- मध्यप्रदेश में नई तबादला नीति आएगी शीघ्र…
- गौरव चौहान

मप्र सरकार वर्ष 2026 की नई तबादला नीति लागू करने की तैयारी में है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के संकेतों के बाद सामान्य प्रशासन विभाग (जीएडी) नीति का ड्राफ्ट तैयार करने में जुट गया है, जिसे इस महीने के अंत तक कैबिनेट के सामने रखा जा सकता है। सरकार हर साल की तरह इस बार भी तबादलों पर लगी रोक को सीमित अवधि के लिए हटाएगी। प्रस्ताव के अनुसार, करीब एक महीने की विंडो खोली जाएगी, जिसमें विभिन्न विभागों में कर्मचारियों के तबादले किए जा सकेंगे। हालांकि, अनियंत्रित तबादलों पर रोक लगाने के लिए एक सीमा तय की गई है-किसी भी विभाग में कुल तबादले उसके कैडर के 20 प्रतिशत से अधिक नहीं होंगे। इस बार की नीति में एक बड़ा बदलाव प्रभारी मंत्रियों की भूमिका को लेकर देखने को मिल सकता है।
सूत्रों के अनुसार, मंत्रियों को अपने जिलों में तबादलों पर पहले जैसे अधिकार दिए जा सकते हैं। यानी उनकी स्वीकृति के बिना सूची को अंतिम रूप नहीं दिया जाएगा। इससे जिला स्तर पर राजनीतिक और प्रशासनिक समन्वय बढऩे की संभावना है। वहीं, स्थानीय स्तर पर कलेक्टर की भूमिका भी महत्वपूर्ण रहेगी। तृतीय और चतुर्थ श्रेणी के कर्मचारियों के तबादले पहले कलेक्टर स्तर पर प्रस्तावित होंगे, जिसके बाद आगे की प्रक्रिया पूरी की जाएगी। पिछले साल अपेक्षाकृत कम तबादले होने के कारण इस बार कर्मचारियों में उम्मीदें बढ़ी हैं। लंबे समय से एक ही स्थान पर पदस्थ अधिकारियों-कर्मचारियों को नई नीति से राहत मिलने की संभावना है। बैठकों में जनप्रतिनिधियों ने भी तबादला प्रतिबंध हटाने की मांग रखी थी, जिससे साफ है कि इस बार प्रक्रिया ज्यादा सक्रिय रहने वाली है। कैबिनेट की मंजूरी के बाद मई की शुरुआत से तबादलों का दौर शुरू होने के आसार हैं।
विधायकों की अनुशंसा को मिलेगा प्राथमिकता
मप्र के सरकारी अधिकारी-कर्मचारी अब ट्रांसफर की राह ताकने लगे हैं। ऐसे में संभावना जताई जा रही है कि मई-जून में तबादले होंगे। नीति पिछले साल की तरह ही होगी। तबादला आदेश ऑनलाइन जारी होंगे। जिले के भीतर आदेश प्रभारी मंत्री के अनुमोदन के बाद ही कलेक्टर जारी करेंगे। विधायकों की अनुशंसा को प्राथमिकता मिलेगी। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि नीति का प्रारूप तैयार करके कैबिनेट के सामने प्रस्तुत किया जाए। विधायक और जनप्रतिनिधियों द्वारा लगातार अधिकारियों-कर्मचारियों के तबादले को लेकर मुख्यमंत्री को मांग पत्र दिए जाते हैं। प्रयास यह रहता है कि ए प्लस नोटशीट मुख्यमंत्री की ओर से विभाग को चली जाए तो तबादला हो जाए मगर इससे प्रशासकीय व्यवस्था प्रभावित होती है। हाल ही में एक बैठक में जब मंत्रियों-विधायकों ने तबादले को लेकर बात उठाई तो मुख्यमंत्री ने कहा कि जिस तरह पिछले साल व्यवस्था थी, वैसी ही रहेगी। विभाग अपनी आवश्यकता के अनुसार तबादले करें। जिले के भीतर प्रशासनिक व्यवस्था को देखते हुए कलेक्टर तबादले के प्रस्ताव प्रभारी मंत्री को प्रस्तुत करेंगे। वे विधायकों की अनुशंसा को दृष्टिगत रखते हुए अनुमोदन देंगे।
20 फीसदी तय होगी सीमा
प्रदेश में 15 मई के बाद तबादले शुरू हो सकते हैं। सामान्य प्रशासन विभाग ने इसके लिए नीति तैयार करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। तबादला आदेश ऑनलाइन जारी होंगे। किसी भी संवर्ग में अधिकतम 20 प्रतिशत तबादले किए जा सकेंगे। राज्य संवर्ग के प्रथम श्रेणी के मुख्य कार्यपालन अधिकारी के तबादला समन्वय के माध्यम से मुख्यमंत्री के अनुमोदन से होंगे। शेष अधिकारियों के तबादला प्रस्ताव का अनुमोदन विभागीय मंत्री करेंगे। इसमें इस बात का ध्यान रखा जाएगा कि पहले उन कार्यपालिक अधिकारियों को स्थानांतरित किया जाएगा जिन्हें एक स्थान पर पदस्थ रहते तीन वर्ष से अधिक हो चुके हैं। सूत्रों का कहना है कि अप्रैल अंत तक नीति का प्रारूप कैबिनेट के सामने रख दिया जाएगा ताकि मई-जून में प्रक्रिया पूरी हो जाए।
जनगणना कार्य में लगे कर्मचारियों के तबादले नहीं
सामान्य प्रशासन विभाग के अधिकारियों का कहना है कि भारत सरकार के निर्देशानुसार जनगणना के काम में लगे मैदानी अधिकारियों-कर्मचारियों के तबादले नहीं होंगे। यदि किसी का तबादला किया जाना है तो आदेश में ही यह स्पष्ट रूप से बताया जाएगा कि यह जनगणना का कार्य पूरा होने पर प्रभावी होगा। अधिकारियों का कहना है कि हर जिले में 15 से 20 प्रतिशत कर्मचारियों की जनगणना में ड्यूटी लगाई गई है। अधिकारियों का कहना है कि जनगणना का कार्य पूरी तरह टाइम-बाउंड है और केंद्र सरकार इसकी लगातार मॉनिटरिंग करती है। इसमें किसी भी प्रकार की लापरवाही या देरी की जवाबदेही सीधे राज्य सरकार की रहेगी। यही कारण है कि राज्य सरकार जनगणना कार्य में लगे कर्मचारियों के लिए अलग से प्रावधान करेगी। एक मई से प्रगणक स्मार्टफोन आधारित मोबाइल ऐप के जरिए घर-घर जाकर जानकारी दर्ज करेंगे। एक प्रगणक के जिम्मे औसतन 200 मकानों की गणना का जिम्मा होगा। औसतन इतने ही मकानों का ब्लॉक बनाया जाएगा। भवनों की गणना शहरी और ग्रामीण दो ही कैटेगरी में की जाएगी। प्रदेश में शहरी और ग्रामीण दोनों मिलाकर लगभग से 3 करोड़ भवन (हाउसहोल्ड) होने का अनुमान है। मप्र सरकार ने पिछले साल नई ट्रांसफर पॉलिसी लागू की थी। इसके अनुसार एक मई से 30 मई, 2025 तक के लिए कर्मचारियों के ट्रांसफर से बैन हटाया गया था। बाद में मंत्रियों की मांग पर इसकी अवधि 17 जून तक बढ़ा दी गई थी। इस दरमियान करीब 50 हजार कर्मचारियों के तबादले किए गए थे।
