
- 145 एकड़ में बन रहे इंटरनेशनल स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स में स्टेडियम की चारदीवारी और सर्विस रोड के लिए जगह नहीं बची
भोपाल/बिच्छू डॉट कॉम। राजधानी के नीलबड़ के पास बरखेड़ा नाथू में बन रहे प्रदेश के सबसे बड़े इंटरनेशनल स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स की निर्माण प्रक्रिया अंतिम चरण में पहुंच गई है, लेकिन इसी दौरान एक ऐसी तकनीकी और प्रशासनिक चूक सामने आई है जिसने पूरी परियोजना की योजना पर सवाल खड़े कर दिए हैं। करीब 1300 करोड़ रुपये की इस महत्वाकांक्षी परियोजना में अब 16 एकड़ अतिरिक्त जमीन की जरूरत पड़ गई है। हैरानी की बात यह है कि चार साल तक निर्माण कार्य चलता रहा, लेकिन किसी को यह पता नहीं चला कि क्रिकेट स्टेडियम की चारदीवारी और निकासी मार्ग के लिए पर्याप्त भूमि छोड़ी ही नहीं गई। अब प्रशासन करीब चार एकड़ निजी भूमि का अधिग्रहण करेगा, जबकि लगभग 12 एकड़ शासकीय भूमि परियोजना में जोड़ी जाएगी।
खेल एवं युवा कल्याण विभाग ने वर्ष 2022 में इस परियोजना का निर्माण शुरू कराया था। निर्माण की जिम्मेदारी एमपीआरडीसी को दी गई। करीब 145 एकड़ में विकसित हो रहे इस खेल परिसर में अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट स्टेडियम, फुटबॉल स्टेडियम, हॉकी मैदान, इंडोर स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स, ओलंपिक स्तर का स्विमिंग पूल, खेल विज्ञान केंद्र और अन्य विश्वस्तरीय सुविधाएं बनाई जा रही हैं। निर्माण अंतिम दौर में पहुंचा तो पता चला कि क्रिकेट स्टेडियम की चारदीवारी और सर्विस रोड के लिए पर्याप्त जगह ही उपलब्ध नहीं है। इसके बाद दोबारा सर्वे कराया गया और अतिरिक्त 16 एकड़ भूमि की आवश्यकता बताई गई। यही वह सवाल है जो पूरी परियोजना पर खड़ा हो रहा है—क्या 1300 करोड़ रुपये की परियोजना शुरू करने से पहले विस्तृत सर्वेक्षण और मास्टर प्लान का सही आकलन नहीं किया गया था?
अगर आसपास जमीन नहीं होती…
विशेषज्ञों का कहना है कि यदि परियोजना के आसपास शासकीय और निजी भूमि उपलब्ध नहीं होती, तो करोड़ों रुपये की यह परियोजना अधर में लटक सकती थी। ऐसे में यह मामला केवल अतिरिक्त भूमि का नहीं, बल्कि परियोजना की प्रारंभिक योजना, डिजाइन और तकनीकी परीक्षण की गंभीर खामी का संकेत देता है। सवाल उठता है कि 1300 करोड़ की परियोजना में जमीन का सही आकलन क्यों नहीं हुआ? मास्टर प्लान और डीपीआर तैयार करते समय यह कमी कैसे छूट गई? निर्माण शुरू होने से पहले तकनीकी सत्यापन किसने किया? अगर अतिरिक्त जमीन उपलब्ध नहीं होती तो क्या परियोजना अधूरी रह जाती? यह मामला केवल 16 एकड़ जमीन का नहीं, बल्कि प्रदेश की सबसे बड़ी खेल परियोजना की योजना, निगरानी और जवाबदेही पर गंभीर सवाल खड़ा करता है।
प्रदेश का सबसे बड़ा खेल परिसर
परियोजना में 30 हजार दर्शक क्षमता वाला अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट स्टेडियम, 10 हजार क्षमता का फुटबॉल स्टेडियम, दो हॉकी स्टेडियम, अत्याधुनिक इंडोर स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स, ओलंपिक मानक का स्विमिंग पूल, खेल विज्ञान केंद्र, छह किलोमीटर लंबी फोरलेन सड़क, घुड़सवारी ट्रैक, ओपन एयर थिएटर, सौर ऊर्जा संयंत्र, वर्षा जल संचयन और आधुनिक अपशिष्ट प्रबंधन जैसी सुविधाएं विकसित की जा रही हैं।
तीन चरणों में हो रहा निर्माण
इंटरनेशनल स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स का निर्माण तीन चरणों में हो रहा है। पहले चरण में अंतरराष्ट्रीय एथलेटिक्स ट्रैक, हॉकी अभ्यास मैदान, बास्केटबॉल, वॉलीबॉल और टेनिस कोर्ट बनाया जा रहा है। दूसरे चरण में पांच हजार दर्शक क्षमता वाला इंडोर स्टेडियम, तीन सहायक हॉल, खेल विज्ञान केंद्र और छात्रावास और प्रशासनिक भवन बनाया जा रहा है। तीसरे चरण में अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट स्टेडियम, वेलोड्रोम और अन्य सहायक खेल सुविधाएं।
किसानों की जमीन होगी अधिग्रहित
अतिरिक्त भूमि में लगभग चार एकड़ निजी भूमि शामिल है। प्रशासन ने प्रभावित किसानों को नोटिस जारी कर दिए हैं। पंचायत क्षेत्र होने के कारण किसानों को गाइडलाइन मूल्य का चार गुना मुआवजा दिया जाएगा। प्रशासन का दावा है कि अगले तीन महीनों में अधिग्रहण की प्रक्रिया पूरी कर ली जाएगी। एसडीएम हुजूर विनोद सोनकिया के अनुसार, अतिरिक्त भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है और प्रभावित किसानों को नियमानुसार चार गुना मुआवजा दिया जाएगा। वहीं संयुक्त संचालक, खेल एवं युवा कल्याण विभाग बी.एस. यादव ने बताया कि क्रिकेट स्टेडियम के तीसरे चरण के निर्माण के लिए 16 एकड़ अतिरिक्त भूमि की आवश्यकता है, जिसमें लगभग 12 एकड़ शासकीय और चार एकड़ निजी भूमि शामिल है। इसका प्रस्ताव शासन को भेज दिया गया है।
