एमपी में छोटे शहरों को भी… मिलेगी रिंग रोड की सौगात

रिंग रोड की सौगात
  • रतलाम से रीवा तक ट्रैफिक जाम खत्म करने की तैयारी

भोपाल/बिच्छू डॉट कॉम। मध्य प्रदेश में तेजी से बढ़ते शहरीकरण और वाहनों के दबाव को देखते हुए सरकार अब केवल महानगरों तक सीमित नहीं रहना चाहती। भोपाल, इंदौर, जबलपुर, ग्वालियर और उज्जैन के बाद अब रतलाम, देवास, सागर, सतना, रीवा और कटनी जैसे उभरते शहरों में भी रिंग रोड विकसित करने की योजना बनाई जा रही है। इसका उद्देश्य शहरों के भीतर बढ़ते ट्रैफिक दबाव को कम करना और क्षेत्रीय आर्थिक गतिविधियों को नई गति देना है। लोक निर्माण और शहरी विकास विभाग से जुड़े अधिकारियों के अनुसार इन शहरों में स्थानीय निकायों, नगर निगमों और टाउन एंड कंट्री प्लानिंग (टीएनसीपी) के साथ समन्वय कर व्यापक यातायात योजना तैयार की जाएगी। जहां संभव होगा, वहां पहले से मौजूद बाईपास मार्गों को विकसित कर रिंग रोड का स्वरूप देने पर भी विचार किया जाएगा।
बड़े शहरों में रिंग रोड निर्माण की रफ्तार और समय सीमा
इधर, पांच बड़े शहरों के लिए पूर्व से स्वीकृत रिंग रोड में जबलपुर, ग्वालियर और उज्जैन इन तीनों शहरों के रिंग रोड निर्माण कार्य को आगामी डेढ़ वर्ष में पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। भोपाल के लिए 35.6 किमी लंबे पश्चिमी बायपास का निर्माण कार्य चल रहा है, जिसे आगामी ढाई साल में पूरा करने का लक्ष्य है। इंदौर के लिए डीपीआर बनाई जा रही है। ग्वालियर के लिए पर्यावरणीय स्वीकृति नहीं मिली है।
ट्रैफिक जाम से राहत के साथ उद्योगों को मिलेगा फायदा
विशेषज्ञों का मानना है कि रिंग रोड बनने से भारी वाहनों का दबाव शहरों के भीतर कम होगा, यात्रा समय घटेगा और प्रदूषण में भी कमी आएगी। इसके साथ ही औद्योगिक क्षेत्रों, लॉजिस्टिक्स हब और व्यापारिक गतिविधियों को बेहतर कनेक्टिविटी मिलने से निवेश और रोजगार के अवसर बढ़ेंगे।
तीन शहरों में डेढ़ साल में पूरा होगा निर्माण
राज्य सरकार ने पहले से स्वीकृत जबलपुर, ग्वालियर और उज्जैन रिंग रोड परियोजनाओं को प्राथमिकता देते हुए इनके निर्माण कार्य अगले डेढ़ वर्ष में पूरा करने का लक्ष्य तय किया है। वहीं भोपाल और इंदौर की बड़ी परियोजनाओं पर भी तेजी से काम आगे बढ़ रहाहै।
प्रमुख रिंग रोड परियोजनाओं की स्थिति
भोपाल पश्चिमी बाईपास: 35.6 किलोमीटर लंबी इस परियोजना पर लगभग 4,885 करोड़ रुपये खर्च होंगे। 80 प्रतिशत भूमि अधिग्रहण पूरा हो चुका है और दिसंबर 2028 तक इसे पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।
इंदौर रिंग रोड: करीब 139 किलोमीटर लंबी इस महत्वाकांक्षी परियोजना की अनुमानित लागत 5,900 करोड़ रुपये है। पश्चिमी हिस्से का निर्माण जारी है, जबकि पूर्वी हिस्से की डीपीआर तैयार की जा रही है। परियोजना 2029 तक पूरी होने की संभावना है।
जबलपुर, ग्वालियर और उज्जैन: जबलपुर में 118 किलोमीटर, ग्वालियर में 29 किलोमीटर और उज्जैन में 43 किलोमीटर लंबी रिंग रोड परियोजनाओं पर निर्माण और स्वीकृति संबंधी कार्य तेजी से चल रहे हैं। इन तीनों शहरों की परियोजनाएं दिसंबर 2027 तक पूरी करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। राज्य सरकार का मानना है कि आने वाले वर्षों में रिंग रोड नेटवर्क मध्य प्रदेश के शहरों की यातायात व्यवस्था को नई दिशा देगा और विकास के नए द्वार खोलेगा।

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