इंदौर की बेटी सारा लुणावत ने ऑक्सफोर्ड यूनियन में जीता चुनाव, बनीं सचिव

सारा लुणावत
  • 18 वर्षीय सारा अब भारतीय छात्रों और देश के मुद्दों को देगी आवाज

भोपाल/बिच्छू डॉट कॉम। शहर की सारा लुणावत ने दुनिया की सबसे प्रतिष्ठित डिबेटिंग संस्थाओं में गिनी जाने वाली ऑक्सफोर्ड यूनियन के चुनाव में इतिहास रच दिया है। वह ऑक्सफोर्ड यूनियन की पहली भारतीय महिला और सबसे कम उम्र की सेक्रेटरी चुनी गई हैं। खास बात यह रही कि उन्हें 523 प्रेफरेंस वोट मिले, जो अध्यक्ष पद जीतने वाले उम्मीदवार (435) से भी ज्यादा हैं। पैरेंट्स संजय और डॉ. सोनिया लुणावत कहते हैं कि बेटी को स्कूल से ही डिबेट का शौक था। सारा का कहना है कि मेरा सपना सिर्फ वकालत तक सीमित नहीं है। मैं पब्लिक पॉलिसी के क्षेत्र में भी जाना चाहती हूं इसलिए इंटरनेशनल एक्सपोजर के लिए यह रास्ता चुना। यहां भारत से बहुत कम छात्रों का चयन होता है। मेरी बैच में सिर्फ 3 भारतीय हैं।
ऑक्सफोर्ड यूनियन इसलिए है खास
1823 से यह दुनिया की प्रतिष्ठित डिबेटिंग संस्थाओं में से एक है। यह  ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी से अलग, स्वतंत्र संस्था है और फंडिंग खुद जुटाती है। यहां हर 3 माह में छात्र चुनाव होते हैं। इस ऑसफोर्ड यूनियन से ब्रिटेन के पूर्व प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन, पाकिस्तान की पूर्व प्रधानमंत्री बेनजीर भुट्टो, ब्रिटेन के पूर्व विदेश मंत्री विलियम हेग जैसे कई वैश्विक नेता निकले हैं।
पहले साल से चुनाव में सक्रिय
सारा ने पहले ही टर्म में चुनाव लड़ा और 11 सदस्यीय सेक्रेटरी कमेटी में जगह बनाई। वह उस कमिटी की अकेली फर्स्ट ईयर स्टूडेंट थीं। इसके बाद छह सदस्यीय स्टैंडिंग कमिटी में भी चुनी गईं, जो यूनियन के बड़े फैसले, बजट और नियमों पर निर्णय लेती है। यही अनुभव उन्हें सचिव पद तक ले गया। उनके सामने कोई उम्मीदवार नहीं था, वोटर नोटा चुन सकते थे। बावजूद उन्हें 523 वोट मिले। वे चाहती हैं कि ऑक्सफोर्ड यूनियन में भारतीय यूथ से जुड़े मुद्दों को उठाया जाए।

Related Articles