मप्र में हाईराइज की खुलेगी राह

  • 5 मंजिल की बिल्डिंग हो सकती है न्यू नॉर्मल
  • गौरव चौहान
हाईराइज

मध्यप्रदेश में करीब 14 साल पुराने भूमि विकास नियम अब बड़े बदलाव के साथ नए रूप में सामने आने वाले हैं। प्रस्तावित भूमि विकास नियम-2026 में हाईराइज निर्माण को बढ़ावा देने के साथ शहरों में जमीन के बेहतर उपयोग का रास्ता खोलने की तैयारी है। नए नियम लागू होने के बाद 15 मंजिल तक की इमारतें कई क्षेत्रों में सामान्य दृश्य बन सकती हैं। नए नियमों के ड्राफ्ट में बिल्डिंग की अधिकतम ऊंचाई, फ्लोर एरिया रेशो (एफएआर), प्लॉट पर निर्माण की सीमा और मिश्रित भूमि उपयोग से जुड़े कई प्रावधानों में बदलाव प्रस्तावित हैं। सबसे महत्वपूर्ण बदलावों में अधिकतम एफएआर को 3 से बढ़ाकर 4 करना और 30 मीटर की मौजूदा ऊंचाई सीमा को बढ़ाकर 45 से 60 मीटर तक करने का प्रस्ताव शामिल है। हालांकि, इसका अर्थ यह नहीं होगा कि हर प्लॉट पर सीधे 15 या 20 मंजिल की इमारत बनाई जा सकेगी। वास्तविक ऊंचाई भवन की डिजाइन, सडक़ की चौड़ाई, प्लॉट का आकार, फायर सेफ्टी, पार्किंग और अन्य लागू नियमों पर निर्भर करेगी।
वर्तमान व्यवस्था में 30 मीटर से ऊंची इमारतों की फाइल विशेष प्रक्रिया के तहत नगर निगम कमिश्नर की कमेटी के पास जाती है। प्रस्तावित नियमों में इस सीमा को बढ़ाकर 45 से 60 मीटर तक करने का विचार है। यदि सामान्य फ्लोर की ऊंचाई लगभग 3 मीटर मानी जाए तो 45 मीटर की इमारत करीब 15 मंजिल और 60 मीटर की इमारत करीब 20 मंजिल तक हो सकती है। हालांकि वास्तविक मंजिलों की संख्या भवन की संरचना और अन्य तकनीकी प्रावधानों पर निर्भर करेगी। इस बदलाव का सबसे बड़ा असर उन शहरों में देखने को मिल सकता है, जहां जमीन की कीमत बढऩे के साथ क्षैतिज विस्तार की बजाय वर्टिकल डेवलपमेंट की जरूरत महसूस की जा रही है।
एफएआर 3 से 4 होगा, एक ही जमीन पर ज्यादा निर्माण
प्रस्तावित नियमों में अधिकतम एफएआर 3 से बढ़ाकर 4 करने की तैयारी है। इसमें 2 बेस एफएआर और 2 प्रीमियम एफएआर रखने का प्रस्ताव है। बेस एफएआर निर्धारित सीमा तक सामान्य रूप से उपलब्ध होगा, जबकि अतिरिक्त प्रीमियम एफएआर के लिए बिल्डर या भू-स्वामी को कलेक्टर गाइडलाइन के आधार पर बिल्टअप एरिया के लिए निर्धारित राशि का भुगतान करना होगा। इससे एक ही प्लॉट पर पहले की तुलना में अधिक निर्माण क्षेत्र उपलब्ध हो सकेगा। सरकार के स्तर पर इसका उद्देश्य जमीन का बेहतर उपयोग और बढ़ती आबादी के अनुरूप शहरी विकास को बढ़ावा देना माना जा रहा है।
फ्लैट एफएआर से खत्म होगी अतिरिक्त एफएआर की गुंजाइश
नए नियमों में फ्लैट एफएआर’ का नया कॉन्सेप्ट शामिल किया जा रहा है। मौजूदा व्यवस्था में एफएआर की अनुमति लेने के बाद कॉरिडोर, लिफ्ट और कॉमन स्पेस जैसी जगहों को लेकर अतिरिक्त छूट के माध्यम से एफएआर बढ़ाने की गुंजाइश रहती है। प्रस्तावित फ्लैट एफएआर व्यवस्था में यह अतिरिक्त छूट खत्म करने की तैयारी है। जितना ग्राउंड कवरेज होगा, उसी के आधार पर एफएआर की गणना की जाएगी और निर्धारित एफएआर के बाद उसे अलग-अलग मदों के माध्यम से बढ़ाने की गुंजाइश नहीं होगी। इससे बिल्डिंग प्लान की गणना और अनुमति प्रक्रिया ज्यादा स्पष्ट होने की उम्मीद है।
एमओएस छोडऩे के बाद बची जमीन पर ज्यादा निर्माण
वर्तमान नियमों में मार्जिनल ओपन स्पेस यानी एमओएस छोडऩे के बाद भी प्लॉट पर निर्माण की एक अतिरिक्त सीमा लागू होती है। आवासीय क्षेत्र में यह करीब 30 प्रतिशत, व्यावसायिक में 40 प्रतिशत, औद्योगिक में 50 प्रतिशत और व्यक्तिगत प्लॉट में 60 प्रतिशत तक बताई गई है। नए नियमों में एमओएस छोडऩे के बाद बची जमीन पर निर्माण की यह अतिरिक्त सीमा हटाने का प्रस्ताव है। यानी आवश्यक खुली जगह छोडऩे के बाद शेष क्षेत्र का ज्यादा प्रभावी उपयोग किया जा सकेगा। यह बदलाव खास तौर पर छोटे और मध्यम आकार के प्लॉट पर निर्माण करने वालों के लिए महत्वपूर्ण हो सकता है।
