- कर्मचारियों की कमी दूर करने होगा काडर रिव्यू
भोपाल/बिच्छू डॉट कॉम। प्रदेश में वाहनों की संख्या लगातार बढ़ रही है, लेकिन उनकी निगरानी और प्रबंधन की जिम्मेदारी संभालने वाला परिवहन विभाग खुद कर्मचारियों और अधिकारियों की भारी कमी से जूझ रहा है। हालत यह है कि विभाग के आधे से ज्यादा पद खाली पड़े हैं और प्रदेश के अधिकांश जिलों में परिवहन व्यवस्था प्रभारी अधिकारियों के भरोसे संचालित हो रही है। अब करीब 15 साल बाद विभाग को काडर रिव्यू की याद आई है। परिवहन आयुक्त कार्यालय ने विभागीय ढांचे को मजबूत करने के लिए काडर रिव्यू का प्रस्ताव तैयार कर लिया है, जिसे जल्द वित्त विभाग और फिर कैबिनेट की मंजूरी के लिए भेजा जाएगा।
यदि प्रस्ताव को मंजूरी मिलती है तो विभाग में लगभग 339 नए पद सृजित होंगे और स्वीकृत पदों की संख्या 1696 से बढकऱ 2000 से अधिक हो जाएगी। इससे लंबे समय से कर्मचारियों की कमी से जूझ रहे विभाग को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है।
वाहनों की संख्या दोगुनी, अमला आधा रह गया
प्रदेश में पिछले डेढ़ दशक में वाहनों की संख्या तेजी से बढ़ी है। वर्ष 2011 के आसपास जहां वाहनों की संख्या एक करोड़ के आसपास थी, वहीं अब यह बढकऱ 2.42 करोड़ से अधिक हो चुकी है। इसके बावजूद परिवहन विभाग में नए पदों का सृजन नहीं हुआ। विभाग का दावा है कि उसने 58 सेवाओं को ऑनलाइन कर दिया है और इन्हें बढ़ाकर 100 तक ले जाने की तैयारी है, लेकिन दूसरी ओर इन सेवाओं को संचालित करने वाला अमला लगातार घटता गया। वर्तमान में विभाग में स्वीकृत 1696 पदों में से 874 पद रिक्त हैं। यानी 51 प्रतिशत से अधिक पद खाली हैं और पूरा विभाग केवल 822 अधिकारियों एवं कर्मचारियों के भरोसे चल रहा है।
38 जिलों में प्रभारी आरटीओ के भरोसे व्यवस्था
कर्मचारियों की कमी का सबसे बड़ा असर मैदानी कामकाज पर दिखाई दे रहा है। प्रदेश के 38 जिलों में नियमित क्षेत्रीय परिवहन अधिकारी (आरटीओ) नहीं हैं और व्यवस्था प्रभारी अधिकारियों के भरोसे चल रही है। विभागीय आंकड़ों के अनुसार क्षेत्रीय एवं अतिरिक्त परिवहन अधिकारी के सभी 38 स्वीकृत पद रिक्त हैं। इससे लाइसेंस, वाहन पंजीयन, परमिट, प्रवर्तन कार्रवाई और प्रशासनिक निर्णय प्रभावित हो रहे हैं।
तकनीकी अमले की भी भारी कमी
परिवहन विभाग में तकनीकी जांच से जुड़े पदों की स्थिति भी चिंताजनक है। मोटरयान परिवहन उप निरीक्षक (एमवीएसआई) के सभी 35 पद खाली हैं। परिवहन निरीक्षक (गैर तकनीकी) के 70 स्वीकृत पदों में केवल 5 अधिकारी कार्यरत हैं, जबकि 65 पद रिक्त हैं। सहायक क्षेत्रीय परिवहन अधिकारी (एआरटीओ) के 64 में से 23 पद खाली हैं। प्रधान आरक्षक एवं वाहन चालक के 120 पदों में से 94 रिक्त हैं। यानी प्रवर्तन, जांच और सडक़ सुरक्षा से जुड़े अधिकांश कार्य सीमित अमले के सहारे संचालित हो रहे हैं।
कार्यालयीन कामकाज भी प्रभावित
सिर्फ मैदानी स्तर ही नहीं, विभागीय कार्यालयों में भी कर्मचारियों की भारी कमी है। सहायक वर्ग-2 के 168 स्वीकृत पदों में से 123 पद खाली हैं, जबकि सहायक वर्ग-3 के 285 पदों में से 78 रिक्त हैं। इससे फाइलों के निपटारे, दस्तावेजी प्रक्रिया, राजस्व संबंधी कार्य और आम नागरिकों के आवेदन प्रभावित हो रहे हैं।
20 फीसदी पद बढ़ाने का प्रस्ताव
परिवहन विभाग ने काडर रिव्यू के तहत वर्तमान पद संरचना में लगभग 20 प्रतिशत वृद्धि का सुझाव दिया है। प्रस्ताव के अनुसार 339 नए पद सृजित किए जाएंगे। विभाग का तर्क है कि वर्तमान संसाधनों के साथ 2.42 करोड़ वाहनों का प्रभावी प्रबंधन, सडक़ सुरक्षा अभियान, राजस्व वसूली और प्रवर्तन कार्य करना बेहद कठिन हो गया है। अधिकारियों का मानना है कि नए पदों के सृजन से विभागीय कार्यक्षमता बढ़ेगी और जिलों में लंबित मामलों के निपटारे में तेजी आएगी।
आम जनता भी भुगत रही परेशानी
कर्मचारियों और अधिकारियों की कमी का सीधा असर आम लोगों पर पड़ रहा है। वाहन पंजीयन, फिटनेस, परमिट, लाइसेंस और अन्य परिवहन सेवाओं के लिए लोगों को कई बार अतिरिक्त इंतजार करना पड़ता है। वहीं प्रवर्तन कार्रवाई और नियमित वाहन जांच भी प्रभावित हो रही है। राजधानी भोपाल सहित प्रदेश के कई जिलों में परिवहन कार्यालय सीमित स्टाफ के कारण दबाव में काम कर रहे हैं।
मंजूरी के बाद भी लंबा इंतजार संभव
हालांकि विभाग ने काडर रिव्यू का प्रस्ताव तैयार कर लिया है, लेकिन इसके लागू होने में अभी समय लग सकता है। पहले वित्त विभाग इसकी समीक्षा करेगा, फिर मामला कैबिनेट के समक्ष जाएगा। इसके बाद पद सृजन, भर्ती और पदस्थापना की प्रक्रिया पूरी होगी। ऐसे में परिवहन विभाग को राहत मिलने में अभी समय लग सकता है। लेकिन 15 साल बाद काडर रिव्यू की पहल ने यह जरूर संकेत दिया है कि विभाग अब कर्मचारियों की कमी को लेकर गंभीर दिखाई दे रहा है। यदि प्रस्ताव को शीघ्र मंजूरी मिलती है तो प्रदेश की परिवहन व्यवस्था को नई गति मिल सकती है।
