
- मोहन ‘राज’ में डबल इंजन की सरकार का साथ
मप्र में विकास के रोज नए रिकॉर्ड बन रहे हैं। इसके पीछे सबसे बड़ा संबल डबल इंजन सरकार का साथ है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सरकार की नीतियों और योजनाओं का समेकित क्रियान्वयन कर मप्र आर्थिक विकास के पथ पर सरपट दौड़ रहा है और विकसित भारत-2047 का लक्ष्य साध रहा है।
गौरव चौहान/बिच्छू डॉट कॉम
भोपाल (डीएनएन)। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जिस वक्त डबल इंजन की सरकार का नारा दिया था, उस वक्त भले ही यह वाक्य आम लागों-राजनेताओं को अजीब लगा हो अथवा समझ में ही न आया हो, लेकिन, पीएम मोदी इस वाक्य का दूरगामी परिणाम जानते थे। आज यह वाक्य देश के हर राज्य में गूंजता है। इसी डबल इंजन के डोज पर मप्र सरकार भी काम कर रही है। देश का हृदय प्रदेश कहा जाने वाला मप्र पिछले कुछ वर्षों में तेजी से विकास की राह पर अग्रसर है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की केन्द्र सरकार और मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की राज्य सरकार की समन्वित नीतियों, सुधारों और जन-कल्याणकारी योजनाओं ने राज्य को आर्थिक, औद्योगिक, कृषि और कई क्षेत्रों में नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया है। सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास की भावना से प्रेरित डबल इंजन सरकार का यह प्रयास मप्र को आत्मनिर्भर बनाने के साथ ही पीएम नरेंद्र मोदी के विकसित भारत-2047 के लक्ष्य की ओर मजबूती से ले जा रहा है। मप्र की मोहन सरकार ने औद्योगिक निवेश को अपनी बड़ी प्राथमिकता दी है। ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट और अनेक क्षेत्रीय सम्मेलनों के माध्यम से प्रदेश को जहाँ हजारों करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं वहीँ दिल्ली-नागपुर, अटल प्रगति एक्सप्रेस वे, नर्मदा एक्सप्रेस वे और इंदौर-पीथमपुर जैसे औद्योगिक गलियारों के तेजी से विकास ने मप्र में निवेश को बूस्टर डोज दी है। राज्य में निवेशकों को 500 वर्ग किलोमीटर से अधिक औद्योगिक भूमि बैंक, विश्वसनीय बिजली आपूर्ति और जल संसाधन उपलब्ध कराए जा रहे हैं। मप्र में नर्मदा प्रगति पथ, विंध्य एक्सप्रेस- वे,मालवा- निमाड़ – एक्सप्रेस- वे, अटल प्रगति पथ, बुंदेलखंड विकास पथ, मध्य भारत एक्सप्रेस- वे बनने से प्रदेश में कनेक्टिविटी को बड़ी रफ़्तार मिल रही है जिसके चलते निवेशकों की मप्र के प्रति रूचि बढ़ रही है। दुबई और स्पेन सरीखे देशों से भी बड़े निवेश प्रस्ताव मप्र को मिल रहे हैं। मप्र टेक ग्रोथ कॉन्क्लेव और स्टार्टअप समिट 2026 ने टेक्नोलॉजी और इनोवेशन जैसे क्षेत्रों में मप्र को नई उड़ान दी है।एआई-आधारित शासन और सौर ऊर्जा पर जोर देते हुए मुख्यमंत्री ने दावोस में भी मप्र की वैश्विक पटल पर ब्रांडिंग की जिससे मप्र के प्रति ग्लोबल निवेशक आकर्षित हुए हैं। मप्र की अर्थव्यवस्था लगातार मजबूत हो रही है। राज्य का सकल घरेलू उत्पाद वृद्धि दर हाल के वर्षों में औसतन 9-11 प्रतिशत के आसपास रही है, जो कई राज्यों से बेहतर है। 