
- 1027 पदों पर कार्यवाहक तैनात, 183 निरीक्षक संभाल रहे डीएसपी की जिम्मेदारी
भोपाल/बिच्छू डॉट कॉम। मध्य प्रदेश पुलिस में थानों की कमान संभालने वाले अफसरों की वर्दी तो इंस्पेक्टर (निरीक्षक) वाली है, लेकिन हकीकत में वे मूल रूप से अभी भी सब-इंस्पेक्टर (उप-निरीक्षक) ही हैं। प्रदेश के पुलिस थानों में कार्यवाहकों की यह फौज सालों से प्रमोशन का इंतजार कर रही है। प्रदेश में इंस्पेक्टर के पद 100 फीसदी पदोन्नति के हैं, जो सब-इंस्पेक्टरों के प्रमोशन से भरे जाते हैं। फिलहाल सालों से प्रमोशन का मामला कोर्ट में लंबित होने की वजह से पुलिस ने 2021 से 2024 के बीच कार्यवाहक की व्यवस्था लागू की थी, जो दो साल से बंद हो गई थी। हालांकि, इस साल कोर्ट की अनुमति से फिर कार्यवाहक व्यवस्था को लागू करने की तैयारी है। इंस्पेक्टरों के पद पर कार्यवाहकों की तैनाती के लिए सरकार ने कमेटी भी बनाई है, लेकिन उसका निर्णय आने में लंबा समय लग सकता है। ऐसे में प्रदेश की कई इकाइयों में इंस्पेक्टर के पद खाली पड़े हुए हैं।
708 में से 183 को बनाया कार्यवाहक डीएसपी: 1 जनवरी 2026 की स्थिति के अनुसार, एमपी पुलिस के इंस्पेक्टर कैडर में मौजूद 708 अफसरों में से भी 183 को कार्यवाहक डीएसपी बनाकर दफ्तरों में भेज दिया गया है, जिससे थानों पर दबाव और बढ़ गया है। पीएचक्यू भी अब इस बात को मान रहा है कि नए थाने खुलने और काम बढ़ने के कारण प्रदेश को जल्द ही 2 हजार इंस्पेक्टरों की दरकार होगी। फिलहाल स्थिति यह है कि प्रदेश के 1100 थानों में से लगभग 700 तो कार्यवाहकों के भरोसे ही चल रहे हैं। इस मामले के कोर्ट में लंबित होने के कारण पुलिस के आला अधिकारी भी इस पर चुप्पी साधे हुए हैं, लेकिन वे दबी जुबान में स्वीकार रहे हैं कि जब तक नियमित पदोन्नति नहीं होती, तब तक प्रदेश की पुलिसिंग का यह कार्यवाहक मॉडल ही थानों को चलाएगा।
ये है आंकड़ों की असल हकीकत
आंकड़ों की हकीकत देखें तो राज्य में इंस्पेक्टर के कुल 1697 पद मंजूर हैं। इनमें से नियमित इंस्पेक्टर के तौर पर केवल 525 अफसर ही पदस्थ हैं। यानी इंस्पेक्टर के कैडर में पदों की भारी कमी है। इस कमी को पूरा करने के लिए विभाग ने सब-इंस्पेक्टरों को कार्यवाहक इंस्पेक्टर का दर्जा देकर थानों और अन्य जरूरी इकाइयों में तैनात किया है। ऐसे अफसरों की संख्या 1027 है। ऐसे में 1545 पद अब भी खाली पड़े हुए हैं। यह स्थिति पुलिस के कामकाज के लिए एक बड़ी चुनौती है। कार्यवाहक इंस्पेक्टर मूल रूप से सब-इंस्पेक्टर हैं, जिन्होंने इंस्पेक्टर बनने के लिए तय 15 साल की सर्विस तो पूरी कर ली है, लेकिन उन्हें कार्यवाहक का पद थमा दिया गया है। ये वर्दी तो इंस्पेक्टर वाली पहनते हैं और थाने के प्रभारी की जिम्मेदारी भी निभाते हैं, लेकिन वेतन और सुविधाएं इन्हें सब-इंस्पेक्टर के पद की ही मिलती हैं।
