
- मुस्लिम पक्ष का दावा…
भोपाल/बिच्छू डॉट कॉम। भोजशाला को लेकर हाईकोर्ट में गुरुवार को भी सुनवाई हुई। मौलाना कमालुद्दीन वेलफेयर सोसायटी की ओर से वकीलों ने जस्टिस विजय कुमार शुक्ला और जस्टिस आलोक अवस्थी की डिवीजन बेंच में तर्क रखा। वकीलों ने भोजशाला के मंदिर होने का दावा खारिज करते हुए दलील दी, कि यहां मस्जिद कब तामीर की गई, उसके प्रमाण हैं, लेकिन मंदिर को लेकर कोई प्रमाण नहीं हैं। सोसायटी के वकीलों ने बताया, 1305 ई. में भोजशाला में मस्जिद की नींव रखी गई। खिलजी शासनकाल के दस्तावेजों के हिसाब से 124ङ्ग188 फीट लंबी मस्जिद मुल्तान की मस्जिद की तर्ज पर बनाई गई। मेहमूद तुगलक के समय में जिन मस्जिदों का निर्माण और जीर्णोद्धार कराया गया था, उसमें धार की मौलाना कमालुद्दीन जामा मस्जिद का भी उल्लेख है। 1392 में इसका जीर्णोद्धार सुल्तान मेहमूद तुगलक के सरदार दिलावर खान ने मालवा को जीतने के बाद तुगलक के आदेश पर कराया था। 1902 की रिपोर्ट में नमाज होने का उल्लेख: मुस्लिम पक्ष की ओर से तर्क रख रहे वकील ने कोर्ट को बताया कि 1902 में एएसआइ ने जो रिपोर्ट प्रकाशित की, उसमें उल्लेख है कि मौलाना कमालुद्दीन मस्जिद में प्रार्थना होती है।
सोमवार से वीडियो रिकॉर्डिंग पर सुनवाई
गुरुवार को सुनवाई के दौरान एएसआइ की 2024 में हाईकोर्ट के निर्देश पर किए सर्वे के दौरान जो 90 घंटों से ज्यादा समय की वीडियो रिकॉर्डिंग की गई थी, उसको लेकर बहस्र होगी। कोर्ट ने वरिष्ठ अभिभाषक सलमान खुर्शीद को बीडियो रिकॉर्डिंग देखने और यदि कोई आपत्ति हो तो उसे कोर्ट के समक्ष रखने को कहा है।