2025-26 के आंकड़ों के अनुसार जीएसडीपी लगभग 18.48 लाख करोड़ रुपये तक पहुंचने का अनुमान है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में राज्य सरकार ने धार्मिक पर्यटन को नई ऊंचाइयों पर पहुंचाने के लिए हवाई सेवाओं का व्यापक विस्तार शुरू किया है। मार्च 2024 में प्रधानमंत्री (पीएमश्री) पर्यटन वायु सेवा और पीएमश्री धार्मिक पर्यटन हेली सेवा का शुभारंभ हुआ जो लोक निजी भागीदारी (पीपीपी) मॉडल पर आधारित है। यह योजना भोपाल, इंदौर, जबलपुर, ग्वालियर, उज्जैन, रीवा, सिंगरौली और खजुराहो जैसे आठ प्रमुख शहरों को जोड़ती है। यह विस्तार न केवल तीर्थयात्रियों की सुविधा बढ़ा रहा है, बल्कि स्थानीय अर्थव्यवस्था को गति दे रहा है। मोहन के दौर का मप्र अब ‘आकाशमार्ग से तीर्थयात्रा’ का नया अध्याय लिख रहा है जो आस्था और आधुनिकता का अनूठा संगम है।
केंद्रीय योजनाओं में मप्र का प्रदर्शन बेहतर
मोदी सरकार की मेक इन इंडिया, आत्मनिर्भर भारत जैसी अनेकों योजनाओं का लाभ मप्र को मिल रहा है। टेक्सटाइल, फार्मास्यूटिकल्स, इलेक्ट्रॉनिक्स और एग्रीटेक क्षेत्रों में नई यूनिट्स स्थापित हो रही हैं, जिससे लाखों रोजगार सृजित हो रहे हैं। पीएम जन- धन योजना में मप्र में 4.69 करोड़ से अधिक खाते खुले जिससे डीबीटी के माध्यम से वित्तीय समावेशन को महजबूती मिली है। इसी तरह से प्रधानमंत्री उज्जवला योजना के माधयम से मप्र में 89 लाख से अधिक कनेक्शन मिले जिससे महिलाओं को रसोई गैस के धुंए से मुक्ति मिली। केंद्र की मोदी सरकार के जल जीवन मिशन से भी मप्र में हर घर नल से जल का संकल्प साकार हुआ है जिससे प्रदेश के 1 करोड़ 11 लाख परिवार सीधे लाभान्वित हुए हैं। प्रधानमंत्री मुद्रा योजना के माध्यम से प्रदेश के लाखों उद्यमियों को आर्थिक सहयोग मिल रहा है। वित्तीय वर्ष 2025-26 में मप्र में इस योजना में जहां 32.41 लाख लाभार्थियों को ऋण वितरित किये गए वहीं वित्तीय वर्ष 2026-27 में यह आंकड़ा 4.82 लाख तक पहुंच चुका है। पीएम स्वनिधि योजना भी छोटे व्यापारियों के लिए बड़ा सहारा बनी। इस योजना के माध्यम से प्रदेश के 15.87 लाख प्रकरणों में 2679.49 करोड़ रुपए का ऋण वितरण किया गया है। मोहन युग में आज का मप्र विकास की नई ऊंचाइयों को छू रहा है। प्रदेश में विकास के सभी क्षेत्रों में हर दिन नवाचार हो रहे हैं। राज्य ने बुनियादी ढांचे, शिक्षा, स्वास्थ्य और पर्यटन जैसे प्रमुख क्षेत्रों में उल्लेखनीय प्रगति दर्ज की है। सडक़, बिजली और डिजिटल कनेक्टिविटी में सुधार ने न केवल उद्योगों के लिए अनुकूल माहौल तैयार किया है, बल्कि गांव-गांव तक विकास की रोशनी पहुंचाई है। स्मार्ट सिटीज़ मिशन के तहत भोपाल, इंदौर, जबलपुर और ग्वालियर जैसे शहर आधुनिक शहरी प्रबंधन और स्वच्छता के मॉडल बनकर उभरे हैं वहीं नर्मदा घाटी विकास परियोजनाओं ने सिंचाई और जल संरक्षण में क्रांतिकारी बदलाव लाए हैं। सडक़, बिजली और जल आपूर्ति जैसी बुनियादी सुविधाओं में भारी निवेश ने ग्रामीण क्षेत्रों को मुख्यधारा से जोड़ा है। मोदी सरकार की पीएम किसान सम्मान निधि, प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजनाओं और मोहन