
- पीएमश्री महाविद्यालयों में शिक्षकों के अभी भी बीस प्रतिशत पद रिक्त
भोपाल/बिच्छू डॉट कॉम। मध्यप्रदेश सरकार ने एक जुलाई 2024 से सभी जिलों में एमपी में पीएमश्री कॉलेज तो खोल दिए, लेकिन कई पीएम श्री कॉलेजों में विद्यार्थियों को पढ़ाने के लिए दूसरे कॉलेजों से शिक्षक लाकर पढ़ाई करनी पड़ रही है। विसंगति ये है कि इससे पीएमश्री कॉलेजों में पढ़ाई तो सुव्यवस्थित हुई है, लेकिन दूसरे कॉलेजों की पढ़ाई पिछड़ रही है। प्रत्येक पीएमश्री कॉलेजों में औसतन लगभग 20 प्रतिशत पद व्याख्याताओं के रिक्त है। इसी तरह पीएम कॉलेजों में आईटी, भौतिकी रसायन के लैब में संसाधनों की भारी कमी है। आधिकारिक जानकारी के अनुसार राज्य के कॉलेजों में वर्तमान में 2232 प्रोफेसर व्याख्याताओं और 500 से अधिक गैर शैक्षणिक स्टॉफ की कमी है। राजधानी के सबसे पुराने हमीदिया कॉलेज की बात करें, तो पहले ये कॉलेज कला-वाणिज्य का था। 2024 में पीएमश्री घोषित होने के यहां शासन ने साइंस विषय को मंजूरी दे दी। इसमें वर्तमान में करीबन 1000 विद्यार्थी है। विडंबना की बात ये हैं कि दो साल बाद भी इस कॉलेज को बुनियादी सुविधाएं नहीं मिल पाई है, जबकि यहां 5 हजार से अधिक विद्यार्थी है। कॉलेज प्रबंधन के अनुसार इस कॉलेज के पास खुद का भवन नहीं है। रियासत काल के पुराने जर्जर भवन में कॉलेज संचालित है। अकादमी स्टॉफ में से लगभग 65 प्राध्यापक, 25 अतिथि और 5 करीबन दूसरे कॉलेजों के प्राध्यापक पदस्थ कर दिए गए हैं। एक छोटे से कमरे में आईटी, भौतिकी – रसायन के लैब है, जिसमें एक बार में 60 विद्यार्थी ही आ पाते हैं। इस वजह से लैब को अलग- अलग समय पर संचालित करना पड़ता है।
मुरैना कॉलेज से 22 शैक्षणिक स्टॉफ का इंतजार
मुरैना पीएम कॉलेज ऑफ एक्सीलेंस को दो साल से शैक्षणिक स्टॉफ का इंतजार है। प्राचार्य ऋषिपाल सिंह ने बताया कि यहां 26 शैक्षणिक और 5 गैर शैक्षणिक स्टॉफ की स्वीकृत तो है, लेकिन अभी तक शासन स्तर से भर्ती नहीं हुई है। अतिथि शिक्षकों के भरोसे विद्यार्थियों को पढ़ा रहे हैं। आधुनिक लैब तो दूर, जो वर्तमान लैब है, इसमें स्टॉफ नहीं है। विद्यार्थी यू-ट्यूब से प्रायोगिक कार्य कर रहे हैं। सुविधाओं के अभाव में यहां 1400 सीटों में से अभी भी 300 सीटें खाली पड़ी है।
विषय विशेषज्ञ शिक्षकों की सबसे अधिक कमी
पीएमश्री कॉलेजों में सबसे बड़ी कमी विशेषज्ञ शिक्षकों की है। 2024 में पीएमश्री घोषित होने के बाद नयी नियुक्तियां अभी तक नहीं हो सकी हैं। वही 35 फीसदी पदों पर अतिथि शिक्षक कार्यरत है। केवल 45 फीसदी पदों पर नियमित व्याख्याता है। सबसे अधिक कमी विषय- विशेषज्ञ व्याख्याताओं की कमी है। कुल मिलाकर अतिथि शिक्षकों के भरोसे सभी पीएमश्री कॉलेज चल रहे हैं।
