मूल निवासी का प्रमाण देने पर ही बनेगा एससी-एसटी सर्टिफिकेट

एससी-एसटी सर्टिफिकेट

मध्य प्रदेश में अनुसूचित जाति (एससी) और अनुसूचित जनजाति (एसटी) के प्रमाण पत्र जारी करने और उनके मूल निवास के सत्यापन को लेकर राज्य सरकार ने सख्ती की है। सामान्य प्रशासन विभाग (जीएडी) ने केंद्रीय गृह मंत्रालय से प्राप्त निर्देशों के बाद प्रदेश के सभी कलेक्टर और संबंधित विभागों को आदेश जारी किए हैं। इसमें कहा गया है कि प्रमाण पत्र जारी करने वाले अधिकारी यह सुनिश्चित करें कि किसी भी स्तर पर नियमों की अनदेखी न हो। माइग्रेशन के मामलों में आवेदक को अपने मूल राज्य के दस्तावेजों के साथ मप्र में मूल निवास की अवधि का पुख्ता प्रमाण पत्र देना अनिवार्य होगा। विभाग द्वारा जारी आदेश में कहा गया है कि जाति प्रमाण पत्र जारी करते समय मूल निवासी होने के दावों की जांच की जाए। विशेषकर उन आवेदक के परिवारों के बारे में जो अंतर-राज्यीय माइग्रेट हो कर मप्र में आया हो। खासतौर पर उत्तरप्रदेश, महाराष्ट्र और राजस्थान से मप्र आए हों। केंद्रीय गृह मंत्रालय के 10 मार्च 2026 को जारी पत्र के बाद राज्य सरकार ने यह कदम उठाया है।

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