सरकार की मुख्यमंत्री किसान कल्याण योजनाओं ने किसानों की आय बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। सिंचाई सुविधाओं का विस्तार, कृषि यंत्रीकरण तथा फसल बीमा जैसी योजनाओं से किसानों को लाभ मिल रहा है जिसके परिणामस्वरूप कृषि उत्पादन में वृद्धि हुई है और ग्रामीण अर्थव्यवस्था मजबूत हुई है। प्रदेश में डिजिटल कृषि सेवा से एक तरफ जहां किसान सशक्त हो रहे हैं वहीं किसानों को मौसम, मंडी भाव, रोग कीट प्रदबंधान और ड्रोन स्प्रे की रियाल टाइम जानकारी मिल रही है। गौशालाओं को बढ़ावा देने, दूध उत्पादन दोगुना करने के प्रयास और कृषि प्रसंस्करण इकाइयों का विस्तार राज्य की अर्थव्यवस्था की रीढ़ को मजबूत कर रहा है। पीएम आवास योजना शहरी के माध्यम से हर जरूरतमंद को पक्का आवास दिया जा रहा है। मप्र के 9 लाख से अधिक आवास हितग्राहियों को इस योजना के माध्यम से आवास सौंपे गए हैं। साइबर तहसील जैसी डिजिटल पहल पारदर्शिता और सुशासन सुनिश्चित कर रही हैं।
मोदी सरकार की आयुष्मान भारत, पीएम जन मन और शिक्षा संबंधी योजनाओं के साथ राज्य सरकार के प्रयासों ने स्वास्थ्य और शिक्षा क्षेत्र को नई दिशा दी है। मप्र में बेहतर सेवाओं का लगातार इजाफा हो रहा है। उज्जैन में पहली मेडिसिटी और मेडिकल कालेज का जहाँ भूमि पूजन हो चुका है वहीं पीएम श्री एंबुलेंस जैसी सेवा से कई मरीजों के जीवन में सवेरा हुआ है। इसी तरह से प्रदेश में एमबीबीएस की 5500 और स्नातकोत्तर की 2862 सीटों में वृद्धि हुई है। मैहर, मऊगंज, पांढुर्णा में 3 नए अस्पतालों की स्वीकृति से जनता को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं मिल रही है। मोहन सरकार बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं के लिए संकल्पित है। सर्वाइकल कैंसर जैसी गंभीर बीमारी से बचाव और सुरक्षित भविष्य प्रदान करने की दिशा में एचवीपी टीकाकरण अभियान में मप्र आज देश के शीर्षस्थ राज्यों में शामिल हुआ है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सांस्कृतिक अभ्युदय के संकल्प को मप्र में पूरा करने की ओर मजबूती से कदम बढ़ा रही है। प्रदेश में सांस्कृतिक और आध्यात्मिक पर्यटन को बढ़ावा देने के लिये मोहन सरकार राम गमन पथ विकसित कर रही है वहीं चित्रकूट को भी अयोध्या की तर्ज पर विकसित किया जा रहा है ।डॉ. मोहन यादव ने भगवान कृष्ण से जुड़े इन स्थलों को विकसित करने की महत्वाकांक्षी योजना पर भी आगे बढ़ रही है जिसे ‘कृष्ण पाथेय’ के रूप में जाना जा रहा है। इस योजना के तहत, राज्य में कृष्ण से जुड़े प्रमुख स्थलों का चयन किया गया है।
सुशासन की पर्याय बनती मोहन सरकार
सुशासन की प्रभावी नीतियों और जनकल्याणकारी कार्यक्रमों के कारण मप्र विकास की नई ऊंचाइयों की ओर अग्रसर है। पारदर्शिता, जवाबदेही और जनभागीदारी पर आधारित शासन व्यवस्था ने राज्य को प्रगति की राह पर आगे बढ़ाया है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में सेवा, सुशासन और गरीब कल्याण के लिये सरकार दिन रात एक किए हुए हैं। सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास और सबका प्रयास का नारा वंचितों