
भोपाल/बिच्छू डॉट कॉम
ढीमरखेड़ा तहसील में करोड़ों की शासकीय भूमि को निजी संस्था के नाम दर्ज करने का मामला सामने आया है। अपर कलेक्टर न्यायालय ने ग्राम बम्हौरी स्थित करीब 11 एकड़ भूमि का नामांतरण निरस्त करते हुए उसे दोबारा मध्यप्रदेश शासन के खाते में दर्ज करने के आदेश जारी किए हैं। मामले में राजस्व रिकॉर्ड में कथित हेरफेर और नियमों की अनदेखी को लेकर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। कामकार सासार विवादित भूमि स्पिरिचुअल रिजनरेशन मूवमेंट फाउंडेशन ऑफ इंडिया के नाम दर्ज कर दी गई थी। यह संस्था आध्यात्मिक गुरु महर्षि महेश योगी द्वारा स्थापित मानी जाती है। प्रकरण की शिकायत अंतर्राष्ट्रीय सुरक्षा संगठन मध्य प्रदेश के तहसील अध्यक्ष रणजीत पटेल ने की थी।
वारिस – किसी संस्था को नहीं बेची जमीन
आरोप है कि संस्था के वर्तमान प्रबंधन से जुड़े लोगों ने बिना सक्षम अनुमति और वैधानिक प्रक्रिया पूरी किए शासकीय भूमि को अपने नाम कराने की कोशिश की। राजस्व अभिलेखों में दर्ज जानकारी अनुसार संबंधित भूमि में एक हिस्सा शासकीय घास मद और दूसरा हिस्सा पट्टे की श्रेणी का था। मप्र भू-राजस्व संहिता के तहत ऐसी भूमि का हस्तांतरण कलेक्टर की पूर्व अनुमति के बिना नहीं किया जा सकता। बावजूद इसके वर्ष 2007 में कथित रूप से रजिस्ट्री कराई और बाद में संस्था का नाम रिकॉर्ड में दर्ज हो गया।
