
- राज्यसभा की तीसरी सीट के लिए शह-मात का खेल शुरू!
भोपाल/बिच्छू डॉट कॉम। मप्र में होने वाले आगामी राज्यसभा चुनाव को लेकर सियासी सरगर्मी तेज हो गई है। अभी सीटें आधिकारिक रूप से रिक्त नहीं हुई हैं, लेकिन भाजपा और कांग्रेस के बीच रणनीतिक मुकाबला शुरू हो चुका है। इस बार चुनाव में दो सीटें भाजपा और एक सीट कांग्रेस के खाते में जाती दिख रही हैं, लेकिन तीसरी सीट को लेकर शह-मात का खेल दिलचस्प हो गया है। भाजपा की रणनीति साफ है कि किसी भी तरह कांग्रेस से तीसरी सीट छीनी जाए। इसके लिए पार्टी ऐसे प्रभावशाली उम्मीदवार की तलाश में है, जिसकी पकड़ कांग्रेस के भीतर भी मजबूत हो और जो क्रॉस वोटिंग कराने में सक्षम हो। यदि भाजपा उम्मीदवार कांग्रेस के करीब 7 विधायकों को अपने पक्ष में करने में सफल होता है, तो पार्टी राज्यसभा चुनाव में क्लीनस्वीप कर सकती है। भाजपा की सक्रियता और रणनीति को भांपते हुए कांग्रेस भी एक्टिव मोड में आ गई है, ताकि अपनी सीट को बचाया जा सके।
पूर्व सीएम दिग्विजय सिंह का कार्यकाल खत्म होने से खाली हो रही तीसरी सीट को अपने कब्जे में करने भाजपा में बढ़ीं गतिविधियों ने प्रदेश में राज्यसभा के रण को रोचक बना दिया है। इस तीसरी सीट के लिए भाजपा की सक्रियता ने कांग्रेस को भी सतर्क कर दिया है। अपनी सीट बचाने कांग्रेस भी भोपाल से लेकर दिल्ली तक एक्टिव हो गई। चिंतन-मंथन और बैठकों में जहां जिताक चेहरे की खोज की जा रही है, वहीं इस सीट को बचाए रखने के लिए रणनीति भी बनाई जाने लगी है। पार्टी क्षेत्रीय और जातीय समीकरणों को साधते हुए मजबूत उम्मीदवार उतारने की तैयारी में है। राजनीतिक जानकारों के अनुसार, हालिया घटनाक्रम जैसे विधायकों के कानूनी विवाद और संभावित असंतोष ने मुकाबले को और रोचक बना दिया है। कांग्रेस के भीतर एक संभावित बगावत और कुछ विधायकों की स्थिति स्पष्ट न होने से तीसरी सीट पर समीकरण तेजी से बदल रहे हैं। ऐसे में आगामी राज्यसभा चुनाव में तीसरी सीट का मुकाबला बेहद कांटे का होने की संभावना है, जहां दोनों पार्टियां अपने-अपने स्तर पर रणनीति बनाकर जीत सुनिश्चित करने की कोशिश में जुटी हैं।
प्रदेश प्रभारी कल करेंगे बैठक
मप्र के कोटे की खाली हो रहीं राज्यसभा की तीन सीटों के लिए मई-जून में निर्वाचन होना हैं। इनमें से दो सीटें भाजपा के खाते में हैं, जबकि तीसरी सीट पूर्व सीएम दिग्विजय सिंह का कार्यकाल पूरा होने की वजह से खाली हो रही है। विधानसभा में संख्या बल के आधार पर यह सीट कांग्रेस को मिलना लगभग तय है, लेकिन इस सीट पर भी भाजपा ने दावा ठोककर कांग्रेस को एक हिसाब से चुनौती दे डाली है। ऐसे में दिल्ली दरबार में मंथन के बाद प्रदेश प्रभारी हरीश चौधरी 15 अप्रैल को भोपाल आकर पार्टी नेताओं की बैठक लेंगे। चौधरी की मौजूदगी में प्रदेश कांग्रेस राज्यसभा की अपनी सीट बचाने पर मंथन करेंगी। चौधरी पहले पूर्व सीएम कमलनाथ, दिग्विजय सिंह और अन्य बरिष्ठ नेताओं के साथ बैठक कर अपनी सीट बचाए रखने पर चर्चा करेंगे। वरिष्ठ नेताओं से चर्चा के बाद चौधरी पार्टी के नेताओं और विधायकों से भी वन टू वन मुलाकात करेंगे। इस दौरान वे विधायकों को पार्टी के प्रति उनकी प्रतिबद्धता याद दिलाने के साथ चुनाव के दौरान एकजुटता बढ़ाने का प्रयास करेंगे।
भाजपा तलाश रही संभावना
जिस तरह से पिछले डेढ़ माह में कांग्रेस विधायकों की संख्या में कमी आई है, उससे भाजपा के इस दावे को मजबूत बना दिया है, तो कांग्रेस अपने कुछ विधायकों को लेकर परेशान है। क्योंकि पार्टी को आशंका है कि इनमें से कुछ विधायक राज्यसभा के लिए मतदान के दौरान क्रास वोटिंग कर सकते है। प्रदेश कांग्रेस ने अपनी इस शंका पर वरिष्ठ नेताओं के साथ राज्यसभा चुनाव को लेकर मंथन करना शुरु कर दिया है। सोमवार को प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह से मिलने उनके बंगले पहुंचे और उनसे बंद कमरे में राज्यसभा चुनाव को लेकर चर्चा की। हालांकि पटवारी ने इसका खुलासा नहीं किया, अलबत्ता यह जरुर कहा कि वे वरिष्ठ नेताओं से पार्टी संगठन से लेकर दूसरे आवश्यक विषयों पर चर्चा करते रहते है। इधर, भाजपा ने भी राज्यसभा की तीसरी सीट हासिल करने को लेकर प्रारंभिक तैयारी शुरू कर दी है। सूत्रों का कहना है कि यदि डॉ. नरोत्तम मिश्रा राज्यसभा जाने के लिए तैयार होते है, तो तीसरी सीट पर भाजपा अपना उम्मीदवार उत्तार सकती है। हालांकि राज्यसभा की तीसरी सीट पर उम्मीदवार उतारा जाए या नहीं, और तीसरी सीट भी अपने कब्जे में करने के लिए अपनाई जाने वाली रणनीति पर आज प्रदेश भाजपा कोर ग्रुप की बैठक में चर्चा की जाएगी। इस बैठक में यूसीसी के अलावा नारी शक्ति वंदन अधिनियम और संगठन और सरकार से जुड़े दूसरे विषयों पर भी मंथन होगा और इसके लिए रोडमैप भी तैयार कराया जाएगा।
