हर जिले की बनेगी इमरजेंसी योजना, 20.9 करोड़ का इमरजेंसी फंड

इमरजेंसी योजना

भोपाल/बिच्छू डॉट कॉम। संभावित अल्प वर्षा की स्थिति को देखते हुए सरकार सतर्क हो गई है। प्रत्येक जिले की आकस्मिक कार्ययोजना बनाई जाएगी। सभी विभाग आपसी समन्वय के साथ काम करते हुए किसानों को समय पर मार्गदर्शन उपलब्ध कराएंगे, जिससे कृषि उत्पादन और किसानों की आय पर प्रतिकूल प्रभाव न पड़े। किसानों को कम पानी और कम अवधि में तैयार होने वाली फसलों की खेती के लिए जागरूक किया जाए। जल संरक्षण और उसके सदुपयोग को लेकर नगरीय निकाय से लेकर पंचायतराज संस्थाएं काम करेंगी। इस आसन्न संकट से निपटने के लिए मप्र सरकार ने राहत विभाग को 20.9 करोड़ का बजट आवंटित करते हुए इमरजेंसी फंड के रूप में सुरक्षित रखने के निर्देश दिए हैं। बजट प्रावधान: सूखे से निपटने राजस्व विभाग के पास 20.9 करोड़ की राशि उपलब्ध है। स्थिति बिगड़ती है, तो सरकार अन्य मदों से राशि का पुनर्नियोजन कर सूखा मद बढ़ाएगी। ये निर्देश मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने गुरुवार को संभावित अल्पवर्षा की स्थिति से निपटने की तैयारियों की समीक्षा के दौरान दिए। उन्होंने कहा कि इसे चुनौती नहीं, बल्कि बेहतर योजना, वैज्ञानिक खेती और समयबद्ध तैयारी के अवसर के रूप में लिया जाए। समय पर सही निर्णय और विभागों के प्रभावी समन्वय से हम संभावित अल्प वर्षा के प्रभाव को काफी हद तक कम कर सकते हैं। ज्वार, बाजरा, उड़द, मूंग, तुअर तथा कोदो-कुटकी जैसी मोटे अनाज एवं दलहनी फसलों को अपनाया जाए। ये फसलें कम पानी में भी बेहतर उत्पादन देने के साथ लाभकारी सिद्ध हो सकती हैं।
नगरीय निकाय करेंगे  दो वर्ष की तैयारी
बैठक में बताया गया कि सभी नगरीय निकायों में पेयजल आपूर्ति के लिए वैकल्पिक स्रोतों का चिन्हांकन एवं टैंकर व्यवस्था की आकस्मिक योजना तैयार की जाएगी। अमृत 2.0 के अंतर्गत जल प्रदाय योजनाएं समय पर पूरी हों, यह तय किया जाएगा। ग्रामीण क्षेत्रों में जल जीवन मिशन की ग्रामवार समीक्षा, बंद व अपूर्ण नल-जल योजनाओं की मरम्मत का 90 दिवसीय अभियान चलेगा। जलाभिषेक 2.0 अंतर्गत प्रदेश में पुराने तालाबों, बावडिय़ों, कुओं एवं अन्य जल संरचनाओं का सर्वे एवं जीर्णोद्धार, वीबी जी रामजी योजना से प्रति विकासखंड न्यूनतम 100 जल संरचनाओं का पुनर्जीवन दो वर्ष में किया जाएगा। भूजल पुनर्भरण अभियान के तहत सभी विकासखंडों में रिचार्ज शाफ्ट, चेक डैम, स्टाप डैम एवं खेत-तालाब निर्माण के लिए खेत का पानी खेत में, गांव का पानी गांव में सिद्धांत पर मिशन मोड में कार्यक्रम चलाया जाएगा।
प्रत्येक जिला की बनेगी आकस्मिक फसल योजना
सरकार हर जिले के लिए आकस्मिक फसल योजना तैयार करेगी। इसमें कम जल मांग वाली फसलों, दलहन, तिलहन, श्रीअन्न (मोटे अनाज) प्रोत्साहन एवं न्यूनतम समर्थन मूल्य पर उपार्जन सुनिश्चित किया जाएगा। ग्रीष्मकालीन धान और मूंग की खेती पर जल उपलब्धता आधारित सलाह देने के साथ धान क्षेत्रों में सीधी बुवाई एवं वैकल्पिक गीला-सूखा पद्धति को लेकर योजना तैयार होगी।

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