- बजट में घोषणा, 700 करोड़ का प्रावधान, बच्चों को टेट्रा पैक दूध का इंतजार
- गौरव चौहान

मध्यप्रदेश सरकार ने वर्ष 2026-27 के बजट में बड़े स्तर पर यशोदा दुग्ध प्रदाय योजना लागू करने की घोषणा की थी। मकसद था कि नए शैक्षणिक सत्र से सरकारी स्कूलों और आंगनबाड़ी केंद्रों के बच्चों को मुफ्त टेट्रा पैक दूध उपलब्ध कराया जाए, ताकि कुपोषण कम हो, बच्चों को अतिरिक्त पोषण मिले और स्कूलों में उनकी उपस्थिति बढ़े। लेकिन शिक्षण सत्र शुरू हुए एक महीने से अधिक समय बीत चुका है और बजट घोषणा को भी पांच महीने से ज्यादा हो गए हैं, फिर भी योजना धरातल पर नहीं उतर सकी है। करीब 80 लाख बच्चे अब भी योजना के शुरू होने का इंतजार कर रहे हैं। सरकार ने इस महत्वाकांक्षी योजना के लिए चालू वित्तीय वर्ष के बजट में 700 करोड़ रुपये का प्रावधान किया है, जबकि अगले पांच वर्षों में इस योजना पर लगभग 6,600 करोड़ रुपये खर्च किए जाने का अनुमान है। इसके बावजूद योजना अभी कैबिनेट की मंजूरी का इंतजार कर रही है।
पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के अधिकारियों के अनुसार योजना का विस्तृत प्रस्ताव तैयार कर लिया गया है। महिला एवं बाल विकास विभाग से भी इस पर अभिमत प्राप्त किया जा चुका है। प्रस्ताव को वरिष्ठ सचिव समिति (सीनियर सेक्रेट्री कमेटी) से स्वीकृति मिलने के बाद कैबिनेट के समक्ष रखा जाएगा। कैबिनेट की मंजूरी मिलने के बाद ही योजना के क्रियान्वयन की प्रक्रिया शुरू हो सकेगी। योजना का संचालन पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के माध्यम से किया जाना है, जबकि महिला एवं बाल विकास विभाग और स्कूल शिक्षा विभाग भी इसमें महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।
80 लाख बच्चों को मिलेगा पोषण
यशोदा दुग्ध प्रदाय योजना के तहत सरकारी स्कूलों में कक्षा आठवीं तक पढऩे वाले विद्यार्थियों और आंगनबाड़ी केंद्रों में पंजीकृत बच्चों को टेट्रा पैक दूध उपलब्ध कराया जाएगा। सरकार का दावा है कि इससे बच्चों को प्रोटीन, कैल्शियम और अन्य आवश्यक पोषक तत्व मिलेंगे, जिससे उनका शारीरिक और मानसिक विकास बेहतर होगा। योजना का लक्ष्य वर्ष 2026-27 में प्रदेश के लगभग 80 लाख बच्चों तक पहुंचना है। सरकार का मानना है कि यह पहल कुपोषण कम करने के साथ-साथ स्कूलों में बच्चों की नियमित उपस्थिति बढ़ाने में भी सहायक होगी।
पूरे प्रदेश में एक साथ लागू होगी योजना
शुरुआती स्तर पर इस योजना को एक-दो जिलों में पायलट प्रोजेक्ट के रूप में लागू करने पर विचार किया गया था, लेकिन बाद में सरकार ने रणनीति बदलते हुए इसे पूरे प्रदेश में एक साथ लागू करने का निर्णय लिया। इसी कारण सभी तैयारियां पूरी होने और कैबिनेट की मंजूरी मिलने के बाद ही योजना शुरू की जाएगी। अधिकारियों का कहना है कि प्रदेशव्यापी क्रियान्वयन के लिए दूध की उपलब्धता, वितरण व्यवस्था, भंडारण और परिवहन जैसी व्यवस्थाओं को अंतिम रूप दिया जा रहा है।
क्यों चुना गया टेट्रा पैक दूध
योजना के तहत सामान्य दूध के बजाय टेट्रा पैक दूध देने का निर्णय लिया गया है। इसका सबसे बड़ा कारण इसकी लंबी शेल्फ लाइफ और सुरक्षित भंडारण है। टेट्रा पैक दूध को अल्ट्रा हाई टेम्प्रेचर या हाई टेम्प्रेचर शॉर्ट टाइम तकनीक से तैयार किया जाता है। दूध को कुछ सेकंड के लिए अत्यधिक तापमान पर गर्म कर तुरंत ठंडा किया जाता है और विशेष बहु-परत (मल्टी लेयर) पैकेजिंग में सील कर दिया जाता है। इससे दूध लंबे समय तक बिना खराब हुए सुरक्षित रहता है और कोल्ड स्टोरेज की आवश्यकता भी काफी कम हो जाती है। ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्रों तक दूध पहुंचाने में यह पैकेजिंग अधिक सुविधाजनक मानी जाती है। बच्चों को अलग से गिलास लाने की जरूरत भी नहीं होगी, जिससे वितरण प्रक्रिया आसान बनेगी।
संकल्प पत्र के वादे से बजट योजना तक
बच्चों को पौष्टिक आहार उपलब्ध कराने का वादा भाजपा ने विधानसभा चुनाव-2023 के संकल्प पत्र में किया था। इसी वादे को अमलीजामा पहनाने के लिए पिछले वर्ष पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग और महिला एवं बाल विकास विभाग ने संयुक्त रूप से एक प्रस्ताव तैयार किया था। उस प्रस्ताव के अनुसार सरकारी प्राथमिक और माध्यमिक विद्यालयों के 55 लाख से अधिक विद्यार्थियों को चरणबद्ध तरीके से सप्ताह में तीन दिन 200 मिलीलीटर टेट्रा पैक दूध देने की योजना बनाई गई थी। शुरुआत कुछ जिलों में पायलट प्रोजेक्ट से होनी थी और बाद में पूरे प्रदेश में इसका विस्तार किया जाना था। हालांकि, प्रस्ताव को अंतिम रूप मिलने से पहले ही फरवरी 2026 के बजट में सरकार ने सीधे यशोदा दुग्ध प्रदाय योजना की घोषणा कर दी। इसके बाद पुराना चरणबद्ध प्रस्ताव ठंडे बस्ते में चला गया।
पोषण बनाम प्रक्रिया
सरकार की इस योजना को बच्चों के पोषण की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है, लेकिन बजट घोषणा के बावजूद इसका समय पर लागू न होना सवाल भी खड़े कर रहा है। नया शैक्षणिक सत्र शुरू हो चुका है और जिन बच्चों को शुरुआत से अतिरिक्त पोषण मिलने की उम्मीद थी, वे अभी भी इंतजार कर रहे हैं। अब निगाहें आगामी कैबिनेट बैठक पर टिकी हैं, जहां मंजूरी मिलने के बाद ही प्रदेश के लाखों बच्चों तक टेट्रा पैक दूध पहुंचाने की प्रक्रिया शुरू हो सकेगी।