के जीवन में सुधार लाने के उद्देश्य से अब मप्र सरकार की नीतियों की आधारशिला ही बन चुका है। डॉ मोहन यादव प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सुशासन की आदर्श अवधारणा को पूर्ण रूप से मप्र में लागू करने के लिए प्रतिबद्ध हैं। डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में मप्र ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह की ओर से निर्धारित समय-सीमा से पहले ही प्रदेश को नक्सलवाद से मुक्त कर दिया है। बालाघाट समेत प्रभावित क्षेत्रों में पुलिस अधिकारियों ने सघनता से इस अभियान को सफल बनाया है। यह उपलब्धि न केवल कानून-व्यवस्था की मजबूती दर्शाती है, बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों में शांति और समृद्धि का आधार भी तैयार कर रही है।
मोहन सरकार प्रधानमंत्री मोदी की बताई गई चार जातियों- गरीब, युवा, किसान और महिलाओं के विकास और कल्याण के लिए कृतसंकल्पित है। स्कूलों, कॉलेजों और कौशल विकास केंद्रों का विस्तार युवाओं को रोजगार योग्य बना रहा है। मप्र नई शिक्षा नीति को लागू करने, सकल पंजीयन दर बढ़ाने और खनिज क्षेत्र में देश में अव्वल रहा है। महिलाओं के लिए विशेष योजनाएं मुख्यमंत्री लाड़ली बहना योजना, स्व-सहायता समूहों को प्रोत्साहन और उद्यमिता कार्यक्रम राज्य में महिलाओं को समाज की मुख्यधरा से जोडऩे का कार्य कर रहे हैं। डॉ. मोहन यादव का नेतृत्व महिला सशक्तिकरण के क्षेत्र में एक आदर्श बनकर उभरा है। महिलाओं के सशक्तिकरण में लाड़ली बहना योजना और महिला स्वावलंबन मिशन जैसी योजनाएं आत्मनिर्भरता की मिसाल पेश कर रही हैं। डॉ. मोहन के कार्यकाल में लाड़ली बहना योजना में मासिक सहायता 1250 से बढ़ाकर 1500 रुपए हो गई है। सरकारी भर्ती में महिलाओं को 35 फीसदी आरक्षण, लखपति दीदी मिशन ने महिलाओं को आज समाज की मुख्यधारा में लाने का कार्य किया है। मोदी सरकार की दूरदर्शी नीतियों और मोहन सरकार के प्रभावी क्रियान्वयन ने मप्र प्रतिदिन विकास के नए आयाम छू रहा है। यह प्रगति न केवल आंकड़ों में है, बल्कि आम नागरिकों के जीवन स्तर में सुधार के रूप में भी दिख रही है। निरंतर सुधार, निवेश और आमजन की शासन में सीधी भागीदारी से मप्र निश्चित रूप से मोदी सरकार के दौर में संवर रहा है। पीएम मोदी के विकसित भारत 2047 विजन के अनुरूप विकसित मप्र, विकसित भारत का सपना अब दूर नहीं है।
किसानों के प्रति संवेदनशील मोहन
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव किसानों के हितों के प्रति संवेदनशील हैं। किसानों के हितों में लिए जा रहे अनेक निर्णय न केवल किसानों के आर्थिक सशक्तिकरण की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम है, बल्कि प्रदेश सरकार की किसान कल्याण के प्रति अटूट प्रतिबद्धता का भी प्रतीक भी बन रहे हैं। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के विजन से मप्र में कृषि विकास योजनाएं तेजी से लागू हो रही हैं। किसानों की आय बढ़ाने के लिए सरकार योजनाओं की पहुँच परिवारों तक पहुंचाने पर जोर दे रही है। ट्रैक्टर रैली, कृषि प्रदर्शनियों और किसान सम्मेलनों के माध्यम से मोहन सरकार किसानों से सीधा संवाद कर रही है। कैबिनेट ने किसान कल्याण से जुड़ी हजारों करोड़ रुपये की योजनाओं को मंजूरी दी है। कृषक मित्र योजना के तहत 90 प्रतिशत सब्सिडी पर सोलर सिंचाई पंप वितरित किए गए हैं जिससे किसान बिजली पर निर्भरता कम कर आत्मनिर्भर बन रहे हैं। दुग्ध उत्पादन, मत्स्य पालन, उद्यानिकी और तीसरी फसल को प्रोत्साहन देकर कृषि आय विविधीकरण और जैविक खेती पर विशेष जोर दिया जा रहा है। मप्र देश का इकलौता राज्य है जहां किसानों को 5 रुपये में बिजली कनेक्शन उपलब्ध कराया जा रहा है। गौशालाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए ट्रैक्टर-ट्रॉली और भूसे की मशीनें उपलब्ध कराई जा रही हैं। सरकार की किसान केंद्रित नीतियों एक प्रभाव से प्रदेश में दूध संग्रहण भी काफी तेजी से बढ़ रहा है। प्रदेश की कृषि वृद्धि दर 16 प्रतिशत तक पहुंचने में इन सभी प्रयासों का महत्वपूर्ण योगदान है। केन्द्र सरकार की सबसे महत्वपूर्ण योजना प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि है। इसके तहत सभी भूमि धारक किसान परिवारों को प्रति वर्ष 6,000 रू की आय सहायता तीन समान किस्तों में सीधे बैंक खातों में ट्रांसफर की जाती है। मप्र में लाखों किसान इस योजना का लाभ उठा रहे हैं। इसी तरह मप्र सरकार भी किसानों को 6000 रुपये महीने देती है। इससे किसानों को जीवन संचालित करने में आसानी होती है। मुख्यमंत्री किसान कल्याण योजना के अंतर्गत भी 84 लाख से अधिक किसानों के खातों में 20,878 करोड़ रु से अधिक की राशि का अंतरण किया जा चुका है। किसान कल्याण वर्ष के तहत सरकार द्वारा ग्रामीण क्षेत्रों में कृषि भूमि के अधिग्रहण पर बाजार दर का चार गुना मुआवजा देने का प्रावधान किया गया है। यह निर्णय विकास कार्यों और किसानों के हितों के बीच संतुलन बनाते हुए किसानों को आर्थिक सुरक्षा प्रदान कर रहा है। उड़द पर समर्थन मूल्य के अतिरिक्त 600 रु प्रति क्विंटल बोनस दिया जा रहा है। सरसों के लिए भावांतर योजना का विस्तार हुआ है। आपदा प्रभावित किसानों को राहत पैकेज के भी सरकार द्वारा वितरित किए गए हैं।
ग्रामीण अर्थव्यस्था को मिलेगी बूस्टर डोज
देश का ह्रदयप्रदेश कहा जाने वाला मप्र अपनी समृद्ध वन संपदा, राष्ट्रीय उद्यानों और विशाल पशुधन के कारण भारत में पशु कल्याण और संरक्षण का प्रमुख केंद्र बनकर उभर रहा है। केन्द्र की मोदी सरकार की दूरदर्शी योजनाओं और डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व वाली राज्य सरकार के सक्रिय और समन्वित प्रयासों ने मप्र में पशुधन विकास, गौ-संरक्षण तथा वन्यजीव संरक्षण को एक नई दिशा दी है। इन प्रयासों से न केवल पशुओं के स्वास्थ्य और संरक्षण में सुधार हुआ है, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिली है। केन्द्र की मोदी सरकार और मप्र के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के संयुक्त प्रयासों से मप्र में पशुपालन के क्षेत्र में एक नया अध्याय शुरू हुआ है। प्रदेश की मोहन सरकार ने पशुओं की रक्षा, संरक्षण और संवर्धन को न केवल धार्मिक-सांस्कृतिक दृष्टि से बल्कि आर्थिक विकास और किसानों की आय वृद्धि के प्रमुख साधन के रूप में अपनाया है।