लोक सेवा गारंटी में देरी अब पड़ेगी भारी

  • समय-सीमा चूकने वाले अधिकारियों पर कार्रवाई और जुर्माना तय

भोपाल/बिच्छू डॉट कॉम
मध्य प्रदेश सरकार ने लोक सेवा गारंटी अधिनियम के प्रभावी क्रियान्वयन को लेकर बड़ा प्रशासनिक कदम उठाया है। अब आय, जाति, निवास प्रमाण-पत्र, नामांतरण, बंटवारा, सीमांकन सहित लोक सेवा गारंटी के तहत आने वाली सेवाओं का निर्धारित समय-सीमा में निराकरण नहीं करने वाले अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। इतना ही नहीं, लापरवाही साबित होने पर संबंधित अधिकारी पर आर्थिक दंड भी लगाया जाएगा। प्रदेश में लगातार मिल रही शिकायतों और लंबित प्रकरणों की बढ़ती संख्या को देखते हुए मुख्य सचिव अनुराग जैन ने सभी कलेक्टरों और विभागाध्यक्षों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि लोक सेवा गारंटी अधिनियम के मामलों में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। जहां भी समय-सीमा का उल्लंघन होगा, वहां जिम्मेदार अधिकारी की जवाबदेही तय कर कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।
मध्यप्रदेश में लोक सेवा गारंटी अधिनियम के तहत 500 से अधिक नागरिक सेवाएं अधिसूचित हैं। इनमें आय, जाति, निवास प्रमाण-पत्र, खसरा-खतौनी की नकल, राजस्व संबंधी सेवाएं और विभिन्न विभागों की अन्य आवश्यक सेवाएं शामिल हैं। हालांकि इन सेवाओं के समयबद्ध निराकरण की व्यवस्था होने के बावजूद कई जिलों में आवेदन तय समय के भीतर नहीं निपटाए जा रहे हैं। इसका परिणाम यह है कि हजारों प्रकरण महीनों से लंबित पड़े हैं और नागरिकों को बार-बार कार्यालयों के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं।
राजस्व प्रकरणों का बढ़ता बैकलॉग
सरकारी आंकड़े बताते हैं कि सबसे अधिक लंबित मामले राजस्व विभाग से जुड़े हैं। नामांतरण के 13 लाख से अधिक पंजीकृत मामलों में लगभग 1.87 लाख प्रकरण अभी भी लंबित हैं। इनमें करीब चार हजार मामले 180 दिन से अधिक समय से लंबित पड़े हैं। बंटवारा के लगभग 30 हजार 629 प्रकरण लंबित हैं, जिनमें 7,797 मामले 90 दिन से अधिक समय से अटके हुए हैं। इसी प्रकार सीमांकन के 22,605 मामले अब भी लंबित हैं। ये आंकड़े बताते हैं कि समयबद्ध सेवाओं की व्यवस्था होने के बावजूद जमीनी स्तर पर क्रियान्वयन अपेक्षित स्तर तक नहीं पहुंच पाया है।
मुख्य सचिव ने तय की जवाबदेही
मुख्य सचिव अनुराग जैन ने समीक्षा बैठक में साफ कहा है कि यदि किसी जिले या विभाग में लोक सेवा गारंटी के मामलों में अनावश्यक देरी पाई जाती है तो संबंधित कलेक्टर या विभाग प्रमुख सीधे जिम्मेदार अधिकारी के खिलाफ कार्रवाई करें। सरकार का उद्देश्य नागरिकों को तय समय में सेवाएं उपलब्ध कराना है और इसमें किसी प्रकार की लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी।
डिजिटल प्रशिक्षण में भी पीछे सरकारी कर्मचारी
सरकार की महत्वाकांक्षी मिशन कर्मयोगी योजना भी मध्यप्रदेश में अपेक्षित गति नहीं पकड़ सकी है। इस योजना का उद्देश्य अधिकारियों और कर्मचारियों को डिजिटल तकनीक, आधुनिक प्रशासनिक कौशल, सॉफ्ट स्किल्स और पेशेवर दक्षता से लैस करना है, ताकि शासन की सेवाएं अधिक प्रभावी और पारदर्शी बन सकें। लेकिन सरकारी आंकड़ों के अनुसार प्रदेश के 6.77 लाख शासकीय सेवकों में से केवल करीब तीन लाख कर्मचारियों ने ही डिजिटल प्रशिक्षण पूरा किया है। यानी 53 प्रतिशत कर्मचारी अब भी प्रशिक्षण से वंचित हैं।
अब पदोन्नति और एसीआर से जुड़ेगा प्रशिक्षण
सरकार अब मिशन कर्मयोगी को गंभीरता से लागू करने की तैयारी में है। प्रस्ताव है कि डिजिटल प्रशिक्षण को कर्मचारियों की पदोन्नति, वार्षिक गोपनीय प्रतिवेदन (एसीआर) और सेवा मूल्यांकन से जोड़ा जाए। इससे अधिकारियों और कर्मचारियों को प्रशिक्षण लेने के लिए प्रेरित किया जाएगा और प्रशासनिक कार्यप्रणाली में तकनीकी दक्षता बढ़ेगी।
सुशासन पर सरकार का फोकस
सरकार का मानना है कि समयबद्ध सेवाएं और प्रशिक्षित प्रशासनिक तंत्र ही सुशासन की आधारशिला हैं। इसी उद्देश्य से एक ओर लोक सेवा गारंटी अधिनियम के तहत जवाबदेही बढ़ाई जा रही है, वहीं दूसरी ओर मिशन कर्मयोगी के माध्यम से सरकारी कर्मचारियों को डिजिटल और पेशेवर रूप से सक्षम बनाने की दिशा में कदम तेज किए जा रहे हैं।

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