
भोपाल/बिच्छू डॉट कॉम। छह अगस्त 2016 में तत्कालीन मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की पहल पर आनंद विभाग बना था। यह किसी राज्य में बना पहला विभाग बताया गया। विभाग के गठन के बाद से यह विभाग कभी चर्चा में नहीं आया। पिछले दिनों जब मुख्यमंत्री डा. मोहन यादव ने राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) लखन पटेल से पशुपालन व डेयरी विभाग छीन कर उन्हें आनंद विभाग सौंपा तो फिर लोगों का ध्यान इस विभाग पर गया। जानकार हैरानी होती है कि इस विभाग का अपना भवन तक नहीं है। यह विभाग भोपाल में माध्यमिक शिक्षा मंडल के कार्यालय में संचालित हो रहा है। अधिकारियों-कर्मचारियों की स्वीकृत संख्या 28 है, परंतु 20 ही कार्यरत हैं। यहां तक की निदेशक के पांच पदों में मात्र दो ही कार्यरत हैं। बजट भी मात्र 12 करोड़ रुपये है। इस विभाग का काम नागरिकों की मानसिक शांति, खुशी और समग्र कल्याण की योजना संचालित करने का है। दावा है कि गठन के बाद से विभाग ने विभिन्न कार्यक्रमों के माध्यम से डेढ़ लाख लोगों को खुश रहने के तरीके बताए हैं। इसमें शासकीय और निजी अधिकारी-कर्मचारी आमजन शामिल हैं। विभाग के साथ डेढ़ लाख से आनंदक (स्वैच्छिक अधिक कार्यकर्ता) जुड़े हैं, जो आनंद देने वाले विभिन्न कार्यक्रमों से जुडक़र काम कर रहे हैं। इसमें शासकीय अधिकारी-कर्मचारी, योगाचार्य आदि शामिल हैं। कार्यक्रम भी शासकीय भवनों में होते हैं।
ये हैं आनंद देने वाले प्रमुख कार्यक्रम
आनंद संस्थान का सबसे प्रमुख कार्यक्रम अल्पविराम है। इसमें शासकीय या निजी कार्यालयों के कर्मचारियों के लिए पांच दिन की कार्यशाला कराई जाती है। इसके पीछे लक्ष्य है सकारात्मक सोच को विकसित करने का प्रयास। मन प्रसन्न रहेगा तो निश्चित ही उसका परिणाम लोगों की जीवन शैली व उनके व्यवहार में दिखेगा। इसी तरह से स्कूलों में हर शनिवार को आनंद सभा आयोजित की जाती है।
