10 महीने से अटकी भर्ती ने रोकी नए आयुर्वेद कॉलेजों की रफ्तार

आयुर्वेद कॉलेजों
  • 1570 पदों पर नियुक्ति का इंतजार, सेवा शर्तें और आउटसोर्सिंग बनी बड़ी बाधा; पांच नए मेडिकल कॉलेजों के संचालन पर असर

गौरव चौहान/भोपाल/बिच्छू डॉट कॉम। मध्य प्रदेश सरकार प्रदेश में आयुष सेवाओं को मजबूत करने और आयुर्वेद चिकित्सा शिक्षा का दायरा बढ़ाने के लिए पांच नए सरकारी आयुर्वेद चिकित्सा महाविद्यालय और वेलनेस सेंटर स्थापित कर रही है। इन संस्थानों के निर्माण पर करोड़ों रुपये खर्च किए जा रहे हैं, लेकिन इनका संचालन शुरू होने से पहले ही सबसे बड़ी चुनौती मानव संसाधन की कमी बन गई है। करीब दस महीने पहले स्वीकृत 1570 पदों पर भर्ती प्रक्रिया अब तक पूरी नहीं हो सकी, जिससे नए कॉलेजों को समय पर शुरू करने की तैयारी प्रभावित हो रही है।
भर्ती प्रक्रिया में देरी के पीछे प्रशासनिक और वित्तीय स्तर पर दो बड़े कारण सामने आए हैं। पहला, कई ऐसे पद हैं जिनका सृजन पहली बार किया गया है और उनके लिए अब तक सेवा शर्तें तथा वेतनमान तय नहीं थे। दूसरा, चतुर्थ श्रेणी के पदों को नियमित भर्ती के बजाय आउटसोर्स के माध्यम से भरने के फैसले के कारण भर्ती प्रस्ताव में बार-बार संशोधन करना पड़ा। दोनों कारणों से फाइलें विभागों के बीच घूमती रहीं और भर्ती प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ सकी।
कैबिनेट से मंजूरी के बाद भी नहीं बढ़ सकी प्रक्रिया
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में 19 अगस्त 2025 को हुई कैबिनेट बैठक में पांच नए सरकारी आयुर्वेद चिकित्सा महाविद्यालयों और वेलनेस सेंटरों के संचालन के लिए 1570 पदों को मंजूरी दी गई थी। इनमें 715 नियमित पद और 855 आउटसोर्स पद शामिल हैं। स्वीकृत पदों में असिस्टेंट प्रोफेसर, रीडर, चिकित्सालय स्टाफ, कॉलेज स्टाफ, प्रशासनिक अधिकारी, मानव संसाधन विकास सेल अधिकारी, सिम्यूलेशन अधिकारी, सूचना प्रौद्योगिकी अधिकारी सहित कई तकनीकी एवं शैक्षणिक पद शामिल हैं। सरकार का उद्देश्य था कि कॉलेज भवन तैयार होने के साथ ही स्टाफ की नियुक्ति कर संस्थानों का संचालन शुरू कर दिया जाए, लेकिन भर्ती प्रक्रिया तय समय से काफी पीछे चल रही है।
पहली बार बने पदों ने बढ़ाई मुश्किल
भर्ती में सबसे बड़ी बाधा उन पदों को लेकर आई जो पहली बार आयुर्वेद महाविद्यालयों के लिए सृजित किए गए हैं। इनमें मानव संसाधन विकास सेल अधिकारी, सिम्यूलेशन अधिकारी और सूचना प्रौद्योगिकी अधिकारी जैसे पद शामिल हैं। वित्त विभाग ने प्रस्ताव की जांच के दौरान पाया कि इन पदों के लिए न तो पहले से कोई सेवा नियम मौजूद हैं और न ही उनका वेतनमान निर्धारित है। इतना ही नहीं, राज्य सरकार के किसी अन्य विभाग में भी इस प्रकार के पद पहले से अस्तित्व में नहीं हैं। इसके चलते वित्त विभाग ने विस्तृत जानकारी मांगते हुए प्रस्ताव आयुष विभाग को वापस भेज दिया। इसके बाद आयुष विभाग ने संशोधित प्रस्ताव तैयार कर वित्त विभाग को भेजा। विभाग ने स्पष्ट किया कि ये पद आयुष मंत्रालय के दिशा-निर्देशों के अनुरूप हैं और देश के कई राज्यों के सरकारी आयुर्वेद महाविद्यालयों में पहले से कार्यरत हैं। संशोधित प्रस्ताव में सेवा शर्तों, वेतनमान और भर्ती प्रक्रिया का पूरा विवरण भी शामिल किया गया है। फिलहाल वित्त विभाग इस प्रस्ताव का परीक्षण कर रहा है।