मास्टर प्लान तय करेगा कहां कितना निर्माण होगा
नए नियमों की एक अहम विशेषता यह होगी कि शहर के विकास और निर्माण से जुड़े अधिकांश प्रावधानों को भूमि विकास नियमों के दायरे में लाया जाएगा। वहीं, किसी शहर या क्षेत्र में किस तरह के निर्माण की अनुमति होगी और कहां प्रतिबंध रहेंगे, इसका निर्धारण मुख्य रूप से मास्टर प्लान के जरिए होगा। इससे भूमि विकास नियम और मास्टर प्लान की भूमिकाएं अधिक स्पष्ट होने की उम्मीद है। मिक्स्ड लैंड यूज को भी नए नियमों में शामिल करने का प्रस्ताव है। इससे कुछ क्षेत्रों में आवासीय और व्यावसायिक गतिविधियों को एक साथ विकसित करने का रास्ता खुल सकता है।
ग्रीन टीडीआर से पर्यावरण संरक्षण को प्रोत्साहन
नए नियमों में ग्रीन टीडीआर यानी ट्रांसफरेबल डेवलपमेंट राइट्स को भी शामिल किया जाएगा। इसके तहत पर्यावरण या जलस्रोतों की रक्षा करने वाले भू-स्वामियों को अतिरिक्त एफएआर का लाभ देने का प्रावधान हो सकता है। इसका उद्देश्य पर्यावरण संरक्षण को निर्माण के अधिकारों से जोडऩा है। यानी जो भू-स्वामी पर्यावरणीय संसाधनों के संरक्षण में योगदान देंगे, उन्हें बदले में अतिरिक्त विकास अधिकार दिए जा सकेंगे। महाराष्ट्र में भी पर्यावरण संरक्षण और मैन्ग्रोव क्षेत्र को बचाने के लिए ग्रीन टीडीआर जैसे प्रावधानों का उपयोग किया गया है। मध्यप्रदेश में इसका दायरा स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार तय किया जा सकता है।
मेट्रो, रेलवे और बस स्टैंड के आसपास बढ़ेगा घनत्व
ट्रांजिट ओरिएंटेड डेवलपमेंट (टीओडी) भी प्रस्तावित नियमों का महत्वपूर्ण हिस्सा है। इसके तहत मेट्रो, रेलवे स्टेशन और बस स्टैंड जैसे सार्वजनिक परिवहन केंद्रों के आसपास ज्यादा ऊंची, सघन और मिश्रित उपयोग वाली इमारतों के निर्माण को प्रोत्साहित किया जा सकता है। इन क्षेत्रों में अतिरिक्त एफएआर देने का उद्देश्य लोगों को रोजगार, आवास और दूसरी सुविधाएं सार्वजनिक परिवहन के नजदीक उपलब्ध कराना है। इससे निजी वाहनों पर निर्भरता कम करने और सार्वजनिक परिवहन को बढ़ावा देने की कोशिश होगी।
110 सेक्शन को किया जा रहा सरल
वर्ष 2012 में लागू भूमि विकास नियमों में करीब 110 सेक्शन हैं। प्रस्तावित नए नियमों में इन्हें अधिक सरल और स्पष्ट भाषा में तैयार किया जा रहा है। करीब 200 पेज के मौजूदा नियमों का अध्ययन कर नया फ्रेमवर्क तैयार किया गया है। कमलनाथ सरकार के कार्यकाल में भी नए भूमि विकास नियम लागू करने का प्रयास हुआ था, लेकिन यह प्रक्रिया पूरी नहीं हो सकी थी। इस बार सरकार पुराने प्रावधानों की समीक्षा कर व्यापक बदलाव के साथ नया नियम तैयार कर रही है।
6 अगस्त की बैठक टली, अंतिम रूप देने की प्रक्रिया जारी
नए नियमों का ड्राफ्ट तैयार हो चुका है। इसे अंतिम रूप देने के लिए 6 अगस्त को बैठक प्रस्तावित थी, लेकिन फिलहाल यह बैठक टल गई है। बैठक में विभिन्न प्रावधानों पर अंतिम चर्चा के बाद ड्राफ्ट को आगे की प्रक्रिया में भेजा जा सकता है। अगर प्रस्तावित बदलाव लागू होते हैं तो मध्यप्रदेश के शहरों में निर्माण का मौजूदा पैटर्न बदल सकता है। हाईराइज इमारतों, ज्यादा एफएआर, मिक्स्ड लैंड यूज और सार्वजनिक परिवहन आधारित विकास को बढ़ावा मिलने से शहरों का विस्तार अधिक ऊध्र्वाधर होने की संभावना है। हालांकि, हाईराइज निर्माण बढऩे के साथ ट्रैफिक, पार्किंग, पानी, सीवेज, फायर सेफ्टी और सार्वजनिक सुविधाओं पर अतिरिक्त दबाव भी आएगा। इसलिए नए नियमों का वास्तविक प्रभाव इस बात पर निर्भर करेगा कि मास्टर प्लान और अन्य तकनीकी सुरक्षा मानकों के साथ इन प्रावधानों को किस तरह लागू किया जाता है।

Related Articles