टीईटी विवाद पर एमपी सरकार का बड़ा दांव… सुप्रीम कोर्ट में पुनर्विचार याचिका

टीईटी विवाद
  • शिक्षकों को राहत की उम्मीद…

भोपाल/बिच्छू डॉट कॉम। प्रदेश के डेढ़ लाख से ज्यादा शिक्षकों को शिक्षक पात्रता परीक्षा टीईटी से निजात मिलने की उम्मीद बंध गई है। लंबी एक्सरसाइज के बाद सरकार सुप्रीम कोर्ट पहुंच गई है। सरकार ने टीईटी को लेकर पुनर्विचार याचिका दायर कर दी है। सरकार के इस कदम से शिक्षकों को राहत मिलना तय है, लेकिन डीपीआई के परीक्षा संबंधी आदेश के औचित्य पर ही सवाल खड़े हो गए हैं। इस पर नाराजगी जताने 50 हजार से ज्यादा शिक्षक शनिवार को भोपाल में एकत्रित होंगे। विधि विशेषज्ञों से राय लेने के बाद राज्य सरकार ने शिक्षक पात्रता परीक्षा की अनिवार्यता वाले सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर पुनर्विचार याचिका शुक्रवार को दायर कर दी है। प्रदेशभर के शिक्षक संगठन पिछले तीन महीने से आंदोलन चलाकर सरकार से पुनर्विचार याचिका दायर करने की मांग कर रहे थे। जानकारी के अनुसार राज्य सरकार की ओर से 17 अप्रैल को शाम चार बजे यह पुनर्विचार याचिका दायर की गई है। हालांकि इस पर सुनवाई की तारीख अभी तय नहीं हो सकी है। दायर की गई पुनर्विचार की रसीद भी शाम को ही शासन को मिल गई है। आनन-फानन में लोक शिक्षण आयुक्त द्वारा मध्यप्रदेश शिक्षक संघ, राज्य कर्मचारी संघ सहित शिक्षक संगठनों के संयुक्त मोर्चा को भी यह रसीद भेजी गई है। सरकार का यह कदम टीईटी की अनिवार्यता का विरोध कर रहे शिक्षकों को राहत देने वाला है। हालांकि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और स्कूल शिक्षा मंत्री राव उदयप्रताप सिंह शिक्षकों को आश्वस्त कर चुके थे।
जम्मू-कश्मीर में स्थगित हो चुकी है टीईटी: सुप्रीम कोर्ट का फैसला आते ही पंजाब, जम्मू-कश्मीर, तमिलनाडु, केरला और उत्तरप्रदेश सरकार 30 दिन के अंदर ही सुप्रीम कोर्ट पहुंच गई थीं। मगर मध्यप्रदेश सरकार ने समय सीमा में पुनर्विचार याचिका ही दायर नहीं की।
अब डीपीआई के आदेश पर सवाल
महाराष्ट्र के एक प्रकरण की सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने 1 सितंबर 2025 को फैसला सुनाया था कि पात्रता परीक्षा के जरिए शिक्षकों की योग्यता परखी जाए। 5 साल में सेवानिवृत्त होने वाले शिक्षकों को छूट दी थी। इसके तहत डीपीआई ने आननफानन में 2 मार्च को आदेश जारी कर टीईटी का टाइम टेबल भी जारी कर दिया। इस काबिक मध्यदेश के शिक्षकों के लिए जुलाई-अगस्त में टीईटी का आयोजन कर्मचारी चयन मंडल द्वारा किया जाना है। इसे लेकर प्रदेश भर के कक्षा 1 से 8 तक के शिक्षक तनाव में आ गए। अब सरकार द्वारा दाखिल की गई पुनर्विचार याचिका से डीपीआई के इस आदेश के औचित्य पर सवाल उठ गए हैं। संगठनों को सुप्रीम कोर्ट में दायर पुनर्विचार याचिका की रसीद भेजने वाले आयुक्त लोक शिक्षण ने भी अभी तक कोई संशोधित आदेश टीईटी के संबंध में जारी नहीं किया है।

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