- 4 प्रतिशत दुकानों की नीलामी के लिए सरकार के सारे प्रयास अभी तक फेल

गौरव चौहान
मप्र सरकार ने इस नई शराब नीति में कई अहम नियम बनाए हैं। इससे सरकार को वित्तीय वर्ष 2026-27 में शराब बिक्री से अच्छा मुनाफा होने की उम्मीद है। लेकिन विडंबना यह है कि कई बार की नीलामी प्रक्रिया के बाद भी अभी तक करीब 4 प्रतिशत शराब दुकानों का संचालन करने के लिए ठेकेदार ही नहीं मिल रहे हैं। गौरतलब है कि इस आबकारी वर्ष में पूरे प्रदेश में 3553 दुकानों का संचालन होगा साथ ही सरकार ने कड़ा रुख अपनाते हुए कोई भी नई शराब दुकान नहीं खोलने का फैसला लिया है। अभी तक प्रदेश में करीब 96 प्रतिशत शराब दुकानों की नीलामी हो चुकी है। ऐसे में सरकार के सामने समस्या खड़ी हो गई है कि शेष बची दुकानों का संचालन कैसे किया जाए।
दरअसल, मप्र सरकार के तमाम प्रयासों के बाद भी कुछ शराब दुकानों की नीलामी के लिए ठेकेदार सामने नहीं आ रहे हैं। करीब 454 शराब दुकानों की नीलामी के लिए सरकार को एड़ी-चोटी का जोर लगाना पड़ा है। यहां तक की सरकार ने इन शराब दुकानों की नीलामी के लिए इनकी ऑफसेट प्राइस पिछले साल के मुकाबले 40 प्रतिशत कम कर दी, इसके बाद भी 152 शराब दुकानें नीलाम नहीं हो पाई हैं। अधिकारियों का कहना है कि अधिक ऑफसेट प्राइस, स्थानीय बाजार की स्थिति, प्रतिस्पर्धा की कमी जैसे कारणों से नीलामी प्रक्रिया प्रभावित हुई है। पिछले दो वर्षों में सरकार ने शराब दुकानों के ऑफसेट प्राइस में इतनी ज्यादा वृद्धि कर दी है कि ठेकेदारों को मुनाफा निकालना मुश्किल पड़ रहा है। इसके बाद आबकारी विभाग ने निर्णय लिया कि इन बची हुई शराब दुकानों की नीलामी पिछले साल के ऑफसेट प्राइस पर ही की जाएगी। इसके बाद भी कई दुकानों का निष्पादन नहीं हो पाया। फिर विभाग ने इन दुकानों का ऑफसेट प्राइस पिछले साल से 5 प्रतिशत कम, 10 प्रतिशत कम… और अंत में 40 प्रतिशत तक कम निर्धारित कर दिया, इसके बाद भी 152 दुकानों का निष्पादन होना शेष है। शेष 152 दुकानों का कुल आरक्षित मूल्य 1,450 करोड़ रुपए है, लेकिन इनके लिए अब तक मात्र 573 करोड़ रुपए के होल्ड ऑफर ही सामने आए हैं। ऐसे में आबकारी विभाग के सामने चुनौती है कि शेष दुकानों की नीलामी जल्द पूरी कर ली जाए।
सरकार को 1,951 करोड़ के राजस्व का नुकसान
आधिकारिक जानकारी के मुताबिक प्रदेश में पिछले कई वर्षों में ऐसी नौबत पहली बार आई है, जब सरकार को शराब दुकानों की नीलामी के लिए ऑफसेट प्राइस इतनी कम करना पड़ी है। अब पूरा आबकारी विभाग इस बात पर मंथन कर रहा है कि आखिर इन बची हुई शराब दुकानों की नीलामी कैसे की जाए?, इसके लिए अलग-अलग विकल्पों पर विचार किया जा रहा है, क्योंकि इन दुकानों की नीलामी नहीं होने से सरकार को 1,951 करोड़ के राजस्व का नुकसान हो रहा है। इस साल सरकार ने शराब दुकानों की नीलामी से 19,952 करोड़ राजस्व प्राप्ति का लक्ष्य रखा है। अब तक शराब दुकानों की नीलामी से सरकार को 18,001 करोड़ का राजस्व प्राप्त हुआ है, जो निर्धारित लक्ष्य से करीब 1,951 करोड़ कम है। दरअसल, मप्र सरकार ने निर्णय लिया था कि इस साल शराब दुकानों के लायसेंस का नवीनीकरण (रिन्यू) नहीं किया जाएगा। शराब दुकानों के वर्तमान मूल्य में 20 प्रतिशत की बढ़ोतरी कर आरक्षित मूल्य निर्धारित किया जाएगा। नई आबकारी नीति में इसका प्रावधान किया गया है। इसी आधार पर शराब दुकानों का निष्पादन किया गया है। प्रदेश में कुल 3,553 शराब दुकानें हैं। इनमें से 454 शराब दुकानों के लिए प्राप्त ऑफर आरक्षित मूल्य से 30 प्रतिशत नीचे प्राप्त होने के कारण इन दुकानों को होल्ड कर दिया गया था।
न्यूनतम बोली की सीमा खत्म कर टेंडर बुलाए
मध्य प्रदेश में शराब दुकानों की नीलामी में सरकार बार-बार यू टर्न लेती नजर आ रही है। 22 चरणों की नीलामी के बाद सरकार ने प्रदेश में बची करीब 152 दुकानों की नीलामी के लिए न्यूनतम बोली की सीमा को खत्म करते हुए टेंडर बुलाए थे, लेकिन सभी टेंडर 40 प्रतिशत से कम कीमत पर होने के कारण इन्हें रिजेक्ट कर दिया गया। यानी सरकार अपनी ही बात पर कायम नहीं रही। अब तय कीमत से 45 प्रतिशत कम पर टेंडर बुलाए गए हैं। उल्लेखनीय है कि मध्य प्रदेश में 27 फरवरी से शराब दुकानों की नीलामी की प्रक्रिया जारी है। सरकार द्वारा कीमत को 20 प्रतिशत बढ़ाने और टेंडर नवीनीकरण की व्यवस्था को खत्म करने के कारण पहली बार नीलामी अब तक पूरी नहीं हो पाई है। प्रदेश की 3553 दुकानों में से अब भी करीब 152 दुकानों को खरीदार नहीं मिल पाए हैं। अभी सरकार तय कीमत से 40 प्रतिशत तक कम पर टेंडर बुला रही थी, लेकिन किसी व्यापारी द्वारा टेंडर जमा नहीं किए जाने के बाद सरकार ने न्यूनतम बोली की सीमा को खत्म करते हुए टेंडर बुलाए थे। इसके बाद व्यापारियों ने टेंडर भरे तो सरकार ने ऑफर 40 प्रतिशत से कम पाए जाने पर सभी को रिजेक्ट कर दिया। अब सरकार ने कीमत को 5 प्रतिशत और कम करते हुए 45 प्रतिशत तक कम पर टेंडर बुलाए हैं।
