हर साल भर्ती परीक्षाओं पर लग रहा ग्रहण

  • नाम बदला, सिस्टम बदला, लेकिन नहीं बदली परेशानी
  • मप्र कर्मचारी चयन मंडल (एमपीईएसबी)की विश्वसनियता पर उठने लगे सवाल  

भोपाल/बिच्छू डॉट कॉम। मध्य प्रदेश में सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहे लाखों युवाओं के लिए भर्ती परीक्षाएं अब केवल प्रतिस्पर्धा की नहीं, बल्कि अनिश्चितता की भी परीक्षा बन गई हैं। व्यापमं घोटाले के बाद परीक्षा प्रणाली को पारदर्शी, सुरक्षित और तकनीक आधारित बनाने के लिए बड़े बदलाव किए गए। व्यापमं का नाम बदलकर मध्य प्रदेश कर्मचारी चयन मंडल (एमपीईएसबी) रखा गया, ऑनलाइन परीक्षा प्रणाली लागू की गई और तकनीकी निगरानी बढ़ाई गई। इसके बावजूद भर्ती परीक्षाओं के निरस्त होने, परिणामों में संशोधन और तकनीकी खामियों का सिलसिला लगातार जारी है। ताजा मामला 7 जून 2026 को आयोजित वनरक्षक, क्षेत्ररक्षक, जेल प्रहरी और सहायक जेल अधीक्षक भर्ती परीक्षा का है। परीक्षा की दूसरी पाली सर्वर डाउन होने के कारण निरस्त करनी पड़ी। हजारों अभ्यर्थी परीक्षा केंद्रों तक पहुंचने के बाद बिना परीक्षा दिए लौटने को मजबूर हुए। अब उन्हें दोबारा परीक्षा का इंतजार करना होगा। यह घटना एक बार फिर भर्ती प्रक्रिया की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े कर रही है।
प्रदेश में सरकारी नौकरी का सपना देख रहे युवाओं के लिए भर्ती परीक्षाएं लगातार चिंता का कारण बनती जा रही हैं। मप्र कर्मचारी चयन मंडल (एमपीईएसबी) में तकनीकी गड़बडिय़ों और परीक्षा स्थगित होने की घटनाएं थमने का नाम नहीं ले रही हैं। वर्ष 2026 में एमपीईएसबी को 14 भर्ती परीक्षाएं आयोजित करनी हैं। लेकिन 7 जून को आयोजित वनरक्षक, क्षेत्ररक्षक, जेल प्रहरी और सहायक जेल अधीक्षक भर्ती परीक्षा की दूसरी पाली सर्वर डाउन होने के कारण निरस्त करनी पड़ी। इसके बाद से एमपीईएसबी की विश्वसनियता पर सवाल उठने लगे हैं। पिछले कुछ वर्षों में तकनीकी खामियों के कारण कई महत्वपूर्ण भर्ती परीक्षाएं प्रभावित हुई हैं। अभ्यर्थियों का कहना है कि वे महीनों तक तैयारी करते हैं, परीक्षा केंद्रों तक पहुंचने में समय और पैसा खर्च करते हैं, लेकिन तकनीकी खामियों का खामियाजा उन्हें भुगतना पड़ता है। परीक्षा होने के बाद भी परिणाम आने में लंबा समय लगने से नियुक्ति प्रक्रिया और अधिक विलंबित हो जाती है। रिकॉर्ड बताते हैं कि यह कोई अपवाद नहीं, बल्कि लगातार सामने आ रही समस्या है। वर्ष 2025 में समूह-1 और समूह-2 की संयुक्त भर्ती परीक्षा तकनीकी कारणों से पुनर्निर्धारित करनी पड़ी। इसी वर्ष समूह-1 उपसमूह-3 की परीक्षा की पहली पाली सर्वर फेल होने के कारण निरस्त कर दी गई थी। साल 2024 में आबकारी आरक्षक, समूह-4 और महिला एवं बाल विकास पर्यवेक्षक भर्ती परीक्षाएं विभिन्न कारणों से प्रभावित हुईं। 2023 में कृषि और उद्यान विभाग की भर्ती परीक्षा का परिणाम जारी होने के बाद दोबारा संशोधित परिणाम जारी करना पड़ा। 2022 में आईटीआई ट्रेनिंग ऑफिसर और अन्य समूह परीक्षाओं के परिणामों में बदलाव करना पड़ा।
2026 में 14 परीक्षाओं की चुनौती
एमपीईएसबी को वर्ष 2026 में 14 प्रमुख भर्ती परीक्षाएं आयोजित करनी हैं। ऐसे में सबसे बड़ी चुनौती केवल परीक्षा आयोजित करना नहीं, बल्कि उसे बिना तकनीकी बाधा, बिना विवाद और समयबद्ध परिणामों के साथ पूरा करना है। क्योंकि अब अभ्यर्थियों का सवाल सिर्फ नौकरी का नहीं, बल्कि भर्ती प्रक्रिया पर भरोसे का भी है। एमपीईएसबी के जनसंपर्क अधिकारी विशाल जोशी का कहना है कि परीक्षार्थियों को किसी प्रकार की असुविधा न हो, इसके लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। उनके अनुसार तकनीकी कारणों से कभी-कभी ऐसी स्थिति बन जाती है, लेकिन इन्हें दूर करने के लिए सुधारात्मक कदम उठाए जा रहे हैं। फिर भी बड़ा सवाल कायम है कि जब हर वर्ष किसी न किसी भर्ती परीक्षा पर तकनीकी या प्रशासनिक संकट खड़ा हो रहा है, तो आखिर परीक्षा व्यवस्था पूरी तरह भरोसेमंद कब बनेगी?
तकनीकी खामी का बोझ अभ्यर्थियों पर
भर्ती परीक्षाओं में होने वाली गड़बडिय़ों का सबसे बड़ा असर अभ्यर्थियों पर पड़ता है। कई उम्मीदवार दूरदराज जिलों से परीक्षा केंद्रों तक पहुंचते हैं। यात्रा, आवास और तैयारी पर हजारों रुपये खर्च होते हैं। परीक्षा निरस्त होने या परिणामों में बदलाव होने पर न केवल आर्थिक नुकसान होता है, बल्कि मानसिक तनाव और भविष्य की अनिश्चितता भी बढ़ जाती है। प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे युवाओं का कहना है कि वे महीनों तक तैयारी करते हैं, लेकिन तकनीकी खामियों और प्रशासनिक कमजोरियों की कीमत उन्हें चुकानी पड़ती है। कई मामलों में परीक्षा के बाद परिणाम आने में भी लंबा समय लग जाता है, जिससे नियुक्ति प्रक्रिया वर्षों तक खिंच जाती है।

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