- लोक निर्माण विभाग के सर्वे में चिह्नित किए गए 45 पुल
भोपाल/बिच्छू डॉट कॉम। मप्र में एक तरफ सडक़, पुल-पुलियों का तेजी से निर्माण हो रहा है, वहीं दूसरी तरफ प्रदेश में जर्जर पुलों पर परिवहन हो रहा है। आए दिन किसी न किसी पुल के क्षतिग्रस्त होने के मामले सामने आ रहे हैं। इसको लेकर लोक निर्माण विभाग ने प्रदेशभर में सर्वे कराया है, जिसमें 45 ऐसे पुल चिन्हित हुए हैं जो जर्जर अवस्था में है। इनके लिए टेंडर भी जारी कर दिए गए लेकिन पुलों के क्षतिग्रस्त होने की घटना लगातार सामने आ रही हैं। दरअसल, प्रदेश में एक के बाद एक पुलों के क्षतिग्रस्त होने के मामले सामने आने पर लोक निर्माण विभाग ने पूरे प्रदेश में सर्वे कराया और उन पुलों को चिह्नित कराया, जहां काम कराना अनिवार्य है।
गौरतलब है कि प्रदेश में अधोसंरचना विकास के काम तेजी के साथ चल रहे हैं। सरकार पूंजीगत निवेश लगातार बढ़ा रही है, जिसकी सराहना भारत सरकार ने भी की है लेकिन गुणवत्ता को लेकर सवाल भी उठ रहे हैं। कम से कम पुलों के मामले में तो स्थिति ऐसी ही नजर आती है। ग्वालियर में निर्माणाधीन एलिवेडेट कारिडोर में गर्डर गिर गया तो जबलपुर में दूसरी बार के रेलवे ओवर ब्रिज क्षतिग्रस्त हुआ। शिवपुरी के पोहरी में फ्लाईओवर का स्लैब गिरने की घटना पहले सामने आ चुकी है, जिसमें मजदूर घायल हो गए थे लेकिन इंजीनियरों पर कोई कार्रवाई नहीं हुई। विभागीय अधिकारियों ने कहना है कि सडक़ विकास प्राधिकरण ने प्रदेश के सभी पुलों का सर्वे कराया था। इसमें भोपाल, इंदौर, ग्वालियर, जबलपुर, घार, खंडवा, बुरहानपुर, छिंदवाड़ा, नर्मदापुरम, उज्जैन और रीवा में मरम्मत के लिए पुल चिन्हित किए गए। 19 करोड़ रुपये से अधिक की राशि भी मरम्मत के लिए मंजूर कर दी गई लेकिन अभी टेंडर की प्रक्रिया ही पूरी नहीं हुई है। जबकि, मानसून के आने में तीन माह रह गए हैं।
इंजीनियर पर कोई कार्रवाई नहीं
ग्वालियर अंचल में शिवपुरी पोहरी रोड स्थित रेलवे क्रासिंग पर निर्माणाधीन फ्लाईओवर ब्रिज का स्लैब गिर गया था। मजदूर घायल हुए। जांच में यह बात सामने आई कि लापरवाही बरती गई लेकिन इंजीनियर पर कोई कार्रवाई नहीं हुई। अब ग्वालियर में अलाइनमेंट ठीक करने के दौरान 35 फीट लंबा 110 टन वजनी गर्डर गिर गया। ग्वालियर संभाग में पुलों का काम प्रभारी कार्यपालन यंत्री जोगिंदर यादव देख रहे हैं। इसके पहले दतिया क्षेत्र में अतिवर्षा के कारण पुल क्षतिग्रस्त हो चुके हैं, जिसकी जांच विभाग ने कराई थी मगर किसी की जिम्मेदारी निर्धारित नहीं हुई। जबकि, भारत के नियंत्रक महालेखापरीक्षक ने 2023 में प्रस्तुत रिपोर्ट में डिजाइन को लेकर सवाल उठाए थे। इसके बाद भी उस डिजाइन पर काम होना अपने आप में सवाल खड़े कर रहा है। उधर, विभाग के प्रमुख अभियंता केपीएस राणा का कहना है कि पुलों का निर्माण अलग-अलग एजेंसियां करती हैं। प्रदेश में जर्जर पुल चिन्हित किए जा चुके हैं। मरम्मत के लिए टेंडर भी जारी कर दिए हैं। उधर दिसंबर 2025 में रायसेन स्टेट हाईवे पर बरेली से पिषरिया की जोडऩे वाली सडक़ पर ग्राम नयागांव में 50 साल पहले बने पुल का एक हिस्सा ढह गया था। यहां मरम्मत का काम चल रहा था। मलबे में कुछ लोग दब गए थे। यह कोई अकेली घटना नहीं है। भोपाल जबलपुर मार्ग पर शहपुरा के पास रेलवे क्रासिंग के ऊपर बना ओवर ब्रिज दोबारा क्षतिग्रस्त हो गया। सितंबर में पहली और दूसरी बार फरवरी में इसका दूसरा हिस्सा गिर गया। यह पुल 40 करोड़ की लागत से चार साल पहले बना था। निर्माणकर्ता कंपनी को ब्लैक लिस्ट किया जा चुका है।
