
- दावा-एक-एक रुपया विकास पर होगा खर्च
- सडक़-बांध-नहर-बिजली और मेडिकल कॉलेजों पर खर्च होगा पैसा
भोपाल/बिच्छू डॉट कॉम। मध्यप्रदेश सरकार चालू वित्तीय वर्ष में अपनी तय कर्ज सीमा के भीतर करीब 49 हजार करोड़ रूपए तक और कर्ज ले सकती है। सितंबर तक सरकार करीब 37,400 करोड़ रूपए का कर्ज ले चुकी है। सरकार का कहना है कि आगे ली जाने वाली उधारी नियमित राजस्व खर्च, वेतन या लाड़ली बहना जैसी सामाजिक योजनाओं के लिए नहीं, बल्कि सडक़, एक्सप्रेस-वे, सिंचाई, बांध, नहर, बिजली, मेडिकल कॉलेज, स्कूल-कॉलेज और दूसरी बड़ी अधोसंरचना परियोजनाओं पर खर्च की जाएगी।
सरकार ने कर्ज को लेकर उठ रहे सवालों के बीच स्पष्ट किया है कि भारतीय रिजर्व बैंक के माध्यम से लिया जाने वाला कर्ज निर्धारित वित्तीय सीमा के अंदर है। वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए राज्य की कर्ज सीमा करीब 49 हजार करोड़ रुपए तय है। सितंबर तक इसमें से 37,400 करोड़ रुपए लिया जा चुका है। यानी निर्धारित सीमा में करीब 9,600 करोड़ रुपए की गुंजाइश शेष है। सरकार का कहना है कि मार्च 2027 तक विकास परियोजनाओं की जरूरत के मुताबिक ही आगे कर्ज लिया जाएगा।
कर्ज लेकर बनाई जा रही संपत्ति
सरकार ने अपने बचाव में कर्ज को सीधे विकास परियोजनाओं से जोड़ते हुए कहा है कि सडक़, बिजली, सिंचाई और बांध जैसी परियोजनाओं के लिए बड़ी मात्रा में शुरुआती पूंजी की जरूरत होती है। इन परियोजनाओं से प्रदेश में आर्थिक गतिविधियां बढ़ती हैं और आगे चलकर रोजगार, निवेश तथा जीएसडीपी में वृद्धि का आधार तैयार होता है। सरकार के मुताबिक आरबीआई के माध्यम से मिलने वाला कर्ज पूंजीगत व्यय में लगाया जा रहा है। इसका इस्तेमाल सडक़, एक्सप्रेस-वे, सिंचाई परियोजनाओं और बिजली से जुड़े कामों के अलावा स्कूल-कॉलेज, विश्वविद्यालय विस्तार, मेडिकल कॉलेज तथा पुलिस विभाग के निर्माण कार्यों में किया जाएगा। इस वित्तीय वर्ष में सरकार ने एक लाख करोड़ रुपये से अधिक पूंजीगत कार्यों पर खर्च करने का लक्ष्य रखा है। इसमें हजारों करोड़ रुपये की सडक़ परियोजनाओं के साथ केन-बेतवा और पार्वती-कालीसिंध-चंबल जैसी नदी जोड़ो परियोजनाओं से जुड़े बांध और नहर निर्माण भी शामिल हैं।
वेतन और लाड़ली बहना के लिए अलग इंतजाम
कर्ज पर उठ रहे सबसे बड़े सवालों में यह भी शामिल है कि क्या सरकार अपनी नियमित देनदारियों और सामाजिक योजनाओं का खर्च भी उधारी से पूरा कर रही है। सरकार ने इससे इनकार किया है। सरकार का कहना है कि वेतन, पेंशन और लाड़ली बहना जैसी योजनाओं के नियमित राजस्व खर्च के लिए अलग से कर्ज नहीं लिया जा रहा। इन खर्चों की व्यवस्था राज्य के अपने राजस्व संसाधनों और बजट प्रावधानों से की जा रही है। सरकार ने यह भी दावा किया है कि पूर्व वर्षों में लिए गए कर्ज का समय पर पुनर्भुगतान किया जा रहा है और प्रदेश ने किसी कर्ज में डिफॉल्ट नहीं किया है।
मार्च तक जरूरत के हिसाब से और उधारी
राज्य सरकार के मुताबिक वित्तीय वर्ष 2026-27 में कर्ज लेने की सीमा केंद्र सरकार और वित्तीय प्रबंधन से जुड़े प्रावधानों के तहत तय है। राज्य इस सीमा से बाहर जाकर कर्ज नहीं लेगा। मार्च 2027 तक यदि विकास परियोजनाओं के लिए अतिरिक्त राशि की आवश्यकता होती है तो शेष उपलब्ध सीमा के भीतर आरबीआई के जरिए कर्ज लिया जाएगा। इसके लिए प्रतिस्पर्धी बोली की प्रक्रिया अपनाई जाती है। सरकार का दावा है कि इससे बाजार से अनुकूल ब्याज दर पर राशि जुटाने की कोशिश होती है।
जीएसडीपी बढ़ेगी तो कर्ज लेने की क्षमता भी बढ़ेगी
सरकार ने कर्ज के पक्ष में जीएसडीपी का तर्क भी दिया है। संविधान के अनुच्छेद 293(3) के तहत राज्य सरकार को कर्ज लेने के लिए केंद्र की सहमति की आवश्यकता होती है। सामान्य तौर पर राज्यों के लिए उधारी की सीमा जीएसडीपी के निर्धारित प्रतिशत के आसपास तय होती है। सरकार का तर्क है कि यदि प्रदेश की अर्थव्यवस्था का आकार बढ़ता है तो निर्धारित सीमा के भीतर कर्ज लेने की क्षमता भी बढ़ती है। सडक़, बिजली, सिंचाई और औद्योगिक अधोसंरचना पर खर्च से आर्थिक गतिविधियां बढ़ेंगी, जिससे जीएसडीपी में वृद्धि होगी और भविष्य की विकास परियोजनाओं के लिए वित्तीय क्षमता तैयार होगी।
इस साल किन कामों पर खर्च होगा पैसा
सडक़ और एक्सप्रेस-वे परियोजनाएं
केन-बेतवा एवं पार्वती-कालीसिंध-चंबल परियोजनाएं
बांध और नहर निर्माण
बिजली से जुड़ी अधोसंरचना
स्कूल-कॉलेज और विश्वविद्यालय विस्तार
मेडिकल कॉलेज निर्माण
पुलिस विभाग की अधोसंरचना
अन्य बड़े पूंजीगत निर्माण कार्य
