
- 16 खदानों में तत्काल खनन बंद
भोपाल/बिच्छू डॉट कॉम
मध्यप्रदेश के ग्वालियर जिले में लंबे समय से चल रहे कथित अवैध खनन और प्रशासनिक उदासीनता पर मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने बेहद सख्त रुख अपनाते हुए 16 खदानों में तत्काल प्रभाव से खनन गतिविधियां बंद करने का आदेश दिया है। अदालत ने स्पष्ट किया कि पर्यावरण संरक्षण और मानव जीवन की सुरक्षा से कोई समझौता नहीं किया जा सकता। साथ ही नौ वर्षों से लंबित मामलों में कार्रवाई न करने वाले अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए।
जस्टिस जी.एस. अहलूवालिया और जस्टिस अनुराधा शुक्ला की खंडपीठ ने सुनवाई के दौरान पाया कि वर्ष 2017 में जिन खदान संचालकों को अवैध खनन, स्वीकृत क्षेत्र से बाहर खनिज उत्खनन और करोड़ों रुपये की रॉयल्टी एवं पेनल्टी वसूली के लिए कारण बताओ नोटिस जारी किए गए थे, उन मामलों का आज तक अंतिम निराकरण नहीं किया गया। अदालत ने इसे प्रशासनिक विफलता बताते हुए कहा कि संबंधित अधिकारी पर्यावरण और मानव अस्तित्व जैसे गंभीर विषयों के प्रति संवेदनशील नहीं हैं। हाईकोर्ट ने जिन 16 खदानों में तत्काल खनन रोकने का आदेश दिया है, उनमें बच्चन सिंह, ए.के. जैन/जे.जे. ग्रेनाइट, पीताम्बरा ग्रिट इंडस्ट्रीज, कल्लू उर्फ दीनदयाल, रामनिवास शर्मा, राजेश नीखरा, मनोहर लाल, ओमप्रकाश, राजीव लोचन, अशोक सिंह यादव, सुनील शर्मा, मिरेंद्र सिंह, विनीता यादव, प्रतीक खंडेलवाल सहित अन्य संचालकों की खदानें शामिल हैं।
एसडीओ की रिपोर्ट पर कोर्ट ने जताई नाराजगी
सुनवाई के दौरान डबरा के एसडीओ रूपेश रतन सिंघई व्यक्तिगत रूप से अदालत में उपस्थित हुए। अदालत ने उनकी ओर से प्रस्तुत अनुपालन रिपोर्ट को भ्रामक और अधूरी माना। कोर्ट ने पाया कि बच्चन सिंह की खदान का वर्ष 2020 में बिना एनओसी और नियमों की अनदेखी करते हुए पट्टा नवीनीकरण कर दिया गया, जबकि उन पर 21 करोड़ रुपये से अधिक की रॉयल्टी और 17.53 करोड़ रुपये से अधिक की पेनाल्टी लंबित थी। अदालत ने यह भी पाया कि एसडीओ कई खनन क्षेत्रों का निरीक्षण तक नहीं कर सके थे और बार-बार पूछे जाने पर भी यह नहीं बता पाए कि वर्तमान में कहां खनन जारी है। इसे गंभीर कर्तव्यहीनता मानते हुए हाईकोर्ट ने उनके खिलाफ संविधान के अनुच्छेद-215 के तहत अवमानना की कार्रवाई शुरू करने के आदेश दिए और 15 दिन के भीतर जवाब तलब किया।
कलेक्टर को सौंपी व्यक्तिगत जिम्मेदारी
मामले की गंभीरता को देखते हुए ग्वालियर कलेक्टर रुचिका चौहान भी अदालत में व्यक्तिगत रूप से उपस्थित हुईं। हाईकोर्ट ने कहा कि अब क्षेत्र में अवैध खनन और खनिजों के अवैध परिवहन को रोकने की व्यक्तिगत जिम्मेदारी कलेक्टर की होगी। अदालत ने यह भी पाया कि खदान क्षेत्रों के ई-चेक पोस्ट पर सीसीटीवी कैमरे तो लगे हैं, लेकिन उनकी नियमित निगरानी नहीं की जा रही। इस पर नाराजगी जताते हुए कोर्ट ने सभी डीवीआर और सीसीटीवी फुटेज तत्काल जब्त कर सीलबंद लिफाफे में अदालत के समक्ष प्रस्तुत करने के निर्देश दिए। साथ ही चेतावनी दी कि यदि कोई फुटेज हटाई या नष्ट की गई तो इसे साक्ष्य मिटाने का प्रयास माना जाएगा।
