एमपी के 4 आईएएस अधिकारियों की केंद्र में नहीं होगी नियुक्ति

  • राज्य सरकार ने भेजने से किया इनकार
    भोपाल/बिच्छू डॉट कॉम
    । भारतीय प्रशासनिक सेवा के अधिकारियों की कमी के चलते मध्यप्रदेश सरकार अपने 4 आईएएस अधिकारियों को फिलहाल केन्द्रीय प्रतिनियुक्ति पर नहीं भेजेगी। राज्य शासन द्वारा इन अधिकारियों को अनुमति प्रदान करने से साफ मना कर दिया है। भारतीय प्रशासनिक सेवा वर्ष 2012 बैच के अधिकारी हर्षिका सिंह, रोहित सिंह, अभिजीत अग्रवाल और अनुराग चौधरी ने केन्द्रीय प्रतिनियुक्ति पर जाने के लिए राज्य शासन से अनुमति मांगी थी। राज्य शासन ने उनके प्रस्तावों पर यह कहते हुए इंकार कर दिया है कि मध्यप्रदेश में आईएएस अधिकारियों के स्वीकृत पदों में से 68 रिक्त है। जिससे राज्य शासन का विभिन्न स्तर पर कार्य प्रभावित होता है। शासन पहले से केंद्र में प्रतिनियुक्ति पर कार्यरत मध्यप्रदेश कैडर के अधिकारी अगले वर्ष अपनी अवधि पूरी कर लौटें। इसके बाद केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर जाने संबंधी प्रस्तावों पर विचार किया जाएग जाएगा। प्रतिनियुक्ति पर जाने का आवेदन देने वाले अधिकारियों के पास मौजूदा समय में कई अहम विभागों की जिम्मेदारी है। इनमें हर्षिका सिंह जहां संचालक बजट है, तो रोहित सिंह प्रबंध संचालल मप्र पाठ्यपुस्तक निगम, अभिजीत अग्रवाल के पास मध्यप्रदेश राज्य सहकारी विपणन संघ (मार्कफेड) के प्रबंध संचालक का दायित्व है, तो अनुराग चौधरी प्रबंध संचालक मध्यप्रदेश मत्स्य महासंघ की जिम्मेदारी निभा रहे हैं। प्रदेश में आईएएस कैडर के पद खाली पदों को भरने के लिए राज्य प्रशासनिक सेवा के अधिकारियों को आईएएस सेवा में पदोन्नत करने की प प्रक्रिया में भी देरी हो रही है। जिससे खाली पदों की पूर्ति नहीं हो पा रही हैं। जिससे सरकारी कामकाज भी प्रभावित हो रहा है। 13 पदो के लिए हो चुकी है डीपीसी हालांकि अक्टूबर माह में राज्य प्रशासनिक सेवा के अधिकारियों को आईएएस पदों पर पदोन्नत करने के लिए नई दिल्ली में विभागीय पदोन्नति समिति की बैठक हो चुकी है, जिसमें 13 अधिकारियों को पदोन्नत किया जाना है।
    अगले माह 19 अधिकारी होंगे पदोन्नत
    इधर सामान्य प्रशासन विभाग ने राज्य के प्रमुख सचिव और सचिव पद पर आईएएस अफसरों को पदोन्नत करने की प्रक्रिया की शुरुआत कर दी है। इस संबंध में अगले माह निर्णय होगा और अधिकारी 1 जनवरी 2027 से पदोन्नत होंगे। संबंधित अधिकारियों के बारे में सामान्य प्रशासन विभाग ने लोकायुक्त और आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ से इसी माह के दूसरे सप्ताह तक जांच संबंधी रिपोर्ट मांगी है। जिससे दिसम्बर के दूसरे सप्ताह तक विभागीय पदोन्नति समिति की बैठक आहुत की जाएगी। इसमें तीन अधिकारी प्रमुख सचिव और 16 अधिकारी सचिव पद पर पदोन्नत होंगे। इनमें कुछ अधिकारी फिलहाल जिलों के कलेक्टर हैं। जिन अधिकारियों का जनवरी में प्रमोशन होना है, उनमें स्कूल शिक्षा विभाग के सचिव संजय गोयल, कृषि सचिव निशांत वरवड़े और मुंबई में पदस्थ ज्ञानेश्वर पाटिल प्रमुख सचिव बनेंगे, तो ग्वालियर कलेक्टर रुचिका चौहान, अनुसूचित जाति वित्त विका निगम का नेहा मारव्या, मुख्यमंत्री के अपर सचिव चंद्रमौली शुक्ला, जल निगम के प्रबंध संचालक वीएस चौधरी कोलसानी, संचालक कृषि उमाशंकर भार्गव, हाउसिंग बोर्ड के आयुक्त गौतम सिंह के अलावा उन्हीं के बैच के अन्य अधिकारी सचिव के पद पर पदोन्नत होंगे।
    छोटे जिलों के गठन और प्रशासनिक अक्षमता पर उठे सवाल
    प्रशासनिक अक्षमता को छिपाने के लिए अधिकारियों की कमी का बहाना बनाया जा रहा है। युवा अधिकारियों का केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर जाना उनके करियर की प्रगति के लिए बेहद जरूरी है। सरकार द्वारा अधिकारियों की कमी का बहाना बनाकर उन्हें रोकना पूरी तरह से अनुचित है। राजनीतिक कारणों से पांढुर्णा, मैहर और निवाड़ी जैसे छोटे-छोटे (दो-दो तहसील वाले) जिले बना देने से प्रशासनिक व्यवस्था पर अनावश्यक दबाव बढ़ा है।
    – डीएस राय, सेवानिवृत्त आईएएस

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