केन्द्र सरकार ने पशु कल्याण को प्राथमिकता देते हुए कई महत्वपूर्ण योजनाएं चला रही है, जिनका मप्र में प्रभावी क्रियान्वयन हो रहा है। राष्ट्रीय गोकुल मिशन के तहत प्रदेश में देशी नस्लों के संरक्षण, संवर्धन और नस्ल सुधार पर विशेष जोर दिया जा रहा है। इससे मप्र में उच्च गुणवत्ता वाले दुधारू पशुओं का तेजी से विकास हो रहा है। इसी तरह से राष्ट्रीय पशुधन मिशन पशुधन उत्पादकता बढ़ाने, स्वास्थ्य सुविधाओं और बीमा के लिए उपयोगी साबित हो रहा है। पशुधन स्वास्थ्य और रोग नियंत्रण के अनेक कार्यक्रमों के माध्यम से टीकाकरण, मोबाइल पशु चिकित्सा इकाइयों और महामारी नियंत्रण पर फोकस किया जा रहा है। राष्ट्रीय डेयरी विकास कार्यक्रम और पशुधन सांख्यिकी सर्वेक्षण से पशुपालकों को सब्सिडी, ऋण और तकनीकी सहायता मिल रही है, जिससे दुग्ध उत्पादन प्रदेश में तेजी से बढ़ रहा है। सहकारी क्षेत्र की अत्याधुनिक केंद्रीय राज्य स्तरीय डेयरी परीक्षण प्रयोगशाला राजधानी भोपाल में स्थापित की जा रही है जिसके निर्माण के लिए भारत सरकार द्वारा राज्य को 12 करोड़ 40 लाख रु का अनुदान दिया गया है। इस प्रयोगशाला के स्थापित होने से दुग्ध उत्पादों की गुणवत्ता में सुधार होगा। मप्र की मोहन सरकार ने गौशालाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए न केवल अपने बजट में अनुदान बढ़ाया है बल्कि पशुओं की नस्ल सुधार पर विशेष जोर दिया है। प्रदेश में स्वावलंबी गौशाला स्थापना नीति-2025 लागू की है। इसके अंतर्गत नगरीय क्षेत्रों में उपलब्ध गोवंश के आश्रय और भरण-पोषण के लिए 5 हजार से अधिक क्षमता वाली वृहद गौशालाएं स्थापित की जा रही हैं जिसके लिए न्यूनतम 130 एकड़ सरकारी जमीन लीज पर उपलब्ध करा रही है। मप्र के आगर मालवा, इंदौर, ग्वालियर और उज्जैन जिलों में आदर्श गौशालाएं स्थापित की जा चुकी हैं, जबकि भोपाल, जबलपुर और सागर में इनके निर्माण कार्य प्रगति पर हैं। ग्वालियर में देश का पहला 100 टन क्षमता वाला सीएनजी प्लांट भी गौशाला में स्थापित किया गया है, जो गोबर से ऊर्जा उत्पादन का अनूठा उदाहरण प्रस्तुत कर रहा है। सरकार ने शासकीय गौशालाओं में प्रति गाय अनुदान राशि बढ़ाई है। मुख्यमंत्री गौ-सेवा योजना के तहत गौशालाओं को मजबूत किया जा रहा है। भटकते गोवंश के प्रबंधन के लिए ‘कामधेनु निवास’ जैसी पहल भी प्रदेश में शुरू की गई है, जिसमें गौशालाओं को भूमि, चारा और आय के स्रोत (दूध, गोबर) उपलब्ध कराए जा रहे हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विजन के अनुरूप प्रदेश की ग्रामीण अर्थव्यवस्था को आधुनिक सांचे में ढालने के लिए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने डॉ. भीमराव आंबेडकर कामधेनु योजना की सौगात मप्र की जनता को दी है। यह मप्र के छोटे और मध्यम स्तर के डेयरी उद्यमियों के लिए किसी वरदान से कम नहीं है। डॉ. भीमराव अंबेडकर कामधेनु योजना के तहत पशुपालकों को 25 दुधारू पशुओं (गाय/भैंस) की इकाई पर 36 लाख से 42 लाख रु तक ऋण और 25 से 33 फीसदी की सब्सिडी दी जा रही है। बैगा, सहरिया जैसी पिछड़ी जनजातियों के लिए मुख्यमंत्री दुधारू पशु योजना के अंतर्गत 90 फीसदी अनुदान पर दो-दो पशु उपलब्ध कराए जा रहे हैं। मुख्यमंत्री डॉ.