आउटसोर्सिंग नीति से भी बदली पूरी प्रक्रिया
भर्ती में देरी का दूसरा बड़ा कारण राज्य सरकार की नई नीति है। पहले चतुर्थ श्रेणी के कर्मचारियों की नियमित भर्ती प्रस्तावित थी, लेकिन बाद में वित्त विभाग ने निर्णय लिया कि इन सभी पदों को आउटसोर्स एजेंसियों के माध्यम से भरा जाएगा। इस बदलाव के कारण भर्ती प्रस्ताव में कई तकनीकी संशोधन करने पड़े। वित्त विभाग ने इस संबंध में भी आयुष विभाग से अतिरिक्त जानकारी मांगी, जिसके बाद नया प्रस्ताव तैयार किया गया। अधिकारियों का कहना है कि इन औपचारिकताओं के पूरा होने के बाद ही भर्ती प्रक्रिया अंतिम चरण में पहुंचेगी।
पांच जिलों में खुलेंगे नए आयुर्वेद कॉलेज
राष्ट्रीय आयुष मिशन के तहत प्रदेश के सागर, नर्मदापुरम, मुरैना, बालाघाट और शहडोल में नए सरकारी आयुर्वेद चिकित्सा महाविद्यालय स्थापित किए जा रहे हैं। प्रत्येक महाविद्यालय में 100 बिस्तरों वाला आयुर्वेद चिकित्सालय, छात्र एवं छात्राओं के लिए 100-100 सीट क्षमता वाले छात्रावास, आवासीय परिसर, फार्मेसी भवन और  आधुनिक शैक्षणिक एवं प्रयोगशाला सुविधाओं का निर्माण भारतीय चिकित्सा पद्धति के निर्धारित मानकों के अनुरूप किया जाएगा।
350 करोड़ रुपये की परियोजना
राष्ट्रीय आयुष मिशन के तहत प्रत्येक महाविद्यालय के निर्माण पर 70 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। इस प्रकार पांचों संस्थानों के लिए कुल 350 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। परियोजना की लागत केंद्र और राज्य सरकार के बीच 60:40 के अनुपात में साझा की जाएगी।
संचालन पर पड़ सकता है असर
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि जल्द भर्ती पूरी नहीं हुई तो भवन निर्माण पूरा होने के बावजूद कॉलेजों में शैक्षणिक गतिविधियां शुरू करने में देरी हो सकती है। मेडिकल शिक्षा में नियामक संस्थाओं के मानकों के अनुसार पर्याप्त संख्या में फैकल्टी और तकनीकी स्टाफ की उपलब्धता आवश्यक होती है। ऐसे में भर्ती में हर महीने की देरी का असर नए सत्र की शुरुआत पर पड़ सकता है।
विभाग का दावा- जल्द पूरी होगी प्रक्रिया
आयुष विभाग के प्रमुख सचिव शोभित जैन का कहना है कि नए आयुर्वेद कॉलेजों और वेलनेस सेंटरों के लिए कैबिनेट से स्वीकृत पदों पर भर्ती की प्रक्रिया जारी है। उन्होंने बताया कि वित्त विभाग द्वारा मांगी गई सभी आवश्यक जानकारियां उपलब्ध करा दी गई हैं। कुछ पद केवल आयुर्वेद चिकित्सा महाविद्यालयों के लिए ही प्रस्तावित हैं, इसलिए उनकी सेवा शर्तों का अलग से निर्धारण किया जा रहा है। विभाग का दावा है कि सभी औपचारिकताएं पूरी होते ही भर्ती प्रक्रिया में तेजी लाई जाएगी और नए कॉलेजों का संचालन जल्द शुरू किया जाएगा।

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