दतिया उपचुनाव की हार की… दिल्ली में जल्द होगी समीक्षा

  • जांच समिति पर विवाद, बीएल संतोष लेंगे फीडबैक

गौरव चौहान
दतिया विधानसभा उपचुनाव में मिली अप्रत्याशित हार ने मध्य प्रदेश भाजपा के भीतर राजनीतिक हलचल तेज कर दी है। हार के कारणों की समीक्षा के लिए गठित जांच समिति को लेकर वरिष्ठ नेताओं के बीच असहमति खुलकर सामने आ गई। हालांकि केंद्रीय नेतृत्व के हस्तक्षेप के बाद विवाद को सार्वजनिक रूप से शांत करा दिया गया, लेकिन अंदरूनी नाराजगी अब भी चर्चा का विषय बनी हुई है। अब पार्टी के राष्ट्रीय संगठन महामंत्री बी.एल. संतोष स्वयं हार के कारणों पर फीडबैक लेकर संगठनात्मक रिपोर्ट तैयार करेंगे।
दतिया उपचुनाव में पराजय के बाद भाजपा नेतृत्व ने तत्काल संगठनात्मक कार्रवाई करते हुए दतिया जिला संगठन सहित कई स्थानीय इकाइयों को भंग कर दिया। चुनाव प्रबंधन से जुड़े वरिष्ठ नेताओं से भी जवाब-तलब किया गया। इसके साथ ही हार की विस्तृत समीक्षा के लिए दो सदस्यीय जांच समिति गठित की गई।
जांच समिति पर वरिष्ठ नेताओं की आपत्ति
जांच समिति के गठन के बाद पार्टी के कुछ वरिष्ठ नेताओं ने इसकी संरचना पर सवाल उठाए। वरिष्ठ भाजपा नेता कैलाश विजयवर्गीय ने सोशल मीडिया पर पोस्ट कर कहा कि ऐसे नेताओं को जांच की जिम्मेदारी दी गई है, जिन्होंने कभी छोटा या बड़ा चुनाव नहीं लड़ा। उनके अनुसार अनुभवहीन लोगों से चुनावी हार की समीक्षा कराना उचित नहीं है। सूत्रों के अनुसार, कुछ अन्य वरिष्ठ नेताओं ने भी समिति के सदस्यों को लेकर संगठन के भीतर आपत्ति दर्ज कराई, लेकिन केंद्रीय नेतृत्व के निर्देश के बाद सभी ने सार्वजनिक रूप से चुप्पी साध ली। बाद में विजयवर्गीय ने भी अपना सोशल मीडिया पोस्ट हटा लिया। बताया जाता है कि पार्टी नेतृत्व ने इस मामले में सार्वजनिक टिप्पणी से बचने की स्पष्ट हिदायत दी।
बीएल संतोष करेंगे समीक्षा
भाजपा के राष्ट्रीय संगठन महामंत्री बी.एल. संतोष जल्द ही दतिया उपचुनाव में हार के कारणों की विस्तृत जानकारी लेंगे। माना जा रहा है कि वे स्थानीय संगठन, चुनाव प्रबंधन, सामाजिक समीकरण और कार्यकर्ताओं की भूमिका सहित विभिन्न पहलुओं पर वरिष्ठ नेताओं और पदाधिकारियों से अलग-अलग फीडबैक लेंगे।
यशोधरा राजे सिंधिया की पोस्ट से भी बढ़ी हलचल
पूर्व मंत्री यशोधरा राजे सिंधिया ने भी उपचुनाव परिणाम के बाद सोशल मीडिया पर पार्टी को आत्ममंथन की सलाह दी थी। उनकी पोस्ट का स्क्रीनशॉट केंद्रीय नेतृत्व तक पहुंचने के बाद संगठन में हलचल बढ़ गई। इसे भी पार्टी के भीतर अनुशासन और सार्वजनिक संदेश के नजरिए से गंभीरता से देखा गया।
आशुतोष तिवारी से मिले डॉ. नरोत्तम मिश्रा
पूर्व गृह मंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा बुधवार को भाजपा प्रत्याशी आशुतोष तिवारी से भोपाल स्थित उनके निवास पर मिले। मुलाकात के बाद उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा कि चुनाव परिणाम के बाद आशुतोष तिवारी ने किसी के खिलाफ कोई नाराजगी व्यक्त नहीं की, जो उनके कार्यकर्ताओं के प्रति सम्मान को दर्शाता है। डॉ. मिश्रा ने अपने और आशुतोष तिवारी के संबंधों को लेकर सोशल मीडिया पर चल रही अटकलों को निराधार बताया। उन्होंने कहा कि दोनों के बीच कभी कोई कटुता नहीं रही और आशुतोष एक समर्पित एवं मेहनती कार्यकर्ता हैं, जिन्हें वे वर्ष 2003 से जानते हैं।
तोमर ने जताया खेद
विधानसभा अध्यक्ष नरेन्द्र सिंह तोमर ने भी अपने एक बयान को लेकर कुशवाह समाज से खेद व्यक्त किया है। समाज के नाम लिखे पत्र में उन्होंने कहा कि उनका किसी समाज का अपमान करने का कोई उद्देश्य नहीं था। यदि उनके किसी शब्द से किसी की भावनाएं आहत हुई हैं तो वे अपने शब्द वापस लेते हैं और इसके लिए खेद प्रकट करते हैं। दतिया उपचुनाव की हार को भाजपा केवल स्थानीय पराजय नहीं, बल्कि संगठनात्मक चुनौती के रूप में देख रही है। जांच समिति की रिपोर्ट, बी.एल. संतोष की समीक्षा और केंद्रीय नेतृत्व की रणनीति के आधार पर संगठन में आगे और बदलाव संभव माने जा रहे हैं। पार्टी का प्रयास है कि आगामी चुनावों से पहले संगठनात्मक कमियों को दूर कर कार्यकर्ताओं का मनोबल मजबूत किया जाए।

Related Articles