- पात्र शिक्षकों का रिकॉर्ड जुटा रहा विभाग…

भोपाल/बिच्छू डॉट कॉम
शिक्षक पात्रता परीक्षा टीईटी नाम का संकट शिक्षकों को छोड़ नहीं रहा है। अभी तक टीईटी के कारण नौकरी पर ही संकट छाया हुआ था। हर शिक्षक को 2028 के पहले परीक्षा पास करने का डर सता रहा था। अब प्रमोशन भी खतरे में नजर आने लगा है। नौकरी के पहले अब प्रमोशन में भी टीईटी मुख्य पात्रता बनने जा रही है। पदोन्नति प्रक्रिया के बीच विभाग द्वारा हर जिले से टीईटी पास शिक्षकों की जानकारी मांगने से शिक्षक संगठन सक्रिय हो गए हैं।
साथ ही विभाग के इस पत्र पर मंथन तेज हो गया है। असल में भोपाल संभाग के संयुक्त संचालक ने एक पत्र जारी कर सभी जिला शिक्षा अधिकारियों से टीईटी उत्तीर्ण शिक्षकों का रिकॉर्ड तलब किया गया है। संयुक्त संचालक द्वारा यह पत्र आयुक्त लोक शिक्षण की वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के बाद जारी किया गया है। इसमें मध्य प्रदेश लोक सेवा पदोन्नति नियम-2025 के तहत पदोन्नति प्रक्रिया को आगे बढ़ाने के लिए जानकारी मांगी गई है। इसके जरिए विभाग ने जिलों से कार्यरत टीईटी उत्तीर्ण सहायक शिक्षक और प्राथमिक शिक्षकों की विषयवार और संवर्गवार (अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति सहित) रिक्त पदों का की जानकारी चाही गई है। पत्र मिलने के बाद जिला शिक्षा कार्यालय का स्टाफ हर स्कूल से टीईटी पास शिक्षकों की विस्तृत जानकारी लेने लगा है। जानकारी तैयार होने के पहले ही शिक्षकों में यह आशंका फैल गई है कि अब टीईटी के आधार पर ही प्रमोशन दिया जाएगा। इसे देखते हुए शिक्षकों का असंतोष बढ़ता जा रहा है। जिलों और विकास खंडों में अलग-अलग प्रकार की जानकारी मांगे जाने से भ्रम की स्थिति और गहरा गई है।
भोपाल जेडी बोले – टीईटी पदोन्नति का आधार नहीं
अपने पत्र के कारण माहौल बिगड़ता देख धर्मेंद शर्मा, संयुक्त संचालक भोपाल संभाग को सफाई देना पड़ी है। संयुक्त संचालक लोक शिक्षण भोपाल ने शुक्रवार को अति आवश्यक पत्र जारी किया है। इसमें स्पष्ट किया है कि गुरुवार को जारी किया गया पत्र टीईटी उत्तीर्ण संबंधी सामान्य जानकारी के लिए है। यह पदोन्नति प्रक्रिया से संबंधित नहीं है। पदोन्नति की प्रक्रिया विभाग में पूर्व से प्रचलित नियमों एवं प्रावधानों के तहत ही संचालित की जाएगी। हालांकि यह पत्र शुक्रवार देर शाम जारी होने से शिक्षक संगठन को ही इसकी जानकारी नहीं पहुंच सकी है।
शिक्षक संगठन हुए सक्रिय
पत्र सामने आते ही शिक्षक संगठन भी सक्रिय हो गए हैं। शासकीय शिक्षक संगठन मप्र के कार्यकारी प्रदेशाध्यक्ष उपेंद्र कौशल का कहना है कि सुप्रीम कोर्ट ने 2028 तक का समय टीईटी पास करने के लिए दिया है। मगर विभाग अब प्रमोशन के पहले भी टीईटी का बंधन लगाने में जुटा है। यह शिक्षकों पर दोहरी मार जैसा है। विभाग को स्थिति स्पष्ट करना चाहिए। अन्यथा शिक्षकों के तनाव का असर शिक्षा की गुणवत्ता पर बढ़ना स्वाभाविक है। स्थिति स्पष्ट होने तक ऐसी जानकारी तैयार नहीं की जाना चाहिए।
