
- 22 जून से महाविद्यालय स्तर की कांउसिलिंग शुरू होगी
भोपाल/बिच्छू डॉट कॉम। मध्य प्रदेश के 1326 सरकारी और निजी कॉलेजों में कुल 10.50 लाख सीटें हैं। यह सभी सीटें स्नातक और स्रातकोत्तर की हैं। इनमें से इनमें 16 जून तक केवल 1.82 लाख सीटें भरने के बाद भी 8.67 लाख सीटें रिक्त है। इस तरह अभी तक 80 फीसदी से अधिक सीटें खाली रह गयी हैं। आधिकारिक जानकारी के अनुसार नए शैक्षणिक सत्र के लिए उच्च शिक्षा विभाग ने प्रवेश शुरू किया है। इसमें एक मई से 15 जून तक दो चरणों की कांउसिलिंग की गई। इसमें अभी तक कुल एक लाख 82 हजार 473 विद्यार्थियों ने कालेजों में प्रवेश प्राप्त कर लिया है। विशेषज्ञों का मानना है कि अब कॉलेज स्तर की प्रवेश प्रक्रिया अगले सप्ताह से शुरू होने जा रही है। संभावना है कि इस प्रक्रिया के बाद भी आधी से अधिक सीटें खाली रह जायेंगी। फिलहाल प्रवेश प्रक्रिया के अगले चरण के रूप में कॉलेज लेवल काउंसलिंग के लिए पंजीयन शुरू हो चुका है। अब सीधे कॉलेज वाले प्रवेश देंगे। छात्रों को अपने दस्तावेज लेकर कॉलेज पहुंचना होगा।
उल्लेखनीय है कि वर्ष 2024-25 सत्र में यूजी-पीजी की भी करीब 10.50 लाख सीटें हैं, जिसमें कुल 5.04 लाख विद्यार्थियों ने प्रवेश लिया था। ऑनलाइन प्रवेश में जब छात्रों ने ज्यादा रुचि नहीं दिखाई, तो उच्च शिक्षा विभाग ने दोबारा काउंसलिंग करवाई, जिसमें भी छात्रों ने ज्यादा रुचि नहीं दिखाई। अब पहली दफा इस साल कॉलेजों में सीधे कांउसिलिंग कर प्रवेश देने की तैयारी कर ली गई है।
क्या कहते हैं विशेषज्ञ
दूसरी बोर्ड परीक्षाओं में उतीर्ण छात्रों का अब कॉलेजों को इंतजार है। दो चरण पूरे होने के बाद अब कॉलेज छात्रों को सीधे प्रवेश दे सकते हैं। एमपी बोर्ड के दूसरी परीक्षा के 12 वीं के नतीजे हाल ही में आए हैं। इसमें उतीर्ण छात्र कॉलेज पहुंचकर प्रवेश ले सकेंगे। वही सीबीएसई की 12 वीं पूरक परीक्षा के नतीजे भी प्रवेश प्रक्रिया तक आ जाएंगे। इससे कुछ सीटें भरने की उम्मीद की जा रही है। हालांकि पूरी सीटें ना भरना भी चिंता का विषय है।
इनका कहना है
मध्य प्रदेश उच्च शिक्षा विभाग के काफी प्रयास के बाद भी सीटों को भरने में कामयाबी मिलने की संभावना नहीं है। कॉलेजों में सीटें रिक्त होने की वजह छात्र-छात्राओं का विभिन्न प्रतिस्पर्धी परीक्षाओं की तैयारी में व्यस्त होना है। खासकर स्नातक यानि यूजी कक्षाओं में बहुत कम छात्र कॉलेजों में प्रवेश लेने में रूचि नहीं रखते हैं।
-डॉ. शंशाक शेखर, बरकतउल्ला विवि.
इस साल भी भी 1.82 सीटें ही भर पाई है। शेष 8.67 लाख सीटें एक माह में भरने की संभावना भी कम लग रही है। दरअसल 12 वी के बाद अधिकतर छात्र नीट-आईआईटी समेत प्रतिस्पर्धी परीक्षाओं की तैयारी में जुट गए है। इस कारण कॉलेजों में प्रवेश में रूचि नहीं ले रहे हैं। अधिकतर बच्चे एक साल के लिए ड्राप ले लेते हैं। इससे प्रवेश संख्या घट रही है।
डॉ. संजय आर्य, प्रोफेसर इटारसी गल्र्स कॉलेज
