
भोपाल/बिच्छू डॉट कॉम
राजधानी भोपाल में इन दिनों भुट्टे का सीजन चरम पर है। शहरी क्षेत्र से लेकर ग्रामीण सडक़ों तक बड़ी संख्या में भुट्टे की दुकानें लग रही हैं। इससे जहां हजारों लोगों को रोजगार मिल रहा है, वहीं भुट्टे की दुकानों से निकलने वाला कचरे के निपटान में नगर निगम को हर महीने लाखों रुपये खर्च करने पड़ते थे। लेकिन अब भोपाल नगर निगम ने भुट्टे से निकलने वाले कचरे के सुरक्षित निष्पादन का रास्ता खोज लिया है, बल्कि इससे हर महीने लाखों रुपये की कमाई भी हो रही है। भुट्टे से निकलने वाले जैविक अवशेष को नगर निगम के कर्मचारी दूसरे कचरे से अलग एकत्रित करते हैं। इसके बाद इसे बायो-सीएनजी संयंत्र में पहुंचाया जाता है, जहां वैज्ञानिक प्रक्रिया के जरिए उपयोगी ईंधन में बदला जाता है। प्रतिदिन इस अपशिष्ट से लगभग 1 से 1।5 क्विंटल बायो-सीएनजी तैयार की जा रही है। तैयार ईंधन का उपयोग नगर निगम के वाहनों में किया जा रहा है, जिससे पारंपरिक ईंधन पर निर्भरता भी कम हो रही है। इससे नगर निगम को हर महीने लाखों रुपये की आय हो रही है, वहीं कचरे के परिवहन और निस्तारण पर होने वाला खर्च भी घटा है। नगर निगम आयुक्त संस्कृति जैन के अनुसार, मक्के के भुट्टे, छिलके और डंठल जैसे कृषि अवशेष जैविक पदार्थों से भरपूर होते हैं।
रोज 100 क्विंटल कचरे से बन रही सीएनजी
नगर निगम के अधिकारियों ने बताया कि, शहर में इस समय करीब 3 से 4 हजार भुट्टे के ठेले लग रहे हैं। इनसे रोजाना 100 से 120 क्विंटल तक छिलके, डंठल और अन्य अवशेष भी निकल रहे हैं। पहले यह पूरा जैविक कचरा सामान्य अपशिष्ट के साथ डंप कर दिया जाता था, जिससे निपटान पर अतिरिक्त खर्च बढ़ जाता था। लेकिन अब नगर निगम ने इसी मौसमी अपशिष्ट को संसाधन में बदलते हुए बायो-सीएनजी उत्पादन का माध्यम बना दिया है।
