छोड़ने वाले नेताओं को लेकर हमेशा सख्त रहे हैं। इन्हें वे गद्दार कहते हैं और हमेशा इनकी कांग्रेस में वापसी का विरोध करते रहे हैं। अब अजय ने कांग्रेस की सरकार गिराने वाले केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया को लेकर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि यदि वे कांग्रेस में आना चाहेंगे तो नहीं लेंगे। अजय ने अल्टीमेटम देते हुए यह भी कहा कि मेरे विरोध के बावजूद यदि सिंधिया को कांग्रेस में लिया गया तो वे खुद पार्टी छोड़ देंगे। सवाल है कि क्या अजय अब भी कांग्रेस को अच्छी तरह नहीं जानते? क्या उन्हें ऐसा अल्टीमेटम देना चाहिए? यह सवाल इसलिए वाजिब है क्योंकि, चौधरी राकेश सिंह की तरह सिंधिया जब चाहेंगे, कांग्रेस में आ जाएंगे और अजय कुछ नहीं कर पाएंगे।
चिंताओं से मुक्त नहीं हो पा रहे भाजपा के चिंतामणि
प्रदेश के भाजपा विधायक डॉ. चिंतामणि मालवीय से जुड़ा एक विवाद शांत नहीं होता और अगला चिंता में डाल देता है। अब चिंतामणि महाकाल पार्किंग की जमीन को लेकर विवाद में फंस गए हैं। आरोप है कि महाकाल पार्किंग के लिए आरक्षित 45 हजार वर्ग फीट सरकारी जमीन चिंतामणि की कंपनी ने औने-पौने दाम 3 82 करोड़ रुपए में खरीद ली। इसे लेकर उनका विरोध हो रहा है। हालांकि, चिंतामणि का कहना है कि खरीदी प्रक्रिया नियमानुसार हुई है। सच जो भी हो, पर चिंताएं चिंतामणि का पीछा नहीं छोड़ रही हैं।