मोहन यादव का स्पष्ट संकल्प है कि मप्र को देश की ‘मिल्क कैपिटल’ बनाया जाए। इसके लिए दुग्ध समृद्धि अभियान और कृषक कल्याण वर्ष 2026 के अंतर्गत पशुपालन को विशेष महत्व देने की विशेष पहल शुरू हुई है। 2026 के बजट में किसानों को दुधारू पशु उपलब्ध कराने, नस्ल सुधार, पोषण और स्वास्थ्य प्रबंधन पर जोर दिया जा रहा है मुख्यमंत्री दुधारू पशु योजना, कामधेनु निवास योजना और मुख्यमंत्री डेयरी प्लस कार्यक्रम जैसी योजनाओं से पशुपालक आत्मनिर्भर बन रहे हैं। मुख्यमंत्री डेयरी प्लस कार्यक्रम को पायलट प्रोजेक्ट के रूप में सीहोर, विदिशा और रायसेन जिलों में संचालित किया जा रहा है। पशुपालन क्षेत्र में ‘गोरस’ ऐप की डिजिटल क्रांति भी प्रदेश में अपनी दस्तक दे चुकी है। यह ऐप पशुओं केसटीक डाइट चार्ट, आहार सुधार करने पर मिलने वाले अतिरिक्त लाभ और नि:शुल्क वैज्ञानिक परामर्श देने का कार्य कर रहा है। चलित मोबाइल पशु चिकित्सा इकाइयों द्वारा अब तक 15 .16 लाख पशुपालकों के घर पहुंचकर सेवाएं दी गई हैं। सभी पशुपालकों को इन योजनाओं का लाभ मिल रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में मप्र सरकार ने पशुपालन को ग्रामीण विकास का मुख्य आधार बनाया है। सरकार का लक्ष्य है कि मप्र देश का अग्रणी दुग्ध उत्पादक राज्य बने। आज प्रदेश भर में हजारों गौशालाएं और गो-सेवा केंद्र संचालित किये जा रहे हैं। पशु स्वास्थ्य सुविधाएं बढ़ाने की दिशा में सरकार ने ग्वालियर में पशु वेलनेस सेंटर स्थापित किए हैं वहीँ मोबाइल पशु चिकित्सा इकाइयां बढ़ाई गई हैं। पशुधन उत्पादन बढ़ाने के लिए सरकार का जोर एक तरफ जागरूकता अभियान का केंद्रित है वहीँ सहकारिता विकास पर भी वह जोर दे रही है। सरकार वर्तमान में देश के दुग्ध उत्पादन में मप्र का योगदान बढ़ाने और 20 प्रतिशत तक पहुंचाने की दिशा में प्रयत्नशील दिखाई देती है। मप्र सरकार द्वारा 2026 में पेश किये गए बजट में गहन पशु विकास परियोजना के तहत 838 करोड़ रु का प्रावधान किया है जो दुग्ध उत्पादन बढ़ाने की दिशा में सरकार की माजोट इच्छाशक्ति को दिखाता है। एक तरह मोहन सरकार ने पशु कल्याण सेवाओं में विस्तार के लिए 79 करोड़ स्वीकृत किये हैं वहीँ पशुपालकों को 2 लाख तक बिना गारंटी लोन देने का प्रावधान किया है। केंद्र सरकार और मोहन सरकार के समन्वित प्रयासों से मप्र पशु कल्याण के क्षेत्र में निरंतर नई ऊंचाइयों को छू रहा है। यह प्रयास न केवल पशुपालकों के लिए बल्कि किसानों, पर्यावरण और समग्र विकास और रोजगार के साथ आत्मनिर्भर मप्र के लिए वरदान साबित हो रहे हैं। इन प्रयासों से जहां पशुपालक आत्मनिर्भर बन रहे हैं वहीं ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिल रही है। केन्द्र सरकार की योजनाओं का राज्य स्तर पर तेजी से क्रियान्वयन और मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की प्राथमिकता ने मप्र में पशु कल्याण को एक सार्थक रूप प्रदान किया